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Bhiwani News: मजदूरों पर कार्रवाई के विरोध में यूनियन ने किया प्रदर्शन
Sat, 18 Apr 2026 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 18 Apr 2026 10:54 PM IST
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सीएम के नाम ज्ञापन सौंपते एआईयूटीयूसी संगठन के सदस्य।
भिवानी। हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद और पलवल आदि में मजदूरों पर हो रही कथित पुलिस कार्रवाई और उनकी लंबित मांगों को लेकर ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर जिला कमेटी ने रोष जताया। शनिवार को जिला कमेटी ने लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान जब कोई अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा तो संगठन के सदस्य उपायुक्त आवास तक पहुंचे और वहां भी प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम संबोधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा गया। जिला प्रधान धर्मवीर सिंह और जिला सचिव कामरेड राजकुमार बासिया ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का आंदोलन 2 अप्रैल से अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था। लेकिन सरकार और प्रशासन ने समस्याओं के समाधान के बजाय लाठी और दमन का रास्ता अपनाया है।
उन्होंने बताया कि आठ अप्रैल को न्यूनतम वेतन में संशोधन की घोषणा की गई लेकिन इसके अगले ही दिन 9 अप्रैल से मजदूरों पर पुलिस कार्रवाई तेज कर दी गई। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों को गिरफ्तार करना और उन पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द दमनात्मक कार्रवाई बंद नहीं की और लंबित मांगों का समाधान नहीं किया तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर बड़ा और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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प्रदर्शन के दौरान जब कोई अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा तो संगठन के सदस्य उपायुक्त आवास तक पहुंचे और वहां भी प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम संबोधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा गया। जिला प्रधान धर्मवीर सिंह और जिला सचिव कामरेड राजकुमार बासिया ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का आंदोलन 2 अप्रैल से अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था। लेकिन सरकार और प्रशासन ने समस्याओं के समाधान के बजाय लाठी और दमन का रास्ता अपनाया है।
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उन्होंने बताया कि आठ अप्रैल को न्यूनतम वेतन में संशोधन की घोषणा की गई लेकिन इसके अगले ही दिन 9 अप्रैल से मजदूरों पर पुलिस कार्रवाई तेज कर दी गई। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों को गिरफ्तार करना और उन पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। मजदूर नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द दमनात्मक कार्रवाई बंद नहीं की और लंबित मांगों का समाधान नहीं किया तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर बड़ा और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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