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ढाई हजार दो, घर बैठे ड्राइविंग लाइसेंस लो
भिवानी
Updated Sat, 10 May 2014 01:08 AM IST
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ड्राइविंग लाइसेंस की वैध फीस भले ही एक हजार रुपये हो, लेकिन आप आसानी से लाइसेंस बनवाना चाहते हैं इसके लिए आपको दो से ढाई हजार तक खर्च करने होंगे। इसके बाद न तो काउंटर पर लाइन लगानी होगा और न ही दफ्तरों के चक्कर काटने होंगे। आपके सारे काम फटाफट हो जाएंगे।
कंप्यूटर से फोटो खिंचाने की औपचारिकता निभाने के बाद आप इत्मीनान से घर बैठ जाइये, लाइसेंस खुद-ब-खुद आप तक पहुंचा दिया जाएगा। दरअसल, लाइसेंस बनाने की इस प्रक्रिया में दलालों का नेटवर्क बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। मुंहमांगी कीमत देने की कूवत है तो बिना किसी भाग-दौड़ के आसानी से लाइसेंस बनवा सकते हैं। वरना चक्कर लगाते रह जाएंगे, फिर भी हाथ कुछ नहीं आएगा।
जिले में हर रोज औसतन 30-35 लाइसेंस जारी होते हैं। वैसे तो इस प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए प्रशासन ने पूरे इंतजाम किये हैं, लेकिन दलालों के मजबूत नेटवर्क के आगे यह इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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हालात यह है कि अगर सीधे रूप से लाइसेंस बनवाने के लिए जाएं तो कागजों में कमी सहित तमाम कारण गिनाकर दौड़ाया जाएगा। अभ्यर्थियाें को लंबी कतारों से भी गुजरना होगा। हालांकि इन फजीहतों के एवज में लाइसेंस का शुल्क कम देना होगा और अगर परेशानियों से बचना है तो दलालों की डिमांड पूरी करिए, बैठे-बिठाये सब काम चुटकियों में हो जाएगा।
लाइसेंस बनवाने की यह है प्रक्रिया
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए सबसे पहले फार्म-2 पर आवेदन करना होता है। इसके साथ 2 आईडी प्रुफ, 1 उम्र का प्रमाण पत्र और तीन फोटो संलग्न करने होते हैं। इसके बाद अभ्यर्थी का मेडिकल टेस्ट होता है। इसमें पास होने के बाद ई-दिशा केंद्र के काउंटर नं. 5 पर फोटो खींचा जाता है। यहां से स्लिप देकर अभ्यर्थी को कंप्यूटर पर टेस्ट देने के लिए बाल भवन भेजते हैं। इस टेस्ट में पास होने के बाद ही लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। अगर फेल हुए तो 24 घंटे बाद फिर से आवेदन करना होगा। आवेदन के करीब एक सप्ताह बाद लर्निंग लाइसेंस जारी होगा और फिर उसके एक माह बाद परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यहां लगता है रोड़ा :
मेडिकल टेस्ट
सीधे तौर से लाइसेंस बनवाने पहुंचे है तो सबसे पहले मेडिकल के समय रोड़ा लगेगा। फिजिकल व आई टेस्ट में पास न होने पर आवेदन प्रक्रिया रोक दी जाएगी। टेस्ट के लिए डेढ़ सौ रुपये की फीस है। अगर दलालों के साथ है तो टेस्ट में अनफिट होने के बाद भी कागज आगे फारवर्ड हो जाएगा।
लगानी होगी कतार
