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यूक्रेन मामला: रास्ते में फंसे 10 से 12 लोगों को नैना ने करवाया खाना उपलब्ध, दिखाई दरियादिली
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अपने परिजनों के साथ यूक्रेन से लौटी मेडिकल स्टूडेंट नैना सिंह।
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। बुडापोस्ट से आई फ्लाइट में शनिवार सुबह सात बजे नैना सिंह नई दिल्ली पहुंची है। नैना के घर आने पर उनके परिजनों ने खुशी जाहिर की है। वहीं सफर के दौरान कई मेडिकल स्टूडेंट के पास खाना नहीं था तो नैना ने उन्हें खाना देकर इंसानियत दिखाई।
नैना सिंह ने बताया कि वह यूक्रेन के पोलतावा शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। पोलतावा में 25 फरवरी को रूसी सेना द्वारा बम विस्फोट किया था, जिसके बाद हालात गंभीर होते गए। उसने वहां रहने के लिए फ्लैट किराये पर लिया हुआ था, फ्लैट मालिक भी यूक्रेन की सेना में शामिल हो गया और युद्ध में भाग लिया। मकान मालिक के बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसने छह माह का किराया एडवांस में दे दिया, ताकि उनकी आर्थिक सहायता हो सके। यूक्रेन और रूस के बीच हुए युद्ध में बहुत कुछ सीखने को मिला है। युद्ध की वजह से पोलतावा में राशन की दुकान बंद हो गई थी, जिस दौरान उन्होंने पहले ही सुखा राशन, फल और सब्जियां खरीद ली थी। दुकान बंद होने की वजह से काफी लोगों के पास खाने-पीने का सामान खत्म हो गया था तो उसने अपने पास से करीब 10 से 12 लोगों को खाने का सामान दिया। नैना सिंह ने बताया कि 28 फरवरी को वे पोलतावा से हंगरी के लिए ट्रेन में निकली, जहां से वे बुडापोस्ट रेलवे स्टेशन पहुंचे। रेलवे स्टेशन से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित शेल्टर होम तक वे पैदल गए। वे दिन में बाहर घूमकर टाइम पास करते थे, जबकि रात में शेल्टर होम में ठहरते थे। नैना सिंह ने बताया कि सफर के दौरान कई स्टूडेंट के पास खाने के लिए कुछ नहीं था तो उसने अपना खाना उन्हें दिया। नैना ने बताया कि अभी 13 मार्च तक उनकी यूनिवर्सिटी की छुट्टी है। अगर आगे हालात सामान्य रहे तो वह फिर से पढ़ाई पूरी करने के लिए यूक्रेन जाएगी। वहीं उसकी मम्मी सविता घणघस ने बेटी के वापस आने पर खुशी जाहिर की।
24 घंटे से लगातार बस में सफर कर रहे केशव, स्नेहा और मुस्कान
छोटूराम कॉलोनी निवासी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि उनका बेटा केशव ने अन्य मेडिकल स्टूडेंट के साथ मिलकर एक बस किराये पर ली है, जिसमें वे शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे रवाना हुई। केशव पहले ल्वीव जाएंगें, जिसके बाद उन्होंने पोलैंड जाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से टैक्सी बुक करवाई है। ल्वीव पहुंचने के बाद केशव टैक्सी में पोेलैंड के लिए निकलेगा, जहां से फ्लाइट मिलने के बाद वह नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगा। वहीं स्नेहा और मुस्कान ने बताया कि वे पिछले 24 घंटे से बस में सफर कर रहे हैं। बस से वे रोमानिया बॉर्डर पर जाएंगी, जहां से दूतावास के निर्देशानुसार वे फ्लाइट मिलने के बाद नई दिल्ली आएंगी। वहीं बस चालक ने बीच में थोड़ी देर के लिए बस रोकी थी, उस दौरान उन्होंने खाने के लिए चिप्स व अन्य सामान लिया है। लगातार 24 घंटे से बस में बैठे रहने की वजह से थकान महसूस हो रही है। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पार करने के बाद राहत मिलेगी।
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जसिका राणा पहुंची नई दिल्ली, बुआ के पास रुकी
