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Bhiwani News: प्रॉपर्टी आईडी के खेल से नगर परिषद कार्यालय भी नहीं अछूता, बना दी दूसरे की पीआईडी
Wed, 30 Sep 2026 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 30 Sep 2026 01:36 AM IST
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नगर परिषद कार्यालय परिसर में दर्शायी जा रही पीआईडी पर लगा दुकान का फोटो।
- फोटो : 1
भिवानी। प्रॉपर्टी आईडी में गड़बड़ी का मामला अब नगर परिषद कार्यालय तक पहुंच गया है। जीआईएस पोर्टल पर 3CRRWHY3 नंबर की निजी कॉमर्शियल संपत्ति की लोकेशन नगर परिषद कार्यालय के बीचोंबीच दिखाई जा रही है जबकि उसकी वास्तविक लोकेशन रेलवे स्टेशन की तरफ कार्यालय से करीब 50 मीटर दूर है।
रेलवे रोड स्थित नगर परिषद कार्यालय के बीचोंबीच कार्यालय की अपनी प्रॉपर्टी आईडी से सटी लोकेशन पर यह पीआईडी दर्ज है। पोर्टल पर इसका मालिक प्रेम प्रकाश दर्शाया गया है और संपत्ति को कॉमर्शियल यानी दुकान की श्रेणी में दिखाया गया है। जबकि वास्तविक संपत्ति रेलवे स्टेशन के सामने नगर परिषद कार्यालय से करीब 50 मीटर दूर बताई गई है। इससे पीआईडी तैयार करते समय लोकेशन और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जीआईएस पोर्टल पर शहर की संपत्तियों का डिजिटल डाटा मानचित्र के रूप में दर्ज है। शहरी क्षेत्र में अधिकृत संपत्तियों को अनधिकृत दर्शाए जाने की गड़बड़ी भी सामने आई है। नगर परिषद अधिकारियों के सामने ऐसी गड़बड़ी वाले 44 पैच चिह्नित हो चुके हैं। एक पैच में काफी क्षेत्र और कई संपत्तियां शामिल हैं जिनके मालिकाना हक के दस्तावेज अधिकृत हैं लेकिन पोर्टल पर संपत्तियां अनधिकृत दिखाई जा रही हैं।
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नगर परिषद कार्यालय भी गलत पीआईडी की चपेट में आया
नगर परिषद कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि जब खुद का कार्यालय ही गलत पीआईडी की लोकेशन से नहीं बच पाया तो शहरवासियों की पीआईडी में गड़बड़ी कैसे रुकेगी। सरकारी और निजी संपत्ति की लोकेशन अलग होने के बावजूद निजी पीआईडी सरकारी संपत्ति के अंदर दिखाई जा रही है। मामला केवल गलत लोकेशन तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि पीआईडी बनाते समय लोकेशन, मलकियत, किल्ला-खसरा और अन्य संबंधित अभिलेखों का किस स्तर तक सत्यापन किया गया।
शहरवासियों की पीआईडी पर ऑब्जेक्शन की चल रही कलम
नगर परिषद में पीआईडी पर ऑब्जेक्शन का सिलसिला भी थम नहीं रहा है। कहीं लोकेशन सही नहीं होने तो कहीं जमाबंदी, रजिस्ट्री और इंतकाल की सत्यापित व प्रमाणित प्रतियों को लेकर आपत्तियां सामने आ रही हैं। साफ मलकियत के कागज भी कई बार धुंधले दिखाई देने की शिकायत रहती है। ऐसे में नगर परिषद में दलालों का गढ़ बनने के आरोप भी लग रहे हैं।
नगर परिषद की अपनी प्रॉपर्टी आईडी पर भी सवाल
नगर परिषद भिवानी की प्रॉपर्टी आईडी 3CA53CN6 नंबर से दर्ज है। इस पर वर्ष 2014 से पहले की कार्यालय की फोटो लगाई गई है। जबकि हाल में प्रॉपर्टी आईडी में किसी भी बदलाव के लिए जीपीएस कैमरा लोकेशन सहित फोटो लगाना अनिवार्य किया गया है। यह केवल प्रॉपर्टी आईडी की गलती नहीं बल्कि सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पोर्टल पर लोकेशन ठीक करने की प्रक्रिया भी बंद कर रखी है ताकि कर्मचारी और अधिकारी गलत तरीके से अनधिकृत कॉलोनी की लोकेशन अधिकृत कॉलोनी में दिखाकर नो ड्यूज जारी न कर सकें और बाद में उसे फिर अनधिकृत न दर्शा सकें।