मेडिकल टेस्ट के बाद का दूसरा स्टेप कंप्यूटर से फोटो खिंचाने की है। अगर आपके साथ कोई नहीं है तो लंबी कतार लगानी होगी। नंबर आने के बाद ही आपका फोटो कंप्यूटर में कैद होगा।
कंप्यूटर टेस्ट
ई-दिशा केंद्र के काउंटर से स्लिप मिलने के बाद अभ्यर्थी को कंप्यूटर टेस्ट के लिए बाल भवन में भेजा जाता है। यहां अभ्यर्थियाें से ड्राइविंग से जुड़े 15 सवाल पूछे जाते हैं, इसमें 50 फीसदी सवालों के सही जवाब देने अनिवार्य है। पास होने के बाद ही लाइसेंस बन सकता है। फेल होने वाले अभ्यर्थियों को दलाल 300 रुपये में पास करा देते हैं और उसी दिन आवेदन आगे बढ़ जाता है।
यह है लाइसेंस की वैध फीस
अभ्यर्थी को सबसे पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाना होगा। स्कूटर-मोटरसाइकिल के लिए 30, कार-जीप के लिए 60 व ट्रैक्टर के लिए 90 रुपये का शुल्क है। मेडिकल टेस्ट के 150 व बाल भवन में कम्प्यूटर टेस्ट के लिए 50 रुपये देना पड़ता है। इसके अलावा कम्प्यूटर सेवा के एवज में 100 रुपये भी अभ्यर्थी को देना होता है। फार्म खर्च के साथ यह राशि कुल 410 से 440 रुपये तक होती है। इसी लाइसेंस को परमानेंट कराने के लिए 550 से 600 रुपये तक अतिरिक्त देना होता है। साथ ही पुन: इसी प्रक्रिया से गुजरना होता है।
2400 दीजिए, एक बार में सब ओके
दलालों का सहारा लेने पर लर्निंग के लिए एक बार आवेदन देने के बाद परमानेंट लाइसेंस के लिए न तो दोबारा फोटो खिंचाने आना होता है और न ही किसी टेस्ट के लिए। लर्निंग लाइसेंस मिलते ही दलाल पुराने रिकार्ड के आधार पर परमानेंट लाइसेंस की प्रक्रिया को भी पूरा करा देते हैं। डेढ़ माह बाद परमानेंट लाइसेंस मिल जाएगा। सामान्य प्रक्रिया के तहत परमानेंट लाइसेंस जारी होने में 3 से 4 माह का समय लग जाएगा।
परेशान हैं, मगर करें क्या
लाइसेंस बनवाने आये तोशाम के सुरेश शर्मा ने बताया कि दो दिन से भटक रहे हैं। पहले दिन बिजली गुल होने से लौटना पड़ा था और दूसरे दिन टेस्ट में फेल हो गये। पैसा होता तो दलालों से ही काम करा लेते। नरेन्द्र का कहना था कि लाइसेंस तो 11 सौ में बन जाए, लेकिन रोज-रोज की फजीहत कौन झेले। वैसे समय भी नहीं है, पढ़ाई करनी है। पैसा थोड़ा ज्यादा लगेगा, मगर काम तो आसानी से हो जाएगा।
यहां घूमते हैं दलाल
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की गारंटी देने वाले लघु सचिवालय व कोर्ट परिसर के बाहर की ओर आसानी से मिल जाएंगे। फोटो स्टेट व फार्म की दुकानों पर भी उनकी पकड़ है। आवेदन खरीदते ही वह अभ्यर्थी के पीछे लग जाते हैं। परेशानियों का हवाला देकर चंगुल में जकड़ने में कसर नहीं छोड़ते। बाल भवन के आस-पास भी इन संदिग्धों को मंडराते देखा जा सकता है।
अफसर भी मानते हैं, सक्रिय हैं दलाल
लघु सचिवालय में लाइसेंस प्रक्रिया के प्रभारी डिप्टी सुप्रिटेंडेंट श्यामलाल भी मानते हैं कि लाइसेंस बनवाने में दलाल सक्रिय हैं। संभव है कि कुछ कर्मचारियों से भी उनकी मिलीभगत हो, लेकिन कोई बताने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि पारदर्शिता के लिए ही सब कुछ कंप्यूटराइज्ड किया गया है। हम लोगों को लगातार दलालों से बचने की सलाह भी देते हैं, बावजूद अभ्यर्थी उनकी शरण लेंगे तो हम क्या कर सकते हैं। वैसे पूरी कोशिश है कि दलालों पर रोक लगे।
