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Bhiwani News: मॉक ड्रिल में दरवाजा काटकर दो लोगों को निकाला सुरक्षित
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मॉक ड्रिल के दौरान घायल को बचाते बचाव टीम के सदस्य।
भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड परिसर में वीरवार को 6.5 तीव्रता के भूकंप की स्थिति में बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। एनडीआरएफ की टीम ने ड्रिल से दरवाजा काटकर दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जबकि अभ्यास में भवन में फंसे 63 लोगों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई की गई।
डीसी साहिल गुप्ता के मार्गदर्शन में डीआरओ राजकुमार भोरिया की देखरेख में हुई मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला रेडक्रॉस, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमों ने हिस्सा लिया। शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ भी मौजूद रहे। सायरन बजते ही मॉक ड्रिल शुरू हुई और भवन में 63 लोगों के फंसे होने की स्थिति बनाई गई जिनमें आठ लोगों को गंभीर अवस्था में दर्शाया गया।
एनडीआरएफ टीम ने दरवाजा काटकर दो लोगों को बाहर निकालने के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए सिविल अस्पताल भेजने की कार्रवाई की। अग्निशमन विभाग की टीम ने छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया, जबकि रेडक्रॉस की टीम प्राथमिक उपचार के लिए मौजूद रही। इस दौरान सुरक्षित निकासी, गंभीर घायलों को अस्पताल पहुंचाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभ्यास किया गया।
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एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर मिनकेश और एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर सुरेश ने बताया कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और बचाव कार्यों की तैयारियों को मजबूत करना है। इस दौरान आपदा से पहले की तैयारियों, सूचना एवं चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार और बचाव दलों के आपसी समन्वय का अभ्यास किया गया। अधिकारियों, कर्मचारियों और लोगों को भी आवश्यक जानकारी दी गई। मॉक ड्रिल में होमगार्ड से उमेश सांगवान, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. आशीष, जनस्वास्थ्य विभाग से एसडीओ प्रवीण, अग्निशमन विभाग से रमन और रोडवेज से अनिल मौजूद रहे।
भूकंप में घबराने के बजाय संयम बरतें
एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर मिनकेश और एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर सुरेश ने कहा कि भूकंप के समय घबराने के बजाय संयम बरतें और भगदड़ न मचाएं। जहां मौजूद हों वहीं सुरक्षित स्थान पर बैठकर सिर और शरीर को कवर करें। स्थिति सामान्य होने के बाद निर्धारित निकासी मार्ग से बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि शुरुआती समय में प्रभावित भवन एवं क्षेत्र के लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है इसलिए कर्मचारियों और आमजन को पहले से जागरूक एवं प्रशिक्षित करना जरूरी है।
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डीसी साहिल गुप्ता के मार्गदर्शन में डीआरओ राजकुमार भोरिया की देखरेख में हुई मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला रेडक्रॉस, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमों ने हिस्सा लिया। शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ भी मौजूद रहे। सायरन बजते ही मॉक ड्रिल शुरू हुई और भवन में 63 लोगों के फंसे होने की स्थिति बनाई गई जिनमें आठ लोगों को गंभीर अवस्था में दर्शाया गया।
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एनडीआरएफ टीम ने दरवाजा काटकर दो लोगों को बाहर निकालने के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए सिविल अस्पताल भेजने की कार्रवाई की। अग्निशमन विभाग की टीम ने छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया, जबकि रेडक्रॉस की टीम प्राथमिक उपचार के लिए मौजूद रही। इस दौरान सुरक्षित निकासी, गंभीर घायलों को अस्पताल पहुंचाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभ्यास किया गया।
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एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर मिनकेश और एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर सुरेश ने बताया कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और बचाव कार्यों की तैयारियों को मजबूत करना है। इस दौरान आपदा से पहले की तैयारियों, सूचना एवं चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार और बचाव दलों के आपसी समन्वय का अभ्यास किया गया। अधिकारियों, कर्मचारियों और लोगों को भी आवश्यक जानकारी दी गई। मॉक ड्रिल में होमगार्ड से उमेश सांगवान, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. आशीष, जनस्वास्थ्य विभाग से एसडीओ प्रवीण, अग्निशमन विभाग से रमन और रोडवेज से अनिल मौजूद रहे।
भूकंप में घबराने के बजाय संयम बरतें
एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर मिनकेश और एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर सुरेश ने कहा कि भूकंप के समय घबराने के बजाय संयम बरतें और भगदड़ न मचाएं। जहां मौजूद हों वहीं सुरक्षित स्थान पर बैठकर सिर और शरीर को कवर करें। स्थिति सामान्य होने के बाद निर्धारित निकासी मार्ग से बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि शुरुआती समय में प्रभावित भवन एवं क्षेत्र के लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है इसलिए कर्मचारियों और आमजन को पहले से जागरूक एवं प्रशिक्षित करना जरूरी है।