लोहड़ बाजार घाटी जेलदार निवासी राणा दुष्यंत सिंह ने बताया उनकी बेटी जसिका राणा यूक्रेन के शहर खारकीव से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। पिछले दो दिन से वह पोलैंड के दूतावास में ठहरी हुई थी। जसिका राणा शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची है, जहां से वह जनकपुरी में अपनी बुआ के घर गई है।
बुडापोस्ट से आज उड़ान भरेंगे मनीष रंगा
जिले के गांव लालावास निवासी मनीष रंगा ने बताया कि वे यूक्रेन के शहर कीव से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता वेदपाल रंगा सीआरपीएफ में बतौर डिप्टी कमांडेंट कार्यरत है। मनीष ने बताया कि यूक्रेन में बिगड़े हालातों के चलते वे चार दिन पहले बस से बुडापोस्ट आए थे। अब शनिवार रात वाली फ्लाइट से वे नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। मनीष ने बताया कि उनके ठहरने के लिए सेफ हाउस में व्यवस्था की हुई है, जहां सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध है। चार दिन से फ्लाइट न मिलने की वजह से चिंता तो बढ़ी है मगर अब शनिवार रात वाली फ्लाइट में उड़ान की व्यवस्था होने पर राहत की सांस ली है।
तोशाम। भाजपा के मंडल अध्यक्ष विक्की महता का बेटा चिराग महता शनिवार को सुबह अपने घर पहुंच गया है, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। 28 फरवरी से 4 मार्च तक चिराग महता को चार दिन रोमानिया बॉर्डर पर गुजारने पड़ा। इस दौरान खाने की समस्या बनी रही। चिराग महता यूक्रेन के ल्वीव शहर से एमबीबीएस कर रहा है। वह 28 फरवरी को ल्वीव शहर से 480 किलोमीटर का सफर कर रोमानिया बार्डर पर पहुंचा था। 24 फरवरी को दो देशों को बीच युद्ध शुरू हुआ। 24 फरवरी से 28 फरवरी तक चिराग महता को ल्वीव शहर में गुजारने पड़े। इस दौरान वहां सिर्फ जरूरी सामान की दुकानें खुली थी। इन दिनों में सायरन बजते ही उन्हें बंकरो में जाना पड़ता था। मन में बहुत डर रहता था। चार दिन का जो धमाकों का मंजर था, वो उन्हें हमेशा याद रहेगा।
चांग। गांव चांग के वार्ड नं 20 के 25 वर्षीय अमरजीत के घर पहुंचते ही परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू झलक पडे। अमरजीत की मां कमलेेश ने बेटे को गले लगा लिया। अमरजीत ने बताया कि पिछले 10 दिनों में उन्होने जो भयानक युद्ध का मंजर देखा है उसे वह कभी नहीं भुला सकता। वह अपने साथियों के साथ जब पौलेंड के बार्डर के लिए निकला तो हमें वहां पर टैक्सी नहीं मिली, लेकिन मिली तो चार हजार रुपये में मिली। टैक्सी मिलने से पहले वह अपने साथियों के साथ 40 किलोमीटर पैदल चला। चलते-चलते वह अधिक बर्फबारी होने के कारण वह बेसुध होकर गिर गया, जैसे ही उसे होश आया तो उसके दोनों साथी बिछुुड़ चुके थे। सिर में चोट लगी होने के कारण वह घायल अवस्था में ही वह अकेला ही पोलैंड के बार्डर की तरफ चल पड़ा। पोलैंड के बार्डर पर हमें दो दिन तक रोके रखा और पहले दूसरे देशों के बच्चों को निकाला गया। उन्होंने फिर अपने देश की लड़कियों को आगे कर बॉर्डर पार किया। अमरजीत ने बताया कि उन्हें खाना भी नही मिला 8 दिनों तक केवल एक चाकलेट व बिस्कुट खाकर ही अपनी भूख शांत की। सबसे अधिक समस्या हमें करेंसी न बदली जाने के कारण हुई। यूक्रेन की करेंसी न मिलने के कारण वहां पर डॉलर चलने लगा, लेकिन डॉलर की करेंसी उन्हें उपलब्ध न हुई जिस कारण भी उन्हें अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान नंबरदार पवन कुमार भी अमरजीत से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे।
