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असुरक्षित उद्यमी, कैसे बढ़े उद्योग
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Tue, 24 Nov 2015 01:12 AM IST
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भिवानी। पिछले दिनों इंडस्ट्रीज एरिया में रात करीब साढ़े आठ बजे बाइक से लौट रहे एक दुकानदार के सिर में डंडा मार मोबाइलों से भरा बैग और नगदी लूट ली गई। यह एक अकेली ऐसी घटना नहीं है। आठ बजे के बाद मजदूरों से मारपीट कर नगदी व मोबाइल लूटने की घटनाएं आम है। इस तरह की घटनाओं से उद्यमी और मजदूर दहशत में है। अनेक मजदूर इसी डर के चलते यहां से छोड़कर जा चुके है। ऐसे असुरक्षा के माहौल में कैसे उद्योग बढ़े। यह बड़ा सवाल है।
भिवानी का इंडस्ट्रीज एरिया सरकार ही नहीं जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से भी नजरअंदाज किया नजर आ रहा है। कहने को तो यहां करोड़ों का टर्नओवर है मगर न किसी तरह की सुविधा और न ही सुरक्षा। उद्यमियों और मजदूरों में रात आठ बजे का खौफ है। सभी अपने अंदर-बाहर के सभी कार्य आठ बजे से पहले ही निपटाते है। उद्यमियों का कहना है कि अक्सर उन्हें माल की पेमेंट व रिकवरी के लिए ज्यादा राशि लेकर निकलना पड़ता है मगर इंडस्ट्रीज में ऐसा माहौल नहीं है कि ज्यादा राशि लेकर निकला जा सके। उद्यमियों का मानना है कि वे ही अपने आपको असुरक्षित महसूस करते है तो मजदूरों की हालत कैसी होगी सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है। मजदूर तो जितना कमाते है, बदमाश लोग लूट ले जाते है। फैक्ट्रियों में घुसकर भी चोरी करते है।
मजदूरों को ही तंग करती है पुलिस
वैसे तो बाइक राइडर इंडस्ट्रीज एरिया में दिन के समय गश्त करते है मगर चोर-लुटेरों को दबोचने की बजाए मजदूरों को ही तंग करते है। यह कहना है उद्यमियों का। उद्यमियों ने बताया कि अक्सर सामान कम पड़ने पर मजदूरों को बाइक आदि देकर एक फैक्ट्री से दूसरी फैक्ट्री में सामान लाने भेजा जाता है। इसी दौरान गश्त करने वाले इन मजदूरों को पकड़ लेते है और कागजात मांगने लगते है। अधिकतर उद्यमी दो सौ तीन सौ रुपये देकर अपना पीछा छूड़वाते है।
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ये है सबसे ज्यादा असुरक्षित क्षेत्र
बस स्टैंड के साथ से इंडस्ट्रीज की ओर जाने वाले मार्ग और हरिपुर और पालुवास की ओर से इंडस्ट्रीज की ओर जाने वाले मार्ग को सबसे ज्यादा असुरक्षित माना जाता है। बस स्टैंड के पीछे और पालुवास हरिपुर गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर काफी झुग्गी-झोपड़ियां है। उद्यमियों का कहना है कि इनमें रहने वाले कुछ युवक ही आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते है। इन्हें हटवाने के लिए सभी अधिकारियों को शिकायत देने के साथ सीएम विंडो पर भी शिकायत कर चुके है। इसके अलावा विकास नगर और सब्जी मंडी के पीछे से जाने वाले मार्ग पर भी इस तरह की वारदातें होती है।
सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो तो ट्रांसपोरटेशन में भी सहयोग मिलता है। सुरक्षा व्यवस्था हो तो रात में भी माल मंगवाया जा सकता है मगर अभी तो ऐसा माहौल है कि मजदूर ही बाहर निकलने से डरते है।
अशोक कुमार, ट्रांसपोर्टर्स
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इंडस्ट्रीज एरिया में सुरक्षा व्यवस्था बिल्कुल नहीं है। अगर रात्रि गश्त बढ़ जाए तो उद्यमियों को कुछ राहत हो सकती है।
धनराज बंसल, उद्यमी
अधिकतर मजदूर प्रवासी है। इसी का फायदा उठाकर कुछ बदमाश मारपीट कर लूटपाट करते है। मजदूरों को डराया जाता है कि कहीं शिकायत की तो अंजाम बुरा होगा। डर के मारे वे पुलिस को शिकायत भी नहीं करते। अधिकतर मजदूर तो काम ही छोड़कर चले जाते है।
शुभम गर्ग, उद्यमी
आठ बजे के बाद इंडस्ट्रीज एरिया के मार्गों से निकलते समय डर लगता है। मजदूर या तो पहले निकलते है या फिर फैक्ट्री में ही सो जाते है। प्रवासी मजदूर है। इनके साथ मारपीट पर इनकी कमाई व फोन आदि लूट लिये जाते है।
