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Bhiwani News: घर-घर पहुंच रहीं टीकाकरण टीमें, पशुओं को मुंहखुर और गलघोंटू से बचाने का अभियान तेज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 01:10 AM IST
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Vaccination teams are reaching door to door, campaign to protect animals from foot and mouth disease and strangles is intensified.
भिवानी। पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग की ओर से पशुओं को मुंहखुर और गलघोंटू जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। 11 मई से शुरू हुआ यह विशेष अभियान 11 जून तक जारी रहेगा। विभाग की टीमें पशुपालकों के घर पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं।
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पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत ने बताया कि प्रत्येक पशु चिकित्सालय स्तर पर टीकाकरण के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें पशु चिकित्सकों की देखरेख में घर-घर जाकर टीकाकरण कर रही हैं। प्रत्येक टीम के लिए पशु चिकित्सकों को सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है।
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उपनिदेशक और उपमंडलाधिकारी भी समय-समय पर टीकाकरण कार्य और वैक्सीन के तापमान की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा पंचकूला से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी भी फील्ड में पहुंचकर निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वैक्सीन का तापमान दो से आठ डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रखा जाना जरूरी है ताकि इसकी गुणवत्ता बनी रहे।
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उपमंडलाधिकारी डॉ. राजेश जाखड़ ने बताया कि पशुपालक, पशु और टीकाकरण का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। इसके लिए पशु मालिक के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है जिसे विभागीय टीम को बताना होता है ताकि टीकाकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन दर्ज की जा सके। उन्होंने बताया कि पशु के कान में लगे 12 अंकों के टैग के आधार पर ही उसका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि ‘एक भी पशु छूटे ना, सुरक्षा चक्र टूटे ना’ अभियान को सफल बनाने के लिए सभी पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएं।

पशु चिकित्सक डॉ. विजय सनसनवाल ने बताया कि गलघोंटू एक जानलेवा बीमारी है जबकि मुंहखुर रोग से पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पशुपालक इस भ्रांति में न रहें कि टीकाकरण से गर्भपात हो जाता है या दूध सूख जाता है। यह टीकाकरण पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि टीकाकरण के बाद पशु को हल्का बुखार आना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसी स्थिति में तीन दिन तक बुखार की दवा दी जा सकती है। साथ ही पशु को गुड़ खिलाने से दूध उत्पादन पर भी कोई असर नहीं पड़ता।
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