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कंप्यूटर से फोटो खिंचाने की औपचारिकता निभाने के बाद आप इत्मीनान से घर बैठ जाइये, लाइसेंस खुद-ब-खुद आप तक पहुंचा दिया जाएगा। दरअसल, लाइसेंस बनाने की इस प्रक्रिया में दलालों का नेटवर्क बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। मुंहमांगी कीमत देने की कूवत है तो बिना किसी भाग-दौड़ के आसानी से लाइसेंस बनवा सकते हैं। वरना चक्कर लगाते रह जाएंगे, फिर भी हाथ कुछ नहीं आएगा।
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जिले में हर रोज औसतन 30-35 लाइसेंस जारी होते हैं। वैसे तो इस प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए प्रशासन ने पूरे इंतजाम किये हैं, लेकिन दलालों के मजबूत नेटवर्क के आगे यह इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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हालात यह है कि अगर सीधे रूप से लाइसेंस बनवाने के लिए जाएं तो कागजों में कमी सहित तमाम कारण गिनाकर दौड़ाया जाएगा। अभ्यर्थियाें को लंबी कतारों से भी गुजरना होगा। हालांकि इन फजीहतों के एवज में लाइसेंस का शुल्क कम देना होगा और अगर परेशानियों से बचना है तो दलालों की डिमांड पूरी करिए, बैठे-बिठाये सब काम चुटकियों में हो जाएगा।
लाइसेंस बनवाने की यह है प्रक्रिया
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए सबसे पहले फार्म-2 पर आवेदन करना होता है। इसके साथ 2 आईडी प्रुफ, 1 उम्र का प्रमाण पत्र और तीन फोटो संलग्न करने होते हैं। इसके बाद अभ्यर्थी का मेडिकल टेस्ट होता है। इसमें पास होने के बाद ई-दिशा केंद्र के काउंटर नं. 5 पर फोटो खींचा जाता है। यहां से स्लिप देकर अभ्यर्थी को कंप्यूटर पर टेस्ट देने के लिए बाल भवन भेजते हैं। इस टेस्ट में पास होने के बाद ही लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। अगर फेल हुए तो 24 घंटे बाद फिर से आवेदन करना होगा। आवेदन के करीब एक सप्ताह बाद लर्निंग लाइसेंस जारी होगा और फिर उसके एक माह बाद परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यहां लगता है रोड़ा :
मेडिकल टेस्ट
सीधे तौर से लाइसेंस बनवाने पहुंचे है तो सबसे पहले मेडिकल के समय रोड़ा लगेगा। फिजिकल व आई टेस्ट में पास न होने पर आवेदन प्रक्रिया रोक दी जाएगी। टेस्ट के लिए डेढ़ सौ रुपये की फीस है। अगर दलालों के साथ है तो टेस्ट में अनफिट होने के बाद भी कागज आगे फारवर्ड हो जाएगा।
लगानी होगी कतार
मेडिकल टेस्ट के बाद का दूसरा स्टेप कंप्यूटर से फोटो खिंचाने की है। अगर आपके साथ कोई नहीं है तो लंबी कतार लगानी होगी। नंबर आने के बाद ही आपका फोटो कंप्यूटर में कैद होगा।
कंप्यूटर टेस्ट