भिवानी। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं ठाकुर बीर सिंह फाउंडेशन के अध्यक्ष ठा. विक्रम सिंह ने शनिवार को यूक्रेन से घर लौटे विद्यार्थियों का हालचाल जाना। ठा. विक्रम सिंह ने सेक्टर-13 निवासी ध्वनि बजाज, डीसी कॉलोनी निवासी वैभव, रामबाग रोड निवासी देव, डीसी कॉलोनी निवासी नितेश शर्मा के परिजनों व विद्यार्थियों मुलाकात की। उनके साथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मनोहर डीएम लोहानी भी रहे। संवाद
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नैना सिंह ने बताया कि वह यूक्रेन के पोलतावा शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। पोलतावा में 25 फरवरी को रूसी सेना द्वारा बम विस्फोट किया था, जिसके बाद हालात गंभीर होते गए। उसने वहां रहने के लिए फ्लैट किराये पर लिया हुआ था, फ्लैट मालिक भी यूक्रेन की सेना में शामिल हो गया और युद्ध में भाग लिया। मकान मालिक के बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसने छह माह का किराया एडवांस में दे दिया, ताकि उनकी आर्थिक सहायता हो सके। यूक्रेन और रूस के बीच हुए युद्ध में बहुत कुछ सीखने को मिला है। युद्ध की वजह से पोलतावा में राशन की दुकान बंद हो गई थी, जिस दौरान उन्होंने पहले ही सुखा राशन, फल और सब्जियां खरीद ली थी। दुकान बंद होने की वजह से काफी लोगों के पास खाने-पीने का सामान खत्म हो गया था तो उसने अपने पास से करीब 10 से 12 लोगों को खाने का सामान दिया। नैना सिंह ने बताया कि 28 फरवरी को वे पोलतावा से हंगरी के लिए ट्रेन में निकली, जहां से वे बुडापोस्ट रेलवे स्टेशन पहुंचे। रेलवे स्टेशन से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित शेल्टर होम तक वे पैदल गए। वे दिन में बाहर घूमकर टाइम पास करते थे, जबकि रात में शेल्टर होम में ठहरते थे। नैना सिंह ने बताया कि सफर के दौरान कई स्टूडेंट के पास खाने के लिए कुछ नहीं था तो उसने अपना खाना उन्हें दिया। नैना ने बताया कि अभी 13 मार्च तक उनकी यूनिवर्सिटी की छुट्टी है। अगर आगे हालात सामान्य रहे तो वह फिर से पढ़ाई पूरी करने के लिए यूक्रेन जाएगी। वहीं उसकी मम्मी सविता घणघस ने बेटी के वापस आने पर खुशी जाहिर की।
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24 घंटे से लगातार बस में सफर कर रहे केशव, स्नेहा और मुस्कान
छोटूराम कॉलोनी निवासी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि उनका बेटा केशव ने अन्य मेडिकल स्टूडेंट के साथ मिलकर एक बस किराये पर ली है, जिसमें वे शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे रवाना हुई। केशव पहले ल्वीव जाएंगें, जिसके बाद उन्होंने पोलैंड जाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से टैक्सी बुक करवाई है। ल्वीव पहुंचने के बाद केशव टैक्सी में पोेलैंड के लिए निकलेगा, जहां से फ्लाइट मिलने के बाद वह नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगा। वहीं स्नेहा और मुस्कान ने बताया कि वे पिछले 24 घंटे से बस में सफर कर रहे हैं। बस से वे रोमानिया बॉर्डर पर जाएंगी, जहां से दूतावास के निर्देशानुसार वे फ्लाइट मिलने के बाद नई दिल्ली आएंगी। वहीं बस चालक ने बीच में थोड़ी देर के लिए बस रोकी थी, उस दौरान उन्होंने खाने के लिए चिप्स व अन्य सामान लिया है। लगातार 24 घंटे से बस में बैठे रहने की वजह से थकान महसूस हो रही है। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पार करने के बाद राहत मिलेगी।
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जसिका राणा पहुंची नई दिल्ली, बुआ के पास रुकी
लोहड़ बाजार घाटी जेलदार निवासी राणा दुष्यंत सिंह ने बताया उनकी बेटी जसिका राणा यूक्रेन के शहर खारकीव से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। पिछले दो दिन से वह पोलैंड के दूतावास में ठहरी हुई थी। जसिका राणा शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची है, जहां से वह जनकपुरी में अपनी बुआ के घर गई है।
