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Bhiwani News: मौसम की मार ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी, खरीद मानकों पर खरा नहीं उतर रहा बाजरा
सार
भिवानी मंडी में मौसम की मार से फीका और काला पड़ा बाजरा सरकारी खरीद मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। इससे किसानों और आढ़तियों को खरीद शुरू न होने से परेशानी हो रही है। स्थिति स्पष्ट न होने से मंडी में असमंजस बना हुआ है।
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भिवानी की मंडी में लगीं बाजरे की ढेरियां।
विस्तार
भिवानी। मौसम की विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे किसानों की मुश्किलें अब बाजरा बिक्री में भी बढ़ गई हैं। जो किसान अब तक बाजरा लेकर मंडियों में पहुंचे हैं, उनकी फसल सरकार द्वारा निर्धारित खरीद मानकों को पूरा नहीं कर पा रही है, जिससे अधिकारी खरीद शुरू करने में हिचक रहे हैं। मंडी में पहुंचा बाजरा मौसम की मार से काला और फीका पड़ चुका है, जिसकी सरकारी खरीद संभव नहीं हो पा रही।
वीरवार को भिवानी जिला मुख्यालय की मंडी में 159 किसानों को खरीद के लिए टोकन वितरित किए गए, लेकिन तीन दिन से सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी। इस दिन मंडी में 3251 क्विंटल बाजरा की आवक हुई। अब तक मंडी में कुल 80 हजार क्विंटल से अधिक बाजरा पहुंच चुका है, जिसमें करीब 13 हजार क्विंटल बाजरा प्राइवेट बोली पर बिक चुका है। अधिकांश बाजरा आढ़तियों के प्रतिष्ठानों में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। किसान पिछले तीन दिनों से सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार ने 23 सितंबर से मंडियों में बाजरा की खरीद का शेड्यूल निर्धारित किया था। भिवानी मंडी में पिछले 15 दिनों से किसानों द्वारा बाजरा की आवक जारी है। हालांकि खरीद मानकों के कारण सरकारी खरीद ठप पड़ी है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि सरकार ने कड़े मानक तय किए हैं, जिनमें ढील मिलने पर ही खरीद संभव है।
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अधिकांश बाजरा मानकों पर खरा नहीं उतरा
दो दिन पहले ही एचएसडब्ल्यूसी के जिला मैनेजर समेत अन्य अधिकारियों ने मंडी में बाजरा की ढेरियों का निरीक्षण किया। अधिकांश फसल का रंग फीका और मौसम की वजह से काला पड़ चुका था, जिसके कारण उसकी सरकारी खरीद नहीं की गई। किसान और आढ़तियों को अभी तक खरीद शुरू होने का इंतजार है, लेकिन स्थिति पर संशय बना हुआ है।
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मंडी में लगातार किसानों द्वारा बाजरा पहुंचाया जा रहा है, लेकिन अभी तक खरीद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। इससे आढ़तियों को भी परेशानी हो रही है, क्योंकि उनके पास रोजाना हजारों क्विंटल बाजरा आता रहता है। भिवानी मंडी में अब तक 75 हजार क्विंटल बाजरा भंडारित हो चुका है, लेकिन खरीद शुरू नहीं हो सकी है। अधिकारियों का कहना है कि मंडी में आए बाजरे की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही।सरकारी खरीद से मना किए जाने पर किसानों को भावांतर भुगतान का लाभ मिलेगा, जिससे वे बाजरा प्राइवेट बाजार में बेच सकेंगे। वहीं आढ़ति भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वे किसानों का बाजरा उतरवाएं या नहीं। - भूरु बंसल, प्रधान, ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, भिवानी
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मंडी में अब तक बाजरा की आवक हुई है, उसमें सरकार द्वारा तय किए मानक पूरे नहीं हो रहे हैं। बाजरे का रंग फीका और काला है। जिसे सरकारी खरीद नहीं किया जा सकता है। सरकार अगर खरीद के नियमों में कोई ढील देती है तो फिर नए आदेशानुसार बाजरा की सरकारी खरीद कराई जाएगी। बाजरा की खरीद में कोई ढिलाई नहीं है, मानकों के हिसाब से ही बाजरा खरीद होगा। - दिलबाग सिंह जिला प्रबंधक एचएसडब्ल्यूसी, भिवानी
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वीरवार को भिवानी जिला मुख्यालय की मंडी में 159 किसानों को खरीद के लिए टोकन वितरित किए गए, लेकिन तीन दिन से सरकारी खरीद शुरू नहीं हो सकी। इस दिन मंडी में 3251 क्विंटल बाजरा की आवक हुई। अब तक मंडी में कुल 80 हजार क्विंटल से अधिक बाजरा पहुंच चुका है, जिसमें करीब 13 हजार क्विंटल बाजरा प्राइवेट बोली पर बिक चुका है। अधिकांश बाजरा आढ़तियों के प्रतिष्ठानों में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है। किसान पिछले तीन दिनों से सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
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सरकार ने 23 सितंबर से मंडियों में बाजरा की खरीद का शेड्यूल निर्धारित किया था। भिवानी मंडी में पिछले 15 दिनों से किसानों द्वारा बाजरा की आवक जारी है। हालांकि खरीद मानकों के कारण सरकारी खरीद ठप पड़ी है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि सरकार ने कड़े मानक तय किए हैं, जिनमें ढील मिलने पर ही खरीद संभव है।
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अधिकांश बाजरा मानकों पर खरा नहीं उतरा
दो दिन पहले ही एचएसडब्ल्यूसी के जिला मैनेजर समेत अन्य अधिकारियों ने मंडी में बाजरा की ढेरियों का निरीक्षण किया। अधिकांश फसल का रंग फीका और मौसम की वजह से काला पड़ चुका था, जिसके कारण उसकी सरकारी खरीद नहीं की गई। किसान और आढ़तियों को अभी तक खरीद शुरू होने का इंतजार है, लेकिन स्थिति पर संशय बना हुआ है।
मंडी में लगातार किसानों द्वारा बाजरा पहुंचाया जा रहा है, लेकिन अभी तक खरीद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। इससे आढ़तियों को भी परेशानी हो रही है, क्योंकि उनके पास रोजाना हजारों क्विंटल बाजरा आता रहता है। भिवानी मंडी में अब तक 75 हजार क्विंटल बाजरा भंडारित हो चुका है, लेकिन खरीद शुरू नहीं हो सकी है। अधिकारियों का कहना है कि मंडी में आए बाजरे की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही।सरकारी खरीद से मना किए जाने पर किसानों को भावांतर भुगतान का लाभ मिलेगा, जिससे वे बाजरा प्राइवेट बाजार में बेच सकेंगे। वहीं आढ़ति भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वे किसानों का बाजरा उतरवाएं या नहीं। - भूरु बंसल, प्रधान, ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, भिवानी
मंडी में अब तक बाजरा की आवक हुई है, उसमें सरकार द्वारा तय किए मानक पूरे नहीं हो रहे हैं। बाजरे का रंग फीका और काला है। जिसे सरकारी खरीद नहीं किया जा सकता है। सरकार अगर खरीद के नियमों में कोई ढील देती है तो फिर नए आदेशानुसार बाजरा की सरकारी खरीद कराई जाएगी। बाजरा की खरीद में कोई ढिलाई नहीं है, मानकों के हिसाब से ही बाजरा खरीद होगा। - दिलबाग सिंह जिला प्रबंधक एचएसडब्ल्यूसी, भिवानी