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Bhiwani News: पानी के बूस्टर टैंक का स्लैब टूटा, लंबे अर्से से सफाई नहीं होने पर गंदा पानी पीने को मजबूर डोभी तालाब क्षेत्रवासी
Thu, 08 May 2025 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 08 May 2025 11:35 PM IST
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गली में फैला पानी।
भिवानी। बूस्टर का स्लैब टूटा और अंदर टैंक के अंदर बदबूदार पानी लोगों की प्यास बुझाने के बजाय उनका दर्द और बढ़ा रहा है। यहां हम बात कर रहे हैं शहर के डोबी तालाब क्षेत्र के बूस्टर की जिसका पिछले एक साल से टैंक का स्लैब टूटा हुआ है। इसके अंदर लंबे अर्से से टैंक की सफाई तक नहीं कराई गई है।
इसकी वजह से इसमें भंडारित पानी में भी बदबू हो गई है। इसी पानी को बूस्टर से घरों तक सप्लाई में पहुंचाया जा रहा है। इसे पीकर लोगों की अब सेहत भी बिगड़ने लगी है।
इतना ही नहीं हीरापुरी शिव मंदिर के आगे मुख्य रास्ते पर भी सीवर का गंदा पानी जमा है।इसकी वजह से सड़क भी टूट कर गहरे गड्ढों में बदल चुकी है। क्षेत्र के लोगों ने इन समस्याओं के निदान की गुहार विधायक से लेकर अधिकारियों तक लगाई, मगर कोई समाधान नहीं हुआ है।
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क्षेत्रवासी लक्ष्मण गौड़, लक्ष्मी देवी, कांता, कमला रानी व महावीर ने बताया कि डोभी तालाब का बूस्टर काफी पुराना हो चुका है। बूस्टर के अंदर बना टैंक का स्लैब एक साल से टूटा पड़ा है। टैंक की सफाई तक नहीं कराई गई है। इसके अंदर काला पानी है, जिससे घरों में पहुंच रहे पानी से भी बदबू आती है। संक्रमित और दूषित पानी पीने से कई लोगों की सेहत भी बिगड़ चुकी है।
इसके बाद बूस्टर के टैंक की सफाई और टूटा हुआ स्लैब ठीक कराने की गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। इसी तरह हीरापुरी शिव मंदिर व प्राचीन शिव मंदिर के सामने की सड़क भी गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाने की वजह से टूट चुकी है। सीवर का गंदा पानी मुख्य रास्ते पर ही फैला रहता है।
इससे मंदिर में आने और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानी होती है। ये रास्ता बाबा लोहड़पीर तक जाता है। जहां हर वीरवार को मेला लगता है। श्रद्धालु भी इसी दूषित पानी के दरिया को पार कर मंदिर तक पहुंचने पर मजबूर हैं।
डोभी तालाब की झील बनी लावारिस पशुओं की आरामगाह
डोभी तालाब क्षेत्र पर नगर परिषद ने कुछ साल पहले करीब दस लाख का बजट खर्च कर झील बनाई थी, लेकिन ये काम पूरा नहीं हुआ था। झील के आसपास का क्षेत्र अब लावारिस पशुओं की आरामगाह बना हुआ है। यहां दिनभर लावारिस पशु मंडराते हैं, जिससे राहगीरों को भी कई बार चोटिल किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। झील के आसपास ही लोग घरों से निकलने वाला कूड़ा भी फेंक रहे हैं, जिससे यहां का इलाका झील के बजाय कूड़े के ढेर में भी बदलता जा रहा है।
शहर के अंदर पानी के बूस्टरों की क्षमता बढ़ाने और उनके रखरखाव के लिए बजट की मंजूरी का मसौदा मुख्यालय भेजा हुआ है। इसमें शहरी दायरे की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ीकरण का बड़े स्तर पर काम होना है। उसकी मंजूरी के बाद ही इन समस्याओं का स्थायी तौर पर निदान करा दिया जाएगा।
-सूर्यकांत, कार्यकारी अभियंता, शहरी पेयजल शाखा भिवानी।
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इसकी वजह से इसमें भंडारित पानी में भी बदबू हो गई है। इसी पानी को बूस्टर से घरों तक सप्लाई में पहुंचाया जा रहा है। इसे पीकर लोगों की अब सेहत भी बिगड़ने लगी है।
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इतना ही नहीं हीरापुरी शिव मंदिर के आगे मुख्य रास्ते पर भी सीवर का गंदा पानी जमा है।इसकी वजह से सड़क भी टूट कर गहरे गड्ढों में बदल चुकी है। क्षेत्र के लोगों ने इन समस्याओं के निदान की गुहार विधायक से लेकर अधिकारियों तक लगाई, मगर कोई समाधान नहीं हुआ है।
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क्षेत्रवासी लक्ष्मण गौड़, लक्ष्मी देवी, कांता, कमला रानी व महावीर ने बताया कि डोभी तालाब का बूस्टर काफी पुराना हो चुका है। बूस्टर के अंदर बना टैंक का स्लैब एक साल से टूटा पड़ा है। टैंक की सफाई तक नहीं कराई गई है। इसके अंदर काला पानी है, जिससे घरों में पहुंच रहे पानी से भी बदबू आती है। संक्रमित और दूषित पानी पीने से कई लोगों की सेहत भी बिगड़ चुकी है।
इसके बाद बूस्टर के टैंक की सफाई और टूटा हुआ स्लैब ठीक कराने की गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। इसी तरह हीरापुरी शिव मंदिर व प्राचीन शिव मंदिर के सामने की सड़क भी गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाने की वजह से टूट चुकी है। सीवर का गंदा पानी मुख्य रास्ते पर ही फैला रहता है।
इससे मंदिर में आने और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानी होती है। ये रास्ता बाबा लोहड़पीर तक जाता है। जहां हर वीरवार को मेला लगता है। श्रद्धालु भी इसी दूषित पानी के दरिया को पार कर मंदिर तक पहुंचने पर मजबूर हैं।
डोभी तालाब की झील बनी लावारिस पशुओं की आरामगाह
डोभी तालाब क्षेत्र पर नगर परिषद ने कुछ साल पहले करीब दस लाख का बजट खर्च कर झील बनाई थी, लेकिन ये काम पूरा नहीं हुआ था। झील के आसपास का क्षेत्र अब लावारिस पशुओं की आरामगाह बना हुआ है। यहां दिनभर लावारिस पशु मंडराते हैं, जिससे राहगीरों को भी कई बार चोटिल किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। झील के आसपास ही लोग घरों से निकलने वाला कूड़ा भी फेंक रहे हैं, जिससे यहां का इलाका झील के बजाय कूड़े के ढेर में भी बदलता जा रहा है।
शहर के अंदर पानी के बूस्टरों की क्षमता बढ़ाने और उनके रखरखाव के लिए बजट की मंजूरी का मसौदा मुख्यालय भेजा हुआ है। इसमें शहरी दायरे की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ीकरण का बड़े स्तर पर काम होना है। उसकी मंजूरी के बाद ही इन समस्याओं का स्थायी तौर पर निदान करा दिया जाएगा।
-सूर्यकांत, कार्यकारी अभियंता, शहरी पेयजल शाखा भिवानी।