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प्रभु दर्शन के लिए सत्संग, सेवा व सुमिरन में लीन रहे इंसान : शास्त्री
Thu, 06 Mar 2025 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 06 Mar 2025 10:59 PM IST
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जाेगीवाला शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु।
भिवानी। सिद्धस्थल जाेगीवाला शिव मंदिर में 9 दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयाेजन किया जा रहा है। वृंदावन धाम से पहुंचे कथा व्यास याेगी शैलेंद्र नाथ शास्त्री ने महंत वेदनाथ महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा का वृत्तांत सुनाया।
कथा व्यास याेगी शैलेंद्र नाथ शास्त्री ने बताया कि इंसान प्रभु दर्शन के लिए सत्संग, सेवा व सुमिरन में लीन रहे। जीवन में जब भी भगवत नाम सुनने का अवसर प्राप्त हो उससे विमुख नहीं होना चाहिए। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियां भुगतने के पश्चात मानव देह की प्राप्ति होती है, इसलिए इस देह को उपयोग व्यर्थ कामों में न करके जनकल्याण व ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दें।
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उन्हाेंने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब परमात्मा अवतार धारण करके धरती पर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्हाेंने श्रद्धालुओं काे कहा कि किसी काे अशब्द न कहें। कथा के दाैरान कपिल मुनि, भक्त प्रह्लाद सहित विभिन्न प्रसंगों पर कथा सुनाई। इस अवसर पर महंत वेदनाथ महाराज, जयपुर से भावनाथ, सुंदरनाथ, हालुवास से महेंद्र नाथ, प्रदीप नाथ, गाेपाल नाथ, रामेश्वर नाथ, दीपक पांडे माैजूद रहे।
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कथा व्यास याेगी शैलेंद्र नाथ शास्त्री ने बताया कि इंसान प्रभु दर्शन के लिए सत्संग, सेवा व सुमिरन में लीन रहे। जीवन में जब भी भगवत नाम सुनने का अवसर प्राप्त हो उससे विमुख नहीं होना चाहिए। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महता पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियां भुगतने के पश्चात मानव देह की प्राप्ति होती है, इसलिए इस देह को उपयोग व्यर्थ कामों में न करके जनकल्याण व ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दें।
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उन्हाेंने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब परमात्मा अवतार धारण करके धरती पर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्हाेंने श्रद्धालुओं काे कहा कि किसी काे अशब्द न कहें। कथा के दाैरान कपिल मुनि, भक्त प्रह्लाद सहित विभिन्न प्रसंगों पर कथा सुनाई। इस अवसर पर महंत वेदनाथ महाराज, जयपुर से भावनाथ, सुंदरनाथ, हालुवास से महेंद्र नाथ, प्रदीप नाथ, गाेपाल नाथ, रामेश्वर नाथ, दीपक पांडे माैजूद रहे।