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Bhiwani News: धंस रहीं शहर की मुख्य सड़कें, विभागों में तालमेल नहीं होने से बिगड़ रहा संतुलन
Wed, 11 Sep 2024 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 11 Sep 2024 11:27 PM IST
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शहर के फैंसी चौक पर धंसा सड़क का हिस्सा ।
भिवानी। सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल नहीं होना भी जनता के लिए सुविधा से ज्यादा दुविधा बन गया है। शहर के अंदर मुख्य सड़कें लगातार धंस रही हैं। सरकारी विभागों के कार्य में आपसी तालमेल नहीं होने की वजह से सड़क पर दौड़ रहे वाहनों का संतुलन भी बिगड़ रहा है।
शहरवासियों का कहना है कि जब तक सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आता तब तक जनता का उद्धार नहीं होगा। भिवानी शहर में पांच से छह मुख्य जगह ऐसी हैं, जहां पर सड़कें लगातार धंस रही हैं। ये सिलसिला पिछले काफी अर्से से जारी है। हालांकि कई जगह विभागों ने स्थायी समाधान भी किया है।
धंसी हुई सड़कों पर हिचकोले खा रहे लोग अब चुनाव के समय अपनी समस्याओं के सुर भी मुखर कर रहे हैं। भिवानी शहर के सरकुलर रोड पर तीन से चार बिंदु ऐसे हैं, जहां सड़क लगातार धंस रही हैं। हालांकि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने दो जगहों पर तो मुख्य सीवर लाइन के मैनहोल भी नए सिरे से तैयार कराए हैं, इसके बावजूद भी आसपास की सड़क दरक रही है।
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दिनोद गेट क्षेत्र पेट्रोल पंप के सामने सड़क दरक गई है। वहीं घंटाघर के समीप जिला नागरिक अस्पताल की दीवार शनिदेव मंदिर के पास भी सड़क धंसी है। हालुवास गेट के पास भी मुख्य चौक पर सड़क धंसी है। यही हाल महम गेट भगवान परशुराम चौक का भी है, जहां सीवर लाइन की वजह से सड़क का कुछ हिस्सा दरक चुका है।
इसके अलावा भी शहर के अनेक ऐसी सड़कें हैं, जहां पर सड़क सीवर लाइन व अन्य लीकेज की वजह से धंस चुकी है। एक विभाग की खामी की वजह से दूसरे सरकारी विभाग को इसका नुकसान झेलना पड़ता है। पीडब्ल्यूडी धंसी हुई सड़कों की काफी बार रिपेयरिंग भी करा चुका है, लेकिन इसके बावजूद ये सिलसिला जारी है। ऐसे में एक विभाग की कमी से दूसरे विभाग का काम और दिक्कत बढ़ गई है, जबकि शहरवासी भी इन खस्ताहाल सड़कों पर हिचकोले खा रहे हैं। हादसों का भी अंदेशा रहता है।
सरकारी विभागों के बीच तालमेल होना बहुत जरूरी है। एक विभाग सड़क तैयार कराता है, उसके तुरंत बाद दूसरा विभाग अपना काम करने के लिए नई सड़क ही तोड़ डालता है। जबकि उसे यह काम पहले भी याद आ सकता था। सरकार के पैसे की बर्बादी के साथ-साथ आम जनता को भी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसलिए ऐसे राजनेता चुने जो प्रशासन और शासन के बीच तालमेल को बेहतर बनाकर जनता के काम करा सके।
- यश।
शहर में मुख्य सड़कें धंसी हैं, यहां पर अगर वाहन की थोड़ी सी भी रफ्तार ज्यादा होने पर पलटने का खतरा रहता है। सड़क किस वजह से धंस रही है। इसका स्थायी समाधान क्या है शायद यह न तो कभी प्रशासन ने जाना है न संबंधित विभागों को इसकी परवाह है। ऐसे में जनता बिगड़े सिस्टम के बीच हिचकोले ही खा रही है। पांच सालों तक राजनेताओं को भी खूब झेला। अब ऐसे लोगों का चयन जरूरी है तो जनता की परेशानी को भलीभांती समझे और उनका समय रहते समाधान भी कराए।
- संदीप।
पिछले कुछ सालों से शहर लगातार दरक रहा है। इसकी वजह सीवर व पानी की लाइनों की लीकेज है। कई जगह तो रिहायशी इलाके में मकान भी धंस रहे हैं, दीवारों में भी दरारें आई हैं, जिनकी शिकायत भी की, मगर कुछ समाधान नहीं हुआ। जब तक सरकारी विभागों में तालमेल और तय समय में जनता के कार्यों को पूरा कराने की प्रशासन की इच्छा शक्ति नहीं होगी तब तक बात नहीं बनेगी। जनता की शिकायतों के अधिकारियों के पास ढेर लगे हैं, लेकिन उनमें से इक्का दुक्का का भी स्थायी समाधान नहीं हो पाता।
-रमेश रखेजा।