संपत्ति से जुड़े टैक्स भुगतान के लिए बनी थी पीआईडी
नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी ऑनलाइन टैक्स असेसमेंट सिस्टम के रूप में जारी की गई थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति को अलग टैक्स आईडी और प्रॉपर्टी आईडी उपलब्ध कराना था ताकि लोग अपने भूखंड, दुकान और मकान का गृहकर ऑनलाइन जमा कर सकें। पीआईडी में गड़बड़ी सामने आने से यह व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शहर के ये अधिकृत हिस्से पोर्टल पर हुए अनधिकृत
जीआईएस पोर्टल पर संपत्तियों का डिजिटल डाटा मानचित्र के रूप में दर्शाया गया है। इसमें अधिकृत होने के बावजूद कृष्णा कॉलोनी रेलवे रोड, हांसी गेट स्थित केएम स्कूल के समीप का क्षेत्र, डीसी कॉलोनी का कुछ हिस्सा, आंबेडकर कॉलोनी, विद्या नगर कॉलोनी और बावड़ी गेट के आसपास का क्षेत्र अनधिकृत दर्शाया गया है। डाबर कॉलोनी का क्षेत्र भी पोर्टल पर अनधिकृत दिखाई दे रहा है। नगर परिषद अधिकारियों ने शहर में ऐसे 44 पैच चिह्नित किए हैं। इन पैच में काफी क्षेत्र और कई संपत्तियां शामिल हैं। शहर में करीब 76 हजार संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी बन चुकी हैं। अधिकृत से अनधिकृत दायरे में दर्शाए गए क्षेत्रों को दुरुस्त कराने के लिए अधिकारियों को पंचकूला तक जाना होगा।
वर्जन
नगर परिषद कार्यालय में निजी व्यक्ति की पीआईडी की लोकेशन गलत दर्शाए जाने के पीछे जीआईएस पोर्टल पर अधिकृत दायरे को अनधिकृत दर्शाया जाना भी कारण हो सकता है। फिलहाल मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है इसका पता लगाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - हरबीर सिंह, जिला नगर आयुक्त, नगर परिषद, भिवानी।
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रेलवे रोड स्थित नगर परिषद कार्यालय के बीचोंबीच कार्यालय की अपनी प्रॉपर्टी आईडी से सटी लोकेशन पर यह पीआईडी दर्ज है। पोर्टल पर इसका मालिक प्रेम प्रकाश दर्शाया गया है और संपत्ति को कॉमर्शियल यानी दुकान की श्रेणी में दिखाया गया है। जबकि वास्तविक संपत्ति रेलवे स्टेशन के सामने नगर परिषद कार्यालय से करीब 50 मीटर दूर बताई गई है। इससे पीआईडी तैयार करते समय लोकेशन और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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जीआईएस पोर्टल पर शहर की संपत्तियों का डिजिटल डाटा मानचित्र के रूप में दर्ज है। शहरी क्षेत्र में अधिकृत संपत्तियों को अनधिकृत दर्शाए जाने की गड़बड़ी भी सामने आई है। नगर परिषद अधिकारियों के सामने ऐसी गड़बड़ी वाले 44 पैच चिह्नित हो चुके हैं। एक पैच में काफी क्षेत्र और कई संपत्तियां शामिल हैं जिनके मालिकाना हक के दस्तावेज अधिकृत हैं लेकिन पोर्टल पर संपत्तियां अनधिकृत दिखाई जा रही हैं।
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नगर परिषद कार्यालय भी गलत पीआईडी की चपेट में आया