ई-दिशा केंद्र के काउंटर से स्लिप मिलने के बाद अभ्यर्थी को कंप्यूटर टेस्ट के लिए बाल भवन में भेजा जाता है। यहां अभ्यर्थियाें से ड्राइविंग से जुड़े 15 सवाल पूछे जाते हैं, इसमें 50 फीसदी सवालों के सही जवाब देने अनिवार्य है। पास होने के बाद ही लाइसेंस बन सकता है। फेल होने वाले अभ्यर्थियों को दलाल 300 रुपये में पास करा देते हैं और उसी दिन आवेदन आगे बढ़ जाता है।
यह है लाइसेंस की वैध फीस
अभ्यर्थी को सबसे पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाना होगा। स्कूटर-मोटरसाइकिल के लिए 30, कार-जीप के लिए 60 व ट्रैक्टर के लिए 90 रुपये का शुल्क है। मेडिकल टेस्ट के 150 व बाल भवन में कम्प्यूटर टेस्ट के लिए 50 रुपये देना पड़ता है। इसके अलावा कम्प्यूटर सेवा के एवज में 100 रुपये भी अभ्यर्थी को देना होता है। फार्म खर्च के साथ यह राशि कुल 410 से 440 रुपये तक होती है। इसी लाइसेंस को परमानेंट कराने के लिए 550 से 600 रुपये तक अतिरिक्त देना होता है। साथ ही पुन: इसी प्रक्रिया से गुजरना होता है।
2400 दीजिए, एक बार में सब ओके
दलालों का सहारा लेने पर लर्निंग के लिए एक बार आवेदन देने के बाद परमानेंट लाइसेंस के लिए न तो दोबारा फोटो खिंचाने आना होता है और न ही किसी टेस्ट के लिए। लर्निंग लाइसेंस मिलते ही दलाल पुराने रिकार्ड के आधार पर परमानेंट लाइसेंस की प्रक्रिया को भी पूरा करा देते हैं। डेढ़ माह बाद परमानेंट लाइसेंस मिल जाएगा। सामान्य प्रक्रिया के तहत परमानेंट लाइसेंस जारी होने में 3 से 4 माह का समय लग जाएगा।
परेशान हैं, मगर करें क्या
लाइसेंस बनवाने आये तोशाम के सुरेश शर्मा ने बताया कि दो दिन से भटक रहे हैं। पहले दिन बिजली गुल होने से लौटना पड़ा था और दूसरे दिन टेस्ट में फेल हो गये। पैसा होता तो दलालों से ही काम करा लेते। नरेन्द्र का कहना था कि लाइसेंस तो 11 सौ में बन जाए, लेकिन रोज-रोज की फजीहत कौन झेले। वैसे समय भी नहीं है, पढ़ाई करनी है। पैसा थोड़ा ज्यादा लगेगा, मगर काम तो आसानी से हो जाएगा।
यहां घूमते हैं दलाल
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की गारंटी देने वाले लघु सचिवालय व कोर्ट परिसर के बाहर की ओर आसानी से मिल जाएंगे। फोटो स्टेट व फार्म की दुकानों पर भी उनकी पकड़ है। आवेदन खरीदते ही वह अभ्यर्थी के पीछे लग जाते हैं। परेशानियों का हवाला देकर चंगुल में जकड़ने में कसर नहीं छोड़ते। बाल भवन के आस-पास भी इन संदिग्धों को मंडराते देखा जा सकता है।
अफसर भी मानते हैं, सक्रिय हैं दलाल
लघु सचिवालय में लाइसेंस प्रक्रिया के प्रभारी डिप्टी सुप्रिटेंडेंट श्यामलाल भी मानते हैं कि लाइसेंस बनवाने में दलाल सक्रिय हैं। संभव है कि कुछ कर्मचारियों से भी उनकी मिलीभगत हो, लेकिन कोई बताने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि पारदर्शिता के लिए ही सब कुछ कंप्यूटराइज्ड किया गया है। हम लोगों को लगातार दलालों से बचने की सलाह भी देते हैं, बावजूद अभ्यर्थी उनकी शरण लेंगे तो हम क्या कर सकते हैं। वैसे पूरी कोशिश है कि दलालों पर रोक लगे।