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Bhiwani News: ये गांव है वीर जवानों का... बापोड़ा गांव के हर दूसरे घर का बेटा फौजी
Fri, 26 Jul 2024 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 26 Jul 2024 02:27 AM IST
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गांव बापोड़ा में स्थित सेना का टैंक।
भिवानी। भिवानी शहर से मात्र आठ किलोमीटर दूर गांव बापोड़ा सैनिकों का गांव कहलाता है। इस यह तगमा ऐसे नहीं मिला है। गांव के हर दूसरे घर का बेटा फौजी है। देश की सीमाओं पर यहां वीर जवान सीना तानकर खड़े हैं। गांव में 20 हजार लोगों की आबादी में करीब दो हजार से अधिक सैनिक और पूर्व सैनिक हैं।
पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह सहित कई सैन्य अधिकारी भी इसी गांव से ताल्लुक रखते हैं। वीर सपूतों का गांव बापोड़ा के स्वागत द्वार पर 1971 में पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाला टी-55 टैंक भी वीरों की वीरगाथा को बयां कर रहा है। सेना के सर्वोच्च सम्मान से मरणोपरांत नवाजे गए वीर चक्र माथन सिंह भी गांव बापोड़ा के वीर सपूत थे, जिनके नाम पर वर्तमान में भिवानी का रेलवे स्टेशन बना हुआ है। गांव के हर चौथे घर से कोई ना कोई सेना से ताल्लुक रखता है।
बापोड़ा से ही अमर शहीद प्रताप सिंह रहे हैं। जबकि बीएसएफ के पहले डीआईजी एसपीएस तंवर भी बापोड़ा से हैं। वीर चक्र कर्नल बृजपाल सिंह, वीर चक्र माथन सिंह का अदम्य साहस भी गांव की हर गली कूचे में गूंज रहा है। भारतीय थल सेना अध्यक्ष के पद पर रहे जनरल वीके सिंह का नाता भी बापोड़ा से है। इसके अलावा नेवी और एयर फोर्स में भी गांव के काफी युवा देश सेवा में लगे हैं।
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गांव बापोड़ा वीरों के गांव के नाम से भी जाना जाता है। जहां गांव की आबादी महज करीब 20 हजार हैं, लेकिन यहां सैनिकों और पूर्व सैनिकों की संख्या भी दो हजार से अधिक है। इसमें कई बड़े सैन्य अधिकारी भी रह चुके हैं। देश की आजादी के बाद जितने भी युद्ध हुए हैं, उनमें इस गांव के शहीदों का नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में भी दर्ज हुआ है। वहीं कई वीरों की छाती पर वीरता के तगमे भी लगे हैं।
गांव बापोड़ा में करीब दो हजार से अधिक सैनिक और पूर्व सैनिक हैं। देश की सीमाओं पर लड़े जाने वाले हर युद्ध में यहां के रणबाकुंरों की अहम भूमिका रही है। गांव के स्वागत द्वार पर 1971 के भारत-पाक युद्ध में प्रयोग किया गया टी-55 टैंक भी स्थापित किया है। जो वीरों की वीरता को बयां कर रहा है।
-सुग्रीव, सरपंच बापोड़ा।
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पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह सहित कई सैन्य अधिकारी भी इसी गांव से ताल्लुक रखते हैं। वीर सपूतों का गांव बापोड़ा के स्वागत द्वार पर 1971 में पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाला टी-55 टैंक भी वीरों की वीरगाथा को बयां कर रहा है। सेना के सर्वोच्च सम्मान से मरणोपरांत नवाजे गए वीर चक्र माथन सिंह भी गांव बापोड़ा के वीर सपूत थे, जिनके नाम पर वर्तमान में भिवानी का रेलवे स्टेशन बना हुआ है। गांव के हर चौथे घर से कोई ना कोई सेना से ताल्लुक रखता है।
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बापोड़ा से ही अमर शहीद प्रताप सिंह रहे हैं। जबकि बीएसएफ के पहले डीआईजी एसपीएस तंवर भी बापोड़ा से हैं। वीर चक्र कर्नल बृजपाल सिंह, वीर चक्र माथन सिंह का अदम्य साहस भी गांव की हर गली कूचे में गूंज रहा है। भारतीय थल सेना अध्यक्ष के पद पर रहे जनरल वीके सिंह का नाता भी बापोड़ा से है। इसके अलावा नेवी और एयर फोर्स में भी गांव के काफी युवा देश सेवा में लगे हैं।
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गांव बापोड़ा वीरों के गांव के नाम से भी जाना जाता है। जहां गांव की आबादी महज करीब 20 हजार हैं, लेकिन यहां सैनिकों और पूर्व सैनिकों की संख्या भी दो हजार से अधिक है। इसमें कई बड़े सैन्य अधिकारी भी रह चुके हैं। देश की आजादी के बाद जितने भी युद्ध हुए हैं, उनमें इस गांव के शहीदों का नाम इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में भी दर्ज हुआ है। वहीं कई वीरों की छाती पर वीरता के तगमे भी लगे हैं।
गांव बापोड़ा में करीब दो हजार से अधिक सैनिक और पूर्व सैनिक हैं। देश की सीमाओं पर लड़े जाने वाले हर युद्ध में यहां के रणबाकुंरों की अहम भूमिका रही है। गांव के स्वागत द्वार पर 1971 के भारत-पाक युद्ध में प्रयोग किया गया टी-55 टैंक भी स्थापित किया है। जो वीरों की वीरता को बयां कर रहा है।
-सुग्रीव, सरपंच बापोड़ा।