धर्मेंद्र कुमार, उद्यमी
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इंडस्ट्रीज एरिया में पुलिस गश्त करती है। किसी तरह की चोरी, लूटपाट की शिकायत पर कार्रवाई भी की जाती है। उद्यमियों की शिकायत है तो और गश्त बढ़ाएंगे।
बलराज सिंह, एसएचओ, सिविल लाइन थाना
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भिवानी का इंडस्ट्रीज एरिया सरकार ही नहीं जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से भी नजरअंदाज किया नजर आ रहा है। कहने को तो यहां करोड़ों का टर्नओवर है मगर न किसी तरह की सुविधा और न ही सुरक्षा। उद्यमियों और मजदूरों में रात आठ बजे का खौफ है। सभी अपने अंदर-बाहर के सभी कार्य आठ बजे से पहले ही निपटाते है। उद्यमियों का कहना है कि अक्सर उन्हें माल की पेमेंट व रिकवरी के लिए ज्यादा राशि लेकर निकलना पड़ता है मगर इंडस्ट्रीज में ऐसा माहौल नहीं है कि ज्यादा राशि लेकर निकला जा सके। उद्यमियों का मानना है कि वे ही अपने आपको असुरक्षित महसूस करते है तो मजदूरों की हालत कैसी होगी सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है। मजदूर तो जितना कमाते है, बदमाश लोग लूट ले जाते है। फैक्ट्रियों में घुसकर भी चोरी करते है।
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मजदूरों को ही तंग करती है पुलिस
वैसे तो बाइक राइडर इंडस्ट्रीज एरिया में दिन के समय गश्त करते है मगर चोर-लुटेरों को दबोचने की बजाए मजदूरों को ही तंग करते है। यह कहना है उद्यमियों का। उद्यमियों ने बताया कि अक्सर सामान कम पड़ने पर मजदूरों को बाइक आदि देकर एक फैक्ट्री से दूसरी फैक्ट्री में सामान लाने भेजा जाता है। इसी दौरान गश्त करने वाले इन मजदूरों को पकड़ लेते है और कागजात मांगने लगते है। अधिकतर उद्यमी दो सौ तीन सौ रुपये देकर अपना पीछा छूड़वाते है।
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ये है सबसे ज्यादा असुरक्षित क्षेत्र
बस स्टैंड के साथ से इंडस्ट्रीज की ओर जाने वाले मार्ग और हरिपुर और पालुवास की ओर से इंडस्ट्रीज की ओर जाने वाले मार्ग को सबसे ज्यादा असुरक्षित माना जाता है। बस स्टैंड के पीछे और पालुवास हरिपुर गांव की ओर जाने वाले मार्ग पर काफी झुग्गी-झोपड़ियां है। उद्यमियों का कहना है कि इनमें रहने वाले कुछ युवक ही आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते है। इन्हें हटवाने के लिए सभी अधिकारियों को शिकायत देने के साथ सीएम विंडो पर भी शिकायत कर चुके है। इसके अलावा विकास नगर और सब्जी मंडी के पीछे से जाने वाले मार्ग पर भी इस तरह की वारदातें होती है।
सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो तो ट्रांसपोरटेशन में भी सहयोग मिलता है। सुरक्षा व्यवस्था हो तो रात में भी माल मंगवाया जा सकता है मगर अभी तो ऐसा माहौल है कि मजदूर ही बाहर निकलने से डरते है।
अशोक कुमार, ट्रांसपोर्टर्स
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इंडस्ट्रीज एरिया में सुरक्षा व्यवस्था बिल्कुल नहीं है। अगर रात्रि गश्त बढ़ जाए तो उद्यमियों को कुछ राहत हो सकती है।
धनराज बंसल, उद्यमी
अधिकतर मजदूर प्रवासी है। इसी का फायदा उठाकर कुछ बदमाश मारपीट कर लूटपाट करते है। मजदूरों को डराया जाता है कि कहीं शिकायत की तो अंजाम बुरा होगा। डर के मारे वे पुलिस को शिकायत भी नहीं करते। अधिकतर मजदूर तो काम ही छोड़कर चले जाते है।
शुभम गर्ग, उद्यमी
आठ बजे के बाद इंडस्ट्रीज एरिया के मार्गों से निकलते समय डर लगता है। मजदूर या तो पहले निकलते है या फिर फैक्ट्री में ही सो जाते है। प्रवासी मजदूर है। इनके साथ मारपीट पर इनकी कमाई व फोन आदि लूट लिये जाते है।
धर्मेंद्र कुमार, उद्यमी
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इंडस्ट्रीज एरिया में पुलिस गश्त करती है। किसी तरह की चोरी, लूटपाट की शिकायत पर कार्रवाई भी की जाती है। उद्यमियों की शिकायत है तो और गश्त बढ़ाएंगे।
बलराज सिंह, एसएचओ, सिविल लाइन थाना