नगर परिषद कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि जब खुद का कार्यालय ही गलत पीआईडी की लोकेशन से नहीं बच पाया तो शहरवासियों की पीआईडी में गड़बड़ी कैसे रुकेगी। सरकारी और निजी संपत्ति की लोकेशन अलग होने के बावजूद निजी पीआईडी सरकारी संपत्ति के अंदर दिखाई जा रही है। मामला केवल गलत लोकेशन तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि पीआईडी बनाते समय लोकेशन, मलकियत, किल्ला-खसरा और अन्य संबंधित अभिलेखों का किस स्तर तक सत्यापन किया गया।
शहरवासियों की पीआईडी पर ऑब्जेक्शन की चल रही कलम
नगर परिषद में पीआईडी पर ऑब्जेक्शन का सिलसिला भी थम नहीं रहा है। कहीं लोकेशन सही नहीं होने तो कहीं जमाबंदी, रजिस्ट्री और इंतकाल की सत्यापित व प्रमाणित प्रतियों को लेकर आपत्तियां सामने आ रही हैं। साफ मलकियत के कागज भी कई बार धुंधले दिखाई देने की शिकायत रहती है। ऐसे में नगर परिषद में दलालों का गढ़ बनने के आरोप भी लग रहे हैं।
नगर परिषद की अपनी प्रॉपर्टी आईडी पर भी सवाल
नगर परिषद भिवानी की प्रॉपर्टी आईडी 3CA53CN6 नंबर से दर्ज है। इस पर वर्ष 2014 से पहले की कार्यालय की फोटो लगाई गई है। जबकि हाल में प्रॉपर्टी आईडी में किसी भी बदलाव के लिए जीपीएस कैमरा लोकेशन सहित फोटो लगाना अनिवार्य किया गया है। यह केवल प्रॉपर्टी आईडी की गलती नहीं बल्कि सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने पोर्टल पर लोकेशन ठीक करने की प्रक्रिया भी बंद कर रखी है ताकि कर्मचारी और अधिकारी गलत तरीके से अनधिकृत कॉलोनी की लोकेशन अधिकृत कॉलोनी में दिखाकर नो ड्यूज जारी न कर सकें और बाद में उसे फिर अनधिकृत न दर्शा सकें।
संपत्ति से जुड़े टैक्स भुगतान के लिए बनी थी पीआईडी
नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी ऑनलाइन टैक्स असेसमेंट सिस्टम के रूप में जारी की गई थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति को अलग टैक्स आईडी और प्रॉपर्टी आईडी उपलब्ध कराना था ताकि लोग अपने भूखंड, दुकान और मकान का गृहकर ऑनलाइन जमा कर सकें। पीआईडी में गड़बड़ी सामने आने से यह व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शहर के ये अधिकृत हिस्से पोर्टल पर हुए अनधिकृत
जीआईएस पोर्टल पर संपत्तियों का डिजिटल डाटा मानचित्र के रूप में दर्शाया गया है। इसमें अधिकृत होने के बावजूद कृष्णा कॉलोनी रेलवे रोड, हांसी गेट स्थित केएम स्कूल के समीप का क्षेत्र, डीसी कॉलोनी का कुछ हिस्सा, आंबेडकर कॉलोनी, विद्या नगर कॉलोनी और बावड़ी गेट के आसपास का क्षेत्र अनधिकृत दर्शाया गया है। डाबर कॉलोनी का क्षेत्र भी पोर्टल पर अनधिकृत दिखाई दे रहा है। नगर परिषद अधिकारियों ने शहर में ऐसे 44 पैच चिह्नित किए हैं। इन पैच में काफी क्षेत्र और कई संपत्तियां शामिल हैं। शहर में करीब 76 हजार संपत्तियों की प्रॉपर्टी आईडी बन चुकी हैं। अधिकृत से अनधिकृत दायरे में दर्शाए गए क्षेत्रों को दुरुस्त कराने के लिए अधिकारियों को पंचकूला तक जाना होगा।
वर्जन
नगर परिषद कार्यालय में निजी व्यक्ति की पीआईडी की लोकेशन गलत दर्शाए जाने के पीछे जीआईएस पोर्टल पर अधिकृत दायरे को अनधिकृत दर्शाया जाना भी कारण हो सकता है। फिलहाल मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई है इसका पता लगाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - हरबीर सिंह, जिला नगर आयुक्त, नगर परिषद, भिवानी।