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Bhiwani News: जनसमस्याओं से जूझ रहे बहल में जगी विकास की उम्मीद
Sat, 13 May 2023 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 13 May 2023 10:52 PM IST
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जलभराव की समस्या से ग्रस्त बहल का कन्या विद्यालय का पुराना भवन।
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बहल (भिवानी)। प्रदेश सरकार बड़े गांवों व कस्बों का शहरी तर्ज पर विकास करने के लिए जिस महाग्राम योजना को लागू करने जा रही है, उसमें बहल कस्बे को शामिल किया है। बहल कस्बा इन दिनों पेयजल की किल्लत, सीवरेज की समस्या, चिकित्सकों का टोटा समेत कई समस्याओं से जूझ रहा है। करीब 87 करोड़ रुपये की इस योजना में सीवरेज पर 35 करोड़ रुपये व पेयजल पर करीब 52 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इस योजना से कस्बे में विकास की उम्मीद जगी है।
महाग्राम योजना में मुख्य रूप से सीवरेज व पेयजल व्यवस्था पर काम होगा और कस्बे में इन दोनों योजनाओं की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। योजना के लागू होने के बाद कस्बे में जहां अरसे से बनी पेयजल की समस्या का निदान हो सकेगा, वहीं सीवरेज सुविधा मिल सकेगी। सीवरेज, पेयजल व्यवस्था के अलावा कस्बे में अनेक ऐसी समस्याएं हैं जिनके निराकरण की जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारीकरण बड़ी जरूरतों में से एक है। लंबे समय से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड कर इसे सीएचसी बनाए जाने की मांग रही है। अस्पताल में चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के पद रिक्त है। वहीं, महिला, बाल व दंत चिकित्सक की नियुक्ति के लिए अनेक बार लोगों ने मांग उठाई है। इसके अलावा कस्बे में बस स्टैंड, तहसील भवन का निर्माण किए जाना, पशु चिकित्सालय की बिल्डिंग का सुधारीकरण, सब्जी मंडी बनाए जाने, कन्या विद्यालय के नए भवन का निर्माण, कस्बे में किसी भी तरफ से एक बाइपास के निर्माण सहित अनेक ऐसी समस्याएं है जो लोगों की सुविधा व कस्बे के विकास के लिए जरूरी है।
तीन दशक से उठ रही है बहल को उपमंडल बनाए जाने की मांग
प्रदेश में जब उपमंडल बनाए जाते हैं तो बहल के लोगों की उम्मीद फिर से बन जाती है। पिछले करीब तीन दशक से ज्यादा समय से लोग बहल को उपमंडल बनाए जाने की मांग उठा रहे हैं। अभी तक बहल के लोगों को उपमंडल के कामों के लिए बहल से करीब 40 किमी दूर लोहारू जाकर करवाने पड़ते हैं, जो कि एक परेशानी का कारण है। बहल को उपमंडल बनाए जाने से बहल के अलावा आसपास के करीब 50 से ज्यादा गांवों के लोगों को सीधा फायदा होगा। प्रशासनिक तौर पर उपतहसील बनाए जाने के बाद बहल में प्रशासनिक स्तर की सेवाओं का विस्तार नहीं हुआ। पर, अब उम्मीद है कि भाजपा सरकार में बहल के लोगों को प्रशासनिक स्तर की सेवाओं का लाभ कस्बे में ही मिल सकेगा।
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धूल फांक रहा है प्रदेश का पहला कचरा निस्तारण का पायलेट प्रोजेक्ट
प्रदेश सरकार ने पिछले कार्यकाल में कचरा निस्तारण के लिए एक योजना बनाई थी। इसके तहत शहरों और कस्बों में कचारा प्लांट लगाकर कचरे का निस्तारण करने के साथ उसे उपयोग में लाया जाना था। इसी योजना के तहत प्रदेश का पहला पायलेट प्रोजेक्ट बहल कस्बे में लगा था जिसका शुभारंभ तत्कालीन पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने किया था। इस प्लांट में केंचुआ खाद बनाने के अलावा कचरे से बिजली और रसोई गैस बनाने के लिए यूनिट लगाई थी। पर, भारी भरकम रकम खर्च करने के बाद भी यह योजना एक दिन भी अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाई। इसके अलावा इसके साथ लगती जगह में फाइव पॉड सिस्टम बनाया गया था जहां गंदे पानी को साफ किया जाना था। पर, यहां भी सरकारी पैसे का फायदा जनता को नहीं मिल सका।
शिक्षा हब के रूप में उभरा है 23000 की जनसंख्या वाला बहल कस्बा
सरकारी सुविधाओं के अभाव के बाद भी बहल कस्बा निरंतर शिक्षा क्षेत्र में प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा है। शिक्षा के प्रचार प्रसार में जहां बीआरसीएम संस्थान का बड़ा योगदान रहा है वहीं कस्बे में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाली कोचिंग और सैन्य एकेडमी की भरमार है। कस्बे में कन्या, जीडीसी महाविद्यालयों के अलावा बीआरसीएम लॉ कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा अन्य प्रतिष्ठित विद्यालय है। बहल कस्बे में करीब 8500 मतदाता है और बहल की जनसंख्या 23000 के पार है।
