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Bhiwani News: पिछले ओलंपिक की तुलना में इस बार कम मुक्केबाजों को मिला ओलंपिक कोटा
Tue, 04 Jun 2024 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 04 Jun 2024 12:55 AM IST
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भिवानी। इस बार पेरिस ओलंपिक कोटे के लिए हुए क्वालीफायर मुकाबलों में पिछले ओलंपिक मुकाबले की तुलना में कम मुक्केबाजों को कोटा प्राप्त हुआ है। इसके लिए चयन प्रक्रिया को दोषी ठहराया जाए या फिर मुक्केबाजों की मेहनत की कमी बताई जाए, लेकिन यह सच है कि एशियन गेम्स के बाद हुए दो क्वालीफायर मुकाबलों के बाद भी मुक्केबाजों को इस बार पिछले ओलंपिक की तुलना में कम मुक्केबाजों को ओलंपिक कोटा प्राप्त हुआ है।
पिछले ओलंपिक में दोनों वर्गों में नौ मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया था। इस बार सिर्फ छह मुक्केबाजों को ही ओलंपिक कोटा प्राप्त हुआ है। एशियन गेम्स में एक भी भारतीय पुरुष मुक्केबाज को ओलंपिक कोटा नहीं प्राप्त हुआ था। वहीं, इटली में हुए प्रथम वर्ल्ड ओलंपिक क्वालीफायर मुकाबलों में भी किसी भी भारतीय मुक्केबाज को ओलंपिक कोटा नहीं प्राप्त हुआ। इन दोनों मुकाबलों में दुनिया के बेस्ट मुक्केबाज ओलंपिक कोटा प्राप्त कर चुके थे। इसके बाद थाईलैंड में हुए ओलंपिक क्वालीफायर मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाजों का मुकाबला दुनिया के दोयम दर्ज के मुक्केबाजों के साथ हुआ। उसमें भी भारतीय मुक्केबाजों को उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिली।
थाईलैंड में हुए मुकाबलों में दो पुरुष व एक महिला मुक्केबाज को ही ओलंपिक कोटा मिला है। इसके लिए खुद खिलाड़ी व कोच अंदरखाते चयन प्रक्रिया को जिम्मेवार मान रहे हैं। खेल प्रशिक्षकों का मानना है कि चयन के लिए मूल्यांकन तो ठीक है, लेकिन साथ ही ट्रायल को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए भी उपयुक्त समय मिलना चाहिए। लेकिन इस बार खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए कम समय मिला है। इसके परिणाम हम सब के सामने हैं। साथ ही विदेशी कोचों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। खेल प्रशिक्षकों का मानना है कि चयन प्रक्रिया में विदेशी कोचों के साथ-साथ स्वदेशी कोचों का भी बराबरी की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए थी। केवल सतत मूल्यांकन को ही चयन प्रक्रिया का आधार नहीं बनाना चाहिए था।
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पिछली बार हुए ओलंपिक मुकाबलों में इन मुक्केबाजों ने लिया था हिस्सा
मुक्केबाज भार वर्ग
लवलीना 69 किलो ग्राम
एमसी मैरीकॉम 51 किलो ग्राम
पूजा रानी 75 किलो ग्राम
सिमरनजीत कौर 60 किलो ग्राम
सतीश 91 किलो ग्राम प्लस
विकास कृष्ण 69 किलो ग्राम
अमित पंघाल 52 किलो ग्राम
मनीष कौशिक 63 किलो ग्राम
आशीष कुमार 75 किलो ग्राम
इस बार इन मुक्केबाजों को प्राप्त हुआ है ओलंपिक कोटा
मुक्केबाज भार वर्ग
प्रीति पंवार 54 किलो ग्राम
लवलीना 75 किलो ग्राम
निखिल जरीन 50 किलो ग्राम
जैस्मिन लंबोरिया 57 किलो ग्राम
अमित पंघाल 51 किलो ग्राम
निशांत देव 71 किलो ग्राम
चयन प्रक्रिया के कारण ही इस बार भारतीय मुक्केबाजों को कम ओलंपिक कोटा प्राप्त हुआ है। केवल मूल्यांकन को ही चयन प्रक्रिया का आधार नहीं बनाना चाहिए था। चयन प्रक्रिया में ट्रायल का भी बराबरी का हिस्सा होता है। विदेशी कोचों की होना सही है, लेकिन साथ ही स्वदेशी कोचों को भी उतनी ही हिस्सेदारी होनी चाहिए थी। तभी बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा सकती थी।
- जगदीश सिंह, द्रोणाचार्य अवार्डी, खेल प्रशिक्षक।
