{"_id":"620d583fb20d4f37561c7cc6","slug":"the-moon-and-stars-will-be-visible-to-the-students-in-the-classroom-bhiwani-news-hsr6244910129","type":"story","status":"publish","title_hn":"कक्षा कक्ष में विद्यार्थियों को दिखाई देंगे चांद-तारे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कक्षा कक्ष में विद्यार्थियों को दिखाई देंगे चांद-तारे
विज्ञापन
रेलवे रोड स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाई गई खगोलीय लैब। संवाद
- फोटो : Bhiwani
नवनीत शर्मा
भिवानी। अब चांद और तारे देखने के लिए विद्यार्थियों को रात होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उन्हें टेलीस्कॉप के जरिये कक्षा कक्ष में ही दिन में ही चांद और तारों के दीदार हो जाएंगे।
हरियाणा स्कूली शिक्षा विभाग ने भिवानी जिले में तीन सरकारी स्कूलों में खगोलीय लैब तैयार कराई हैं। प्रत्येक लैब को तैयार कराने में करीब तीन लाख का बजट भी खर्च हुआ है। इस लैब में बच्चे ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे और मॉडलों के माध्यम से भी ब्रह्मांड के रहस्यों को भी जान सकेंगे।
भिवानी के सेठ किरोड़ीमल राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय और राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के अलावा बवानीखेड़ा के मॉडल संस्कृति विद्यालय में खगोलीय लैब तैयार की गई हैं। प्रत्येक लैब को तैयार करने पर तीन लाख 24 हजार 500 रुपये का बजट खर्च हुआ है। इस लैब मेें कक्षा चौथी से बारहवीं तक के विद्यार्थी खगोलीय शास्त्र से जुड़े प्रयोग कर सकेंगे। अब तक सरकारी स्कूलों में बच्चों को भूगोल का ज्ञान ही मिलता था, जबकि खगोल से जुड़े मॉडल और उसे नजदीक से समझने के लिए प्रयोग नहीं हो पा रहे थे। मगर इस लैब में विद्यार्थी न केवल खगोल से जुड़े मॉडल तैयार करेंगे, बल्कि टेलीस्कॉप से चांद तारों के दीदार भी कर सकेंगे।
विज्ञापन
लैब की छत को ही बना दिया सौरमंडल और उपग्रह
लैब की छत को सौरमंडल का रूप दिया गया है। जिसमें सभी ग्रहों को भी अपनी स्थिति में दर्शाया गया है। इनके बीच ही चांद और तारे भी आसमान में ताकने जैसा आभास करा रहे हैं। लैब में न्यूटन के नियम, सौरमंडल के ग्रह और उपग्रह के अलावा दिन रात कैसे बनते हैं, इस बारे में बच्चों को बताया जाएगा।
कैसे बना सौरमंडल
लैब में बच्चों को यह भी समझाया जाएगा कि हमारा सौरमंडल कैसे बना और कैसे देश दुनिया नक्शे पर आए। सौर मंडल का प्रभार हमारे भूगोल पर कैसे पड़ा, उसके असर से क्या परिवर्तन हुए। इसकी भी बच्चों को बारीकी से जानकारी दी जाएगी।
पहले किताबों से ही ले रहे थे ज्ञान
लैब के निर्माण से पहले विद्यार्थी कक्षा में किताबों से ही ज्ञान ले रहे थे। किताबों में थ्योरी की वजह से विद्यार्थी ठीक से ब्रह्मांड के बारे में जानकारी नहीं ले पाते थे और विषय भी ठीक से समझ नहीं पाते थे। ऐसे में विद्यार्थियों का बौद्धिक स्तर बढ़ाने के लिए और उनके कौशल के विकास के लिए शिक्षा विभाग की ओर यह कदम उठाया गया है। (संवाद)
मिलेगी जानकारी
स्कूल में विद्यार्थियों को सौरमंडल के बारे में जानकारी देने के लिए नई लैब बनाई गई है, जिसमें सभी तरह के ग्रह और उपग्रहों को शामिल किया गया है। लैब में विद्यार्थी अपने हाथों से विज्ञान के प्रयोग कर सकेंगे और ब्रह्मांड से संबंधित जानकारी जुटा पाएंगे। इससे विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान के बारे में जानने के लिए काफी मदद मिलेगी।