जिन हिस्सों में मुख्य सड़कें बार-बार दरक रही हैं, उन हिस्सों के दुकानदारों का कामधंधा भी चौपट हो रहा है। क्योंकि सड़क या तो धंसी रहती है या फिर उसे खोदकर अधिकारी छोड़ देते हैं, जहां लोगों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। ऐसे में ग्राहक वहां जाना तक पसंद नहीं करते। प्रशासन को चाहिए कि विभागों में बेहतर तालमेल बैठाकर लोगों की सुविधा के लिए तय समय सीमा में काम कराए जाएं ताकि जनता भी परेशानी न झेले। फेंसी चौक पर सड़क धंसी है, कोई समाधान नहीं हो रहा है।
- राजीव।
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शहरवासियों का कहना है कि जब तक सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आता तब तक जनता का उद्धार नहीं होगा। भिवानी शहर में पांच से छह मुख्य जगह ऐसी हैं, जहां पर सड़कें लगातार धंस रही हैं। ये सिलसिला पिछले काफी अर्से से जारी है। हालांकि कई जगह विभागों ने स्थायी समाधान भी किया है।
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धंसी हुई सड़कों पर हिचकोले खा रहे लोग अब चुनाव के समय अपनी समस्याओं के सुर भी मुखर कर रहे हैं। भिवानी शहर के सरकुलर रोड पर तीन से चार बिंदु ऐसे हैं, जहां सड़क लगातार धंस रही हैं। हालांकि जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने दो जगहों पर तो मुख्य सीवर लाइन के मैनहोल भी नए सिरे से तैयार कराए हैं, इसके बावजूद भी आसपास की सड़क दरक रही है।
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दिनोद गेट क्षेत्र पेट्रोल पंप के सामने सड़क दरक गई है। वहीं घंटाघर के समीप जिला नागरिक अस्पताल की दीवार शनिदेव मंदिर के पास भी सड़क धंसी है। हालुवास गेट के पास भी मुख्य चौक पर सड़क धंसी है। यही हाल महम गेट भगवान परशुराम चौक का भी है, जहां सीवर लाइन की वजह से सड़क का कुछ हिस्सा दरक चुका है।
इसके अलावा भी शहर के अनेक ऐसी सड़कें हैं, जहां पर सड़क सीवर लाइन व अन्य लीकेज की वजह से धंस चुकी है। एक विभाग की खामी की वजह से दूसरे सरकारी विभाग को इसका नुकसान झेलना पड़ता है। पीडब्ल्यूडी धंसी हुई सड़कों की काफी बार रिपेयरिंग भी करा चुका है, लेकिन इसके बावजूद ये सिलसिला जारी है। ऐसे में एक विभाग की कमी से दूसरे विभाग का काम और दिक्कत बढ़ गई है, जबकि शहरवासी भी इन खस्ताहाल सड़कों पर हिचकोले खा रहे हैं। हादसों का भी अंदेशा रहता है।
सरकारी विभागों के बीच तालमेल होना बहुत जरूरी है। एक विभाग सड़क तैयार कराता है, उसके तुरंत बाद दूसरा विभाग अपना काम करने के लिए नई सड़क ही तोड़ डालता है। जबकि उसे यह काम पहले भी याद आ सकता था। सरकार के पैसे की बर्बादी के साथ-साथ आम जनता को भी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसलिए ऐसे राजनेता चुने जो प्रशासन और शासन के बीच तालमेल को बेहतर बनाकर जनता के काम करा सके।
- यश।
शहर में मुख्य सड़कें धंसी हैं, यहां पर अगर वाहन की थोड़ी सी भी रफ्तार ज्यादा होने पर पलटने का खतरा रहता है। सड़क किस वजह से धंस रही है। इसका स्थायी समाधान क्या है शायद यह न तो कभी प्रशासन ने जाना है न संबंधित विभागों को इसकी परवाह है। ऐसे में जनता बिगड़े सिस्टम के बीच हिचकोले ही खा रही है। पांच सालों तक राजनेताओं को भी खूब झेला। अब ऐसे लोगों का चयन जरूरी है तो जनता की परेशानी को भलीभांती समझे और उनका समय रहते समाधान भी कराए।
- संदीप।
पिछले कुछ सालों से शहर लगातार दरक रहा है। इसकी वजह सीवर व पानी की लाइनों की लीकेज है। कई जगह तो रिहायशी इलाके में मकान भी धंस रहे हैं, दीवारों में भी दरारें आई हैं, जिनकी शिकायत भी की, मगर कुछ समाधान नहीं हुआ। जब तक सरकारी विभागों में तालमेल और तय समय में जनता के कार्यों को पूरा कराने की प्रशासन की इच्छा शक्ति नहीं होगी तब तक बात नहीं बनेगी। जनता की शिकायतों के अधिकारियों के पास ढेर लगे हैं, लेकिन उनमें से इक्का दुक्का का भी स्थायी समाधान नहीं हो पाता।
-रमेश रखेजा।
जिन हिस्सों में मुख्य सड़कें बार-बार दरक रही हैं, उन हिस्सों के दुकानदारों का कामधंधा भी चौपट हो रहा है। क्योंकि सड़क या तो धंसी रहती है या फिर उसे खोदकर अधिकारी छोड़ देते हैं, जहां लोगों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। ऐसे में ग्राहक वहां जाना तक पसंद नहीं करते। प्रशासन को चाहिए कि विभागों में बेहतर तालमेल बैठाकर लोगों की सुविधा के लिए तय समय सीमा में काम कराए जाएं ताकि जनता भी परेशानी न झेले। फेंसी चौक पर सड़क धंसी है, कोई समाधान नहीं हो रहा है।
- राजीव।