गलत चयन प्रक्रिया के कारण भारतीय मुक्केबाजों को हार का सामना करना पड़ा है। चयन प्रक्रिया मूल्यांकन आधारित रही है। इसके कारण मुक्केबाजों को अभ्यास के लिए कम समय दिया गया है। किसी भी खेल में अभ्यास का महत्व ज्यादा होता है। चयन प्रक्रिया में विदेशी कोचों के साथ स्वदेशी कोचों को भी बराबरी की हिस्सेदारी दी जानी चाहिए थी।
- अनिल टेकराम, कोच।
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पिछले ओलंपिक में दोनों वर्गों में नौ मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया था। इस बार सिर्फ छह मुक्केबाजों को ही ओलंपिक कोटा प्राप्त हुआ है। एशियन गेम्स में एक भी भारतीय पुरुष मुक्केबाज को ओलंपिक कोटा नहीं प्राप्त हुआ था। वहीं, इटली में हुए प्रथम वर्ल्ड ओलंपिक क्वालीफायर मुकाबलों में भी किसी भी भारतीय मुक्केबाज को ओलंपिक कोटा नहीं प्राप्त हुआ। इन दोनों मुकाबलों में दुनिया के बेस्ट मुक्केबाज ओलंपिक कोटा प्राप्त कर चुके थे। इसके बाद थाईलैंड में हुए ओलंपिक क्वालीफायर मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाजों का मुकाबला दुनिया के दोयम दर्ज के मुक्केबाजों के साथ हुआ। उसमें भी भारतीय मुक्केबाजों को उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिली।
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थाईलैंड में हुए मुकाबलों में दो पुरुष व एक महिला मुक्केबाज को ही ओलंपिक कोटा मिला है। इसके लिए खुद खिलाड़ी व कोच अंदरखाते चयन प्रक्रिया को जिम्मेवार मान रहे हैं। खेल प्रशिक्षकों का मानना है कि चयन के लिए मूल्यांकन तो ठीक है, लेकिन साथ ही ट्रायल को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए भी उपयुक्त समय मिलना चाहिए। लेकिन इस बार खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए कम समय मिला है। इसके परिणाम हम सब के सामने हैं। साथ ही विदेशी कोचों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। खेल प्रशिक्षकों का मानना है कि चयन प्रक्रिया में विदेशी कोचों के साथ-साथ स्वदेशी कोचों का भी बराबरी की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए थी। केवल सतत मूल्यांकन को ही चयन प्रक्रिया का आधार नहीं बनाना चाहिए था।
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पिछली बार हुए ओलंपिक मुकाबलों में इन मुक्केबाजों ने लिया था हिस्सा
मुक्केबाज भार वर्ग
लवलीना 69 किलो ग्राम
एमसी मैरीकॉम 51 किलो ग्राम
पूजा रानी 75 किलो ग्राम
सिमरनजीत कौर 60 किलो ग्राम
सतीश 91 किलो ग्राम प्लस
विकास कृष्ण 69 किलो ग्राम
अमित पंघाल 52 किलो ग्राम
मनीष कौशिक 63 किलो ग्राम
आशीष कुमार 75 किलो ग्राम
इस बार इन मुक्केबाजों को प्राप्त हुआ है ओलंपिक कोटा
मुक्केबाज भार वर्ग
प्रीति पंवार 54 किलो ग्राम
लवलीना 75 किलो ग्राम
निखिल जरीन 50 किलो ग्राम
जैस्मिन लंबोरिया 57 किलो ग्राम
अमित पंघाल 51 किलो ग्राम
निशांत देव 71 किलो ग्राम
चयन प्रक्रिया के कारण ही इस बार भारतीय मुक्केबाजों को कम ओलंपिक कोटा प्राप्त हुआ है। केवल मूल्यांकन को ही चयन प्रक्रिया का आधार नहीं बनाना चाहिए था। चयन प्रक्रिया में ट्रायल का भी बराबरी का हिस्सा होता है। विदेशी कोचों की होना सही है, लेकिन साथ ही स्वदेशी कोचों को भी उतनी ही हिस्सेदारी होनी चाहिए थी। तभी बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा सकती थी।
- जगदीश सिंह, द्रोणाचार्य अवार्डी, खेल प्रशिक्षक।
गलत चयन प्रक्रिया के कारण भारतीय मुक्केबाजों को हार का सामना करना पड़ा है। चयन प्रक्रिया मूल्यांकन आधारित रही है। इसके कारण मुक्केबाजों को अभ्यास के लिए कम समय दिया गया है। किसी भी खेल में अभ्यास का महत्व ज्यादा होता है। चयन प्रक्रिया में विदेशी कोचों के साथ स्वदेशी कोचों को भी बराबरी की हिस्सेदारी दी जानी चाहिए थी।
- अनिल टेकराम, कोच।