बुडापोस्ट से आज उड़ान भरेंगे मनीष रंगा
जिले के गांव लालावास निवासी मनीष रंगा ने बताया कि वे यूक्रेन के शहर कीव से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता वेदपाल रंगा सीआरपीएफ में बतौर डिप्टी कमांडेंट कार्यरत है। मनीष ने बताया कि यूक्रेन में बिगड़े हालातों के चलते वे चार दिन पहले बस से बुडापोस्ट आए थे। अब शनिवार रात वाली फ्लाइट से वे नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे। मनीष ने बताया कि उनके ठहरने के लिए सेफ हाउस में व्यवस्था की हुई है, जहां सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध है। चार दिन से फ्लाइट न मिलने की वजह से चिंता तो बढ़ी है मगर अब शनिवार रात वाली फ्लाइट में उड़ान की व्यवस्था होने पर राहत की सांस ली है।
तोशाम। भाजपा के मंडल अध्यक्ष विक्की महता का बेटा चिराग महता शनिवार को सुबह अपने घर पहुंच गया है, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। 28 फरवरी से 4 मार्च तक चिराग महता को चार दिन रोमानिया बॉर्डर पर गुजारने पड़ा। इस दौरान खाने की समस्या बनी रही। चिराग महता यूक्रेन के ल्वीव शहर से एमबीबीएस कर रहा है। वह 28 फरवरी को ल्वीव शहर से 480 किलोमीटर का सफर कर रोमानिया बार्डर पर पहुंचा था। 24 फरवरी को दो देशों को बीच युद्ध शुरू हुआ। 24 फरवरी से 28 फरवरी तक चिराग महता को ल्वीव शहर में गुजारने पड़े। इस दौरान वहां सिर्फ जरूरी सामान की दुकानें खुली थी। इन दिनों में सायरन बजते ही उन्हें बंकरो में जाना पड़ता था। मन में बहुत डर रहता था। चार दिन का जो धमाकों का मंजर था, वो उन्हें हमेशा याद रहेगा।
चांग। गांव चांग के वार्ड नं 20 के 25 वर्षीय अमरजीत के घर पहुंचते ही परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू झलक पडे। अमरजीत की मां कमलेेश ने बेटे को गले लगा लिया। अमरजीत ने बताया कि पिछले 10 दिनों में उन्होने जो भयानक युद्ध का मंजर देखा है उसे वह कभी नहीं भुला सकता। वह अपने साथियों के साथ जब पौलेंड के बार्डर के लिए निकला तो हमें वहां पर टैक्सी नहीं मिली, लेकिन मिली तो चार हजार रुपये में मिली। टैक्सी मिलने से पहले वह अपने साथियों के साथ 40 किलोमीटर पैदल चला। चलते-चलते वह अधिक बर्फबारी होने के कारण वह बेसुध होकर गिर गया, जैसे ही उसे होश आया तो उसके दोनों साथी बिछुुड़ चुके थे। सिर में चोट लगी होने के कारण वह घायल अवस्था में ही वह अकेला ही पोलैंड के बार्डर की तरफ चल पड़ा। पोलैंड के बार्डर पर हमें दो दिन तक रोके रखा और पहले दूसरे देशों के बच्चों को निकाला गया। उन्होंने फिर अपने देश की लड़कियों को आगे कर बॉर्डर पार किया। अमरजीत ने बताया कि उन्हें खाना भी नही मिला 8 दिनों तक केवल एक चाकलेट व बिस्कुट खाकर ही अपनी भूख शांत की। सबसे अधिक समस्या हमें करेंसी न बदली जाने के कारण हुई। यूक्रेन की करेंसी न मिलने के कारण वहां पर डॉलर चलने लगा, लेकिन डॉलर की करेंसी उन्हें उपलब्ध न हुई जिस कारण भी उन्हें अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान नंबरदार पवन कुमार भी अमरजीत से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे।
भिवानी। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं ठाकुर बीर सिंह फाउंडेशन के अध्यक्ष ठा. विक्रम सिंह ने शनिवार को यूक्रेन से घर लौटे विद्यार्थियों का हालचाल जाना। ठा. विक्रम सिंह ने सेक्टर-13 निवासी ध्वनि बजाज, डीसी कॉलोनी निवासी वैभव, रामबाग रोड निवासी देव, डीसी कॉलोनी निवासी नितेश शर्मा के परिजनों व विद्यार्थियों मुलाकात की। उनके साथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मनोहर डीएम लोहानी भी रहे। संवाद