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Bhiwani News: कांग्रेस में शामिल जिला परिषद चेयरपर्सन और अधिकारियों में खींचतान बढ़ी, विकास कार्य ठप
Mon, 29 Jul 2024 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 29 Jul 2024 11:52 PM IST
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भिवानी। तीन सप्ताह पहले कांग्रेस में शामिल हुईं जिला परिषद़ चेयरपर्सन और अधिकारियों में खींचतान बढ़ गई है। चेयरपर्सन अनिता मलिक ने अधिकारियों पर असहयोग करने, काम में बाधा डालने और विकास कार्य को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। चेयरपर्सन का आरोप है कि सोमवार को जब वह जिला परिषद कार्यालय में पहुंचीं तो सीईओ की कुर्सी खाली थी और कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं थे। इतना ही नहीं चेयरपर्सन की अधिकारिक ई-मेल के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है और डायरी डिस्पैच के पुराने रजिस्टर तक गायब कर दिए गए हैं। उसकी जगह पत्राचार के लिए नया रजिस्टर दिया गया है। चेयरपर्सन ने भी अपने कक्ष के कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरे और एसपी बंद करने के भी आरोप लगाए। कहा कि अधिकारियों द्वारा जिला परिषद का काम ठप करने और अधिकार का इस्तेमाल नहीं करने देने पर वह हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।
अधिकारी के नहीं पहुंचने से 15 को रद्द करनी पड़ी थी बैठक
भिवानी जिला परिषद की चेयरपर्सन अनिता मलिक ने हाल ही में भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है। तभी से जिला परिषद में अधिकारियों और चेयरपर्सन के बीच की खींचतान बढ़ गई है। चेयरपर्सन ने कहा कि गत 15 जुलाई को भी जिला परिषद की बैठक तय की गई थी। 22 में से 17 पार्षदों की मौजूदगी के बावजूद अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे थे जिससे बैठक रद्द हो गई थी। जिला परिषद की अगली बैठक बुलाने को लेकर सोमवार को कार्यालय में पहुंची तो दोनों कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं मिले। जब हाजिरी रजिस्टर जांचा तो उनकी हाजिरी लगी हुई थी। उनके बारे में पूछा तो उनके समक्ष दोनों की छुट्टी की अर्जी पेश की गई। जिला परिषद की अधिकारिक ई-मेल से पत्राचार करना चाहा तो उसके लिए भी उन्हें रोका गया। वहीं उनके कार्यालय के डायरी और डिस्पैच रजिस्टर को भी गायब कर दिया। इसकी जगह उन्हें नया रजिस्टर दिया, जिसमें कोई भी पत्राचार करने पर इसके अंदर ही इंद्राज करने की सलाह दी गई।
जिला परिषद के ये टेंडर भी खटाई में पड़े
अधिकारियों और चेयरपर्सन की खींचतान की वजह से जिला परिषद में करोड़ों के विकास कार्य ठप पड़े हैं। जिला परिषद चेयरपर्सन अनिता मलिक ने बताया कि आठ करोड़ से स्ट्रीट लाइट के टेंडर कराए जाने हैं, जिनके बारे में अधिकारी कोई रसीद नहीं दे रहे हैं। इसी तरह जिला परिषद में 28 टैक्टरों के टेंडर कराए जाने हैं, ये ट्रैक्टर ग्राम पंचायतों को दिए जाने हैं, इसका भी मामला अधर में लटका है। वहीं पानी के टैंकर भी वितरण होने हैं, इनके टेंडर भी नहीं लगे हैं। इसके अलावा जिला परिषद के वार्डों में पार्षदों के माध्यम से भी कई विकास मसौदे तय दिए गए हैं, जिन पर बैठक नहीं होने से अब तक कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ है।
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जिला परिषद में अधिकारी जानबूझकर काम नहीं होने देना नहीं चाहते हैं। उन्हें अपने अधिकार का प्रयोग करने से भी रोका जा रहा है। अधिकारिक ई-मेल के प्रयोग से रोका गया। पुराने रजिस्टर गायब कर दिए हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर तक नहीं दिया है। कार्यालय का एसी, सीसीटीवी कैमरे और कंप्यूटर ठप पड़ा है। सीईओ कार्यालय नहीं आ रहे हैं। इन सब बातों को लेकर हाई कोर्ट का रुख कर सरकार और मनमानी कर रहे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।
