भिवानी: महज 23 साल की निशा का कमाल, पहले ही प्रयास में पास की यूपीएससी परीक्षा, 51वीं रैंक की हासिल
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली निशा ग्रेवाल ने यूपीएससी परीक्षा में 51वीं रैंक हासिल की। खास बात यह है कि महज 23 साल की निशा ने पहले ही प्रयास में यह सफलता पाई है। निशा की सफलता से पूरा परिवार बेहद खुश है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। इस कहावत को चरितार्थ किया है गांव बामला की बेटी निशा ग्रेवाल ने। निशा ने महज 23 साल की उम्र में पहली बार में ही यूपीएससी की परीक्षा पास किया है। न केवल पास किया है, बल्कि बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 51वीं रैंक हासिल की है।
मगर यहां तक का सफर आसान नहीं था। ग्रामीण परिवेश और सुविधाओं के अभाव के बावजूद दिन-रात इस सफलता के लिए मेहतन की है। निशा ने अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने दादा रामफल को दिया है। वे सेवानिवृत्त गणित अध्यापक हैं। निशा को उनके दादा शुरू से ही एक कक्षा आगे की पढ़ाई कराते थे।
यह भी पढ़ें- पंजाब के सीएम का अलग अंदाज: पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी पहुंचे चन्नी ने डाला भंगड़ा, जमकर थिरके
आज से 19 साल पहले जब निशा स्कूल जाने के काबिल हुई थी, तब से ही उसकी ट्रेनिंग शुरू हो गई थी। निशा के दादा रामफल गणित के अध्यापक थे और उन्होंने बचपन से ही निशा को तैयार करना शुरू कर दिया था। गणित के अलावा अन्य विषयों की पढ़ाई भी वे निशा को कराते थे। इससे पढ़ाई दिनचर्या में शामिल हो गई। निशा के पिता सुरेंद्र ग्रेवाल बिजली विभाग में सहायक सब स्टेशन इंचार्ज हैं। उनकी तैनाती औद्योगिक क्षेत्र में है। माता प्रोमिला गृहिणी हैं।
एक साथ दो कक्षाओं की पढ़ाई करती थी निशा
दादा रामफल निशा को सफल करने के लिए इतने कृत्त संकल्प थे कि वे उसे हर साल एक कक्षा आगे की पढ़ाई भी पढ़ाते थे। एक ही साल में दो कक्षाओं की पढ़ाई करने का नतीजा यह रहा कि निशा के समझने का दायरा विस्तृत हो गया। उन्हें कोई भी विषय पढ़ाया जाता तो तुरंत उस पर अपनी पकड़ बना लेती थीं। निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस महिला महाविद्यालय से वर्ष 2019 में बीए किया था।
महिला सशक्तीकरण पर काम करने की इच्छा
निशा ने कहा कि दो साल पहले परिवार से ही भाई विक्रम ग्रेवाल ने भी यूपीएससी में 51वीं रैंक हासिल की थी। वह फिलहाल आईएफएस हैं। मगर मैं आईएएस बनकर महिला सशक्तीकरण पर काम करना चाहूंगी। उन्होंने कहा कि अगर परिवार ने उन्हें सपोर्ट नहीं किया होता तो आज इस मुकाम पर नहीं पहुंच पातीं। इसलिए लड़कियों को आगे लाना बहुत जरूरी है।
दादा बोले- आज मेरी मेहनत सफल हुई
दादा रामफल ने कहा कि बचपन से निशा की तैयारी शुरू की थी। उसने मेहनत भी बहुत की। बस एक ही डर रहता था कि अगर सफल नहीं हुई तो उसकी मेहतन जाया चली जाएगी। मगर आज यूपीएससी परीक्षा पास कर उसने साबित कर दिया कि मेरी मेहनत बेकार नहीं गई।
यह भी पढ़ें- फैसला: अब पंजाब शिक्षा बोर्ड साल में दो टर्म में आयोजित करेगा परीक्षा, दोनों के आधार पर बनेगा रिजल्ट
जरूरत हो तो ट्यूशन भी लें
निशा ने कहा कि अगर तैयारी करते समय लगता है कि कोई विषय कमजोर है तो उससे हिचक नहीं होनी चाहिए। बेहिचक होकर उस विषय का ट्यूशन लगवा लेना चाहिए। गुरु के बिना ज्ञान नहीं मिलता है। इसलिए जब भी लगे कि कहीं भी ट्यूशन की जरूरत है तो ले लेना चाहिए। निशा ने बताया कि उसने 2019 में ग्रेजुएशन किया था। उसके बाद कुछ समय ट्यूशन लिया और उसके बाद घर पर ही तैयारी की थी।
दुष्यंत चौटाला ने किया फोन- उज्ज्वल भविष्य की कामना
निशा ग्रेवाल की उपलब्धि के बारे में जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को पता चला तो उन्होंने फोन कर निशा ग्रेवाल को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। इसके अलावा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के सर्कल महाप्रबंधक रणबीर सिंह, सिटी डिविजन के कार्यकारी अभियंता राहुल सांगवान, कर्मचारी नेता धर्मबीर भाटी, भाजपा नेता रितिक वधवा ने भी निशा ग्रेवाल की उपलब्धि पर खुशी जताई और उनको बधाई दी है।