- सविता घणघस, प्राधनाचार्य, सेठ किरोड़ीमल राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिवानी।
विज्ञापन
भिवानी। अब चांद और तारे देखने के लिए विद्यार्थियों को रात होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उन्हें टेलीस्कॉप के जरिये कक्षा कक्ष में ही दिन में ही चांद और तारों के दीदार हो जाएंगे।
हरियाणा स्कूली शिक्षा विभाग ने भिवानी जिले में तीन सरकारी स्कूलों में खगोलीय लैब तैयार कराई हैं। प्रत्येक लैब को तैयार कराने में करीब तीन लाख का बजट भी खर्च हुआ है। इस लैब में बच्चे ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे और मॉडलों के माध्यम से भी ब्रह्मांड के रहस्यों को भी जान सकेंगे।
विज्ञापन
भिवानी के सेठ किरोड़ीमल राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय और राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के अलावा बवानीखेड़ा के मॉडल संस्कृति विद्यालय में खगोलीय लैब तैयार की गई हैं। प्रत्येक लैब को तैयार करने पर तीन लाख 24 हजार 500 रुपये का बजट खर्च हुआ है। इस लैब मेें कक्षा चौथी से बारहवीं तक के विद्यार्थी खगोलीय शास्त्र से जुड़े प्रयोग कर सकेंगे। अब तक सरकारी स्कूलों में बच्चों को भूगोल का ज्ञान ही मिलता था, जबकि खगोल से जुड़े मॉडल और उसे नजदीक से समझने के लिए प्रयोग नहीं हो पा रहे थे। मगर इस लैब में विद्यार्थी न केवल खगोल से जुड़े मॉडल तैयार करेंगे, बल्कि टेलीस्कॉप से चांद तारों के दीदार भी कर सकेंगे।
विज्ञापन
लैब की छत को ही बना दिया सौरमंडल और उपग्रह
लैब की छत को सौरमंडल का रूप दिया गया है। जिसमें सभी ग्रहों को भी अपनी स्थिति में दर्शाया गया है। इनके बीच ही चांद और तारे भी आसमान में ताकने जैसा आभास करा रहे हैं। लैब में न्यूटन के नियम, सौरमंडल के ग्रह और उपग्रह के अलावा दिन रात कैसे बनते हैं, इस बारे में बच्चों को बताया जाएगा।
कैसे बना सौरमंडल
लैब में बच्चों को यह भी समझाया जाएगा कि हमारा सौरमंडल कैसे बना और कैसे देश दुनिया नक्शे पर आए। सौर मंडल का प्रभार हमारे भूगोल पर कैसे पड़ा, उसके असर से क्या परिवर्तन हुए। इसकी भी बच्चों को बारीकी से जानकारी दी जाएगी।
पहले किताबों से ही ले रहे थे ज्ञान
लैब के निर्माण से पहले विद्यार्थी कक्षा में किताबों से ही ज्ञान ले रहे थे। किताबों में थ्योरी की वजह से विद्यार्थी ठीक से ब्रह्मांड के बारे में जानकारी नहीं ले पाते थे और विषय भी ठीक से समझ नहीं पाते थे। ऐसे में विद्यार्थियों का बौद्धिक स्तर बढ़ाने के लिए और उनके कौशल के विकास के लिए शिक्षा विभाग की ओर यह कदम उठाया गया है। (संवाद)
मिलेगी जानकारी
स्कूल में विद्यार्थियों को सौरमंडल के बारे में जानकारी देने के लिए नई लैब बनाई गई है, जिसमें सभी तरह के ग्रह और उपग्रहों को शामिल किया गया है। लैब में विद्यार्थी अपने हाथों से विज्ञान के प्रयोग कर सकेंगे और ब्रह्मांड से संबंधित जानकारी जुटा पाएंगे। इससे विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान के बारे में जानने के लिए काफी मदद मिलेगी।
- सविता घणघस, प्राधनाचार्य, सेठ किरोड़ीमल राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भिवानी।