-अनिता मलिक, चेयरपर्सन, जिला परिषद भिवानी।
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जिला परिषद की चेयरपर्सन की ओर से लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्हें जिला परिषद कार्यालय में सरकार की तरफ से मिलने वाली सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जिला परिषद के तहत सभी विकास कार्य सुचारु रूप से चल रहे हैं। किसी तरह का कोई व्यवधान नहीं हैं।
-यशवीर नैन, सीईओ, जिला परिषद भिवानी।
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अधिकारी के नहीं पहुंचने से 15 को रद्द करनी पड़ी थी बैठक
भिवानी जिला परिषद की चेयरपर्सन अनिता मलिक ने हाल ही में भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है। तभी से जिला परिषद में अधिकारियों और चेयरपर्सन के बीच की खींचतान बढ़ गई है। चेयरपर्सन ने कहा कि गत 15 जुलाई को भी जिला परिषद की बैठक तय की गई थी। 22 में से 17 पार्षदों की मौजूदगी के बावजूद अधिकारी बैठक में नहीं पहुंचे थे जिससे बैठक रद्द हो गई थी। जिला परिषद की अगली बैठक बुलाने को लेकर सोमवार को कार्यालय में पहुंची तो दोनों कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं मिले। जब हाजिरी रजिस्टर जांचा तो उनकी हाजिरी लगी हुई थी। उनके बारे में पूछा तो उनके समक्ष दोनों की छुट्टी की अर्जी पेश की गई। जिला परिषद की अधिकारिक ई-मेल से पत्राचार करना चाहा तो उसके लिए भी उन्हें रोका गया। वहीं उनके कार्यालय के डायरी और डिस्पैच रजिस्टर को भी गायब कर दिया। इसकी जगह उन्हें नया रजिस्टर दिया, जिसमें कोई भी पत्राचार करने पर इसके अंदर ही इंद्राज करने की सलाह दी गई।
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जिला परिषद के ये टेंडर भी खटाई में पड़े
अधिकारियों और चेयरपर्सन की खींचतान की वजह से जिला परिषद में करोड़ों के विकास कार्य ठप पड़े हैं। जिला परिषद चेयरपर्सन अनिता मलिक ने बताया कि आठ करोड़ से स्ट्रीट लाइट के टेंडर कराए जाने हैं, जिनके बारे में अधिकारी कोई रसीद नहीं दे रहे हैं। इसी तरह जिला परिषद में 28 टैक्टरों के टेंडर कराए जाने हैं, ये ट्रैक्टर ग्राम पंचायतों को दिए जाने हैं, इसका भी मामला अधर में लटका है। वहीं पानी के टैंकर भी वितरण होने हैं, इनके टेंडर भी नहीं लगे हैं। इसके अलावा जिला परिषद के वार्डों में पार्षदों के माध्यम से भी कई विकास मसौदे तय दिए गए हैं, जिन पर बैठक नहीं होने से अब तक कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ है।
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जिला परिषद में अधिकारी जानबूझकर काम नहीं होने देना नहीं चाहते हैं। उन्हें अपने अधिकार का प्रयोग करने से भी रोका जा रहा है। अधिकारिक ई-मेल के प्रयोग से रोका गया। पुराने रजिस्टर गायब कर दिए हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर तक नहीं दिया है। कार्यालय का एसी, सीसीटीवी कैमरे और कंप्यूटर ठप पड़ा है। सीईओ कार्यालय नहीं आ रहे हैं। इन सब बातों को लेकर हाई कोर्ट का रुख कर सरकार और मनमानी कर रहे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।
-अनिता मलिक, चेयरपर्सन, जिला परिषद भिवानी।
जिला परिषद की चेयरपर्सन की ओर से लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्हें जिला परिषद कार्यालय में सरकार की तरफ से मिलने वाली सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जिला परिषद के तहत सभी विकास कार्य सुचारु रूप से चल रहे हैं। किसी तरह का कोई व्यवधान नहीं हैं।
-यशवीर नैन, सीईओ, जिला परिषद भिवानी।