मुझे खुशी है कि बहल कस्बे के विकास के लिए सीएम मनोहर लाल ने मेरे व्यक्तिगत अनुरोध पर बहल को महाग्राम योजना में शामिल किया है। बहल में सीवरेज व पेयजल सुविधा की लंबे समय से जरूरत थी। महाग्राम योजना में बहल में सीवरेज व पेयजल योजना पर करीब 87 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की जाएगी। इसके अलावा बहल में सब्जी मंडी व बस स्टैंड के निर्माण की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इसके अलावा बहल की अन्य समस्याओं के निराकरण का प्रयास किया जा रहा है।
- जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा सरकार।
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महाग्राम योजना में मुख्य रूप से सीवरेज व पेयजल व्यवस्था पर काम होगा और कस्बे में इन दोनों योजनाओं की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। योजना के लागू होने के बाद कस्बे में जहां अरसे से बनी पेयजल की समस्या का निदान हो सकेगा, वहीं सीवरेज सुविधा मिल सकेगी। सीवरेज, पेयजल व्यवस्था के अलावा कस्बे में अनेक ऐसी समस्याएं हैं जिनके निराकरण की जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारीकरण बड़ी जरूरतों में से एक है। लंबे समय से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड कर इसे सीएचसी बनाए जाने की मांग रही है। अस्पताल में चिकित्सकों व अन्य स्टाफ के पद रिक्त है। वहीं, महिला, बाल व दंत चिकित्सक की नियुक्ति के लिए अनेक बार लोगों ने मांग उठाई है। इसके अलावा कस्बे में बस स्टैंड, तहसील भवन का निर्माण किए जाना, पशु चिकित्सालय की बिल्डिंग का सुधारीकरण, सब्जी मंडी बनाए जाने, कन्या विद्यालय के नए भवन का निर्माण, कस्बे में किसी भी तरफ से एक बाइपास के निर्माण सहित अनेक ऐसी समस्याएं है जो लोगों की सुविधा व कस्बे के विकास के लिए जरूरी है।
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तीन दशक से उठ रही है बहल को उपमंडल बनाए जाने की मांग
प्रदेश में जब उपमंडल बनाए जाते हैं तो बहल के लोगों की उम्मीद फिर से बन जाती है। पिछले करीब तीन दशक से ज्यादा समय से लोग बहल को उपमंडल बनाए जाने की मांग उठा रहे हैं। अभी तक बहल के लोगों को उपमंडल के कामों के लिए बहल से करीब 40 किमी दूर लोहारू जाकर करवाने पड़ते हैं, जो कि एक परेशानी का कारण है। बहल को उपमंडल बनाए जाने से बहल के अलावा आसपास के करीब 50 से ज्यादा गांवों के लोगों को सीधा फायदा होगा। प्रशासनिक तौर पर उपतहसील बनाए जाने के बाद बहल में प्रशासनिक स्तर की सेवाओं का विस्तार नहीं हुआ। पर, अब उम्मीद है कि भाजपा सरकार में बहल के लोगों को प्रशासनिक स्तर की सेवाओं का लाभ कस्बे में ही मिल सकेगा।
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धूल फांक रहा है प्रदेश का पहला कचरा निस्तारण का पायलेट प्रोजेक्ट
प्रदेश सरकार ने पिछले कार्यकाल में कचरा निस्तारण के लिए एक योजना बनाई थी। इसके तहत शहरों और कस्बों में कचारा प्लांट लगाकर कचरे का निस्तारण करने के साथ उसे उपयोग में लाया जाना था। इसी योजना के तहत प्रदेश का पहला पायलेट प्रोजेक्ट बहल कस्बे में लगा था जिसका शुभारंभ तत्कालीन पंचायत मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने किया था। इस प्लांट में केंचुआ खाद बनाने के अलावा कचरे से बिजली और रसोई गैस बनाने के लिए यूनिट लगाई थी। पर, भारी भरकम रकम खर्च करने के बाद भी यह योजना एक दिन भी अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाई। इसके अलावा इसके साथ लगती जगह में फाइव पॉड सिस्टम बनाया गया था जहां गंदे पानी को साफ किया जाना था। पर, यहां भी सरकारी पैसे का फायदा जनता को नहीं मिल सका।
शिक्षा हब के रूप में उभरा है 23000 की जनसंख्या वाला बहल कस्बा
सरकारी सुविधाओं के अभाव के बाद भी बहल कस्बा निरंतर शिक्षा क्षेत्र में प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा है। शिक्षा के प्रचार प्रसार में जहां बीआरसीएम संस्थान का बड़ा योगदान रहा है वहीं कस्बे में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाली कोचिंग और सैन्य एकेडमी की भरमार है। कस्बे में कन्या, जीडीसी महाविद्यालयों के अलावा बीआरसीएम लॉ कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा अन्य प्रतिष्ठित विद्यालय है। बहल कस्बे में करीब 8500 मतदाता है और बहल की जनसंख्या 23000 के पार है।
मुझे खुशी है कि बहल कस्बे के विकास के लिए सीएम मनोहर लाल ने मेरे व्यक्तिगत अनुरोध पर बहल को महाग्राम योजना में शामिल किया है। बहल में सीवरेज व पेयजल सुविधा की लंबे समय से जरूरत थी। महाग्राम योजना में बहल में सीवरेज व पेयजल योजना पर करीब 87 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की जाएगी। इसके अलावा बहल में सब्जी मंडी व बस स्टैंड के निर्माण की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इसके अलावा बहल की अन्य समस्याओं के निराकरण का प्रयास किया जा रहा है।
- जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, हरियाणा सरकार।