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Bhiwani News: अधिग्रहण का साया, नहरी भूमि के दावे पर सर्वे की मांग
Thu, 30 Oct 2025 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 30 Oct 2025 10:57 PM IST
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भिवानी। हालुवास गेट पर रेलवे फाटक के नजदीक स्थित शंकर गिरी कॉलोनी के निवासियों ने वीरवार को रेलवे की ओर से अपनी जमीन के अधिग्रहण के खिलाफ आवाज उठाई। लोगों ने उपायुक्त को लिखित याचिका सौंपकर जमीन के दोबारा सर्वे की मांग की है ताकि उनकी दशकों पुरानी आवासीय बस्ती को बचाया जा सके।
उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचे सुरेश शर्मा, अधिवक्ता पवन गौतम, संदीप सिंघल, सचिन शर्मा, अन्नु सोनी, अभिषेक मित्तल, सुमित दहिया, शुभम ने बताया कि मामला खसरा संख्या 145 और 146 से संबंधित है, जिसे रेलवे द्वारा नहरी भूमि बताकर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि रेलवे विभाग ने 13 अप्रैल 2025 को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें केवल खसरा संख्या का उल्लेख था। इसके बाद 15 अक्टूबर 2025 को एक और नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसमें कॉलोनी के निवासियों के नाम प्रकाशित किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनकी आवासीय कॉलोनी अधिग्रहण की जद में है। कॉलोनी वासियों ने इस अधिग्रहण और नहरी भूमि के दावे को पूरी तरह से गलत बताते हुए जमीन के मौजूदा और कानूनी स्थिति को उजागर किया है।
कॉलोनी वासियों का दावा है कि कॉलोनी दशकों से बसी हुई है और पूरी तरह से आवासीय है। इसमें प्राचीन बाबा जहरगिरी मंदिर, लिटिल हार्ट पब्लिक स्कूल, और प्रसिद्ध बंसी लाल पार्क जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निवासियों के पास घरों की रजिस्ट्री, इंतकाल, नक्शा, पानी के बिल और बिजली के कनेक्शन जैसे सभी वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं। वे ज़ोर देते हैं कि यह एक अनुमोदित कॉलोनी है। कॉलोनी के अधिकांश घरों पर बैंक ऋण लिए गए हैं। निवासियों का तर्क है कि अगर यह ज़मीन वास्तव में अवैध या सरकारी नहरी भूमि होती, तो बैंक इन घरों पर ऋण नहीं देते।
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निवासियों ने जि़क्र किया है कि रेलवे लाइन से 45 फीट की दूरी पर पहले से ही एक खंभा (पिलर) है और अधिग्रहण की कार्रवाई इस खंभे से लगभग 27.5 फीट और जमीन को एक्वायर करने की है। इसके विपरीत उनका सुझाव है कि रेलवे लाइन के दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहुत ज़मीन खाली पड़ी है, जिसे अधिग्रहण करके भी परियोजना को पूरा किया जा सकता है। कॉलोनी वासियों ने उपायुक्त से इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोबारा सर्वे की की मांग की है। उनका कहना है कि इस संवेदनशील विषय पर संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई की जाए ताकि उनकी आवासीय कॉलोनी को अधिग्रहण से बचाया जा सके और वे बेघर होने से बच सकें।
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उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचे सुरेश शर्मा, अधिवक्ता पवन गौतम, संदीप सिंघल, सचिन शर्मा, अन्नु सोनी, अभिषेक मित्तल, सुमित दहिया, शुभम ने बताया कि मामला खसरा संख्या 145 और 146 से संबंधित है, जिसे रेलवे द्वारा नहरी भूमि बताकर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि रेलवे विभाग ने 13 अप्रैल 2025 को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें केवल खसरा संख्या का उल्लेख था। इसके बाद 15 अक्टूबर 2025 को एक और नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसमें कॉलोनी के निवासियों के नाम प्रकाशित किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उनकी आवासीय कॉलोनी अधिग्रहण की जद में है। कॉलोनी वासियों ने इस अधिग्रहण और नहरी भूमि के दावे को पूरी तरह से गलत बताते हुए जमीन के मौजूदा और कानूनी स्थिति को उजागर किया है।
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कॉलोनी वासियों का दावा है कि कॉलोनी दशकों से बसी हुई है और पूरी तरह से आवासीय है। इसमें प्राचीन बाबा जहरगिरी मंदिर, लिटिल हार्ट पब्लिक स्कूल, और प्रसिद्ध बंसी लाल पार्क जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निवासियों के पास घरों की रजिस्ट्री, इंतकाल, नक्शा, पानी के बिल और बिजली के कनेक्शन जैसे सभी वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं। वे ज़ोर देते हैं कि यह एक अनुमोदित कॉलोनी है। कॉलोनी के अधिकांश घरों पर बैंक ऋण लिए गए हैं। निवासियों का तर्क है कि अगर यह ज़मीन वास्तव में अवैध या सरकारी नहरी भूमि होती, तो बैंक इन घरों पर ऋण नहीं देते।
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निवासियों ने जि़क्र किया है कि रेलवे लाइन से 45 फीट की दूरी पर पहले से ही एक खंभा (पिलर) है और अधिग्रहण की कार्रवाई इस खंभे से लगभग 27.5 फीट और जमीन को एक्वायर करने की है। इसके विपरीत उनका सुझाव है कि रेलवे लाइन के दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहुत ज़मीन खाली पड़ी है, जिसे अधिग्रहण करके भी परियोजना को पूरा किया जा सकता है। कॉलोनी वासियों ने उपायुक्त से इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोबारा सर्वे की की मांग की है। उनका कहना है कि इस संवेदनशील विषय पर संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई की जाए ताकि उनकी आवासीय कॉलोनी को अधिग्रहण से बचाया जा सके और वे बेघर होने से बच सकें।