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Bhiwani News: भावांतर के बावजूद बाजरा बेचने पर किसान को हो रहा 100 रुपये तक नुकसान

Wed, 30 Sep 2026 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Wed, 30 Sep 2026 01:38 AM IST
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Farmers are incurring a loss of up to 100 on selling pearl millet, despite the Bhavantar scheme
भिवानी। जिला मुख्यालय की मंडी में बाजरे की आवक तेज होने के बीच प्राइवेट बोली पर किसानों को भावांतर भरपाई के बावजूद 75 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंगलवार को मंडी में बाजरा 2150 से 2225 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिका जबकि किसान एमएसपी के अनुरूप उचित दाम की उम्मीद लगाए हुए हैं।
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भिवानी मंडी में पिछले दस दिनों से बाजरा की आवक जारी है। रोजाना करीब 600 से एक हजार क्विंटल बाजरा मंडी पहुंच रहा है और एक हजार क्विंटल से अधिक की मात्रा प्राइवेट बोली पर भी बिक रही है। किसानों का कहना है कि इस बार बाजरे का रंग फीका होने और अधिक नमी जैसी समस्या नहीं है फिर भी उन्हें अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा।
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प्राइवेट बोली पर बाजरा बेचने वाले कई किसानों को भावांतर योजना के लाभ की प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। वहीं कुछ किसान भावांतर भरपाई की उम्मीद में बाजरा मंडी लेकर पहुंचे हैं लेकिन उनकी फसल आढ़तियों के प्रतिष्ठानों के बाहर ढेरियों में पड़ी है। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से उन्हें मजबूरी में प्राइवेट बोली का सहारा लेना पड़ रहा है।
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सरकारी खरीद के इंतजार में 2225 रुपये में बेचा बाजरा
बाजरे की सरकारी खरीद के इंतजार में काफी दिन तक फसल का भंडारण रखा मगर अब प्राइवेट बोली पर 2225 रुपये प्रति क्विंटल बेच दिया है। सरकार भावांतर भरपाई के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल देने की बात कह रही है मगर अभी तक इसके लिए भी अधिकारियों ने कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की है। -संजय दलाल, किसान

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भावांतर भरपाई के बावजूद किसान प्रति क्विंटल 75 से 100 रुपये का नुकसान झेल रहा है। इस नुकसान की भरपाई भावांतर से भी नहीं हो पा रही है। मैं अपना बाजरा प्राइवेट बोली पर बेचने को मजबूर हूं। फसल की अच्छी पैदावार के लिए काफी मेहनत की मगर खराब दाम मिलने से सब पानी फिर गया। -सुमित खरकड़ी
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सरकार अभी तक बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं करा पाई है। भावांतर भरपाई के तहत 600 रुपये प्रति क्विंटल देने की बात कही जा रही है मगर किसानों को अभी इसका लाभ नहीं मिला है। सरकार को मंडियों में बाजरा की एमएसपी पर जल्द से जल्द खरीद शुरू करानी चाहिए ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम मिल सके। -मेवा सिंह आर्य, जिला प्रधान, भाकियू


वर्सन
मंडी में फिलहाल रोजाना 600 से एक हजार क्विंटल बाजरा की आवक हो रही है। प्राइवेट बोली पर बाजरा खरीदा जा रहा है। भावांतर को लेकर अभी किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। आढ़ती भी असमंजस में हैं कि सरकार खरीद कराएगी या भावांतर देगी। अधिकारियों के पास अभी तक आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं आई है। -नरेश भूरू, प्रधान, दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, भिवानी
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