{"_id":"6aa1a74c64a09c8bfd009087","slug":"the-central-government-should-immediately-halt-the-decision-to-privatize-isro-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-156773-2026-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: इसरो के निजीकरण के फैसले पर तुरंत रोक लगाए केंद्र सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: इसरो के निजीकरण के फैसले पर तुरंत रोक लगाए केंद्र सरकार
Thu, 10 Sep 2026 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:07 AM IST
विज्ञापन
भिवानी। माकपा की भिवानी जिला कमेटी ने केंद्र सरकार से इसरो के निजीकरण के फैसले पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश ने कहा कि इसरो देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थान है।
उन्होंने कहा कि रक्षा, कृषि, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान और रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में इसरो का योगदान महत्वपूर्ण है। ऐसे आत्मनिर्भर संस्थान के निजीकरण से राष्ट्रीय महत्व के मामलों में निजी क्षेत्र पर अनावश्यक निर्भरता बढ़ेगी। इससे देश के हित प्रभावित हो सकते हैं। ओमप्रकाश ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र के चेयरमैन पवन गोयनका की यह टिप्पणी कि इसरो अब प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा, गंभीर चिंता पैदा करती है।
इससे सात दशकों में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए अंतरिक्ष अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को निजी कंपनियों को सौंपने की योजना का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023 का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमों के लिए खोला गया और विदेशी निवेश के लिए उदार रियायतें दी गईं। माकपा के अनुसार, इसे प्रक्षेपण संचालन में लागत-प्रभावशीलता बढ़ाने के नाम पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण पर संसदीय स्थायी समिति ने मार्च 2026 की रिपोर्ट में बिना पारदर्शिता और जवाबदेही के सार्वजनिक संपत्तियों को निजी संस्थाओं को सौंपने पर गंभीर चिंता जताई थी। इसरो स्टाफ एसोसिएशन की संयुक्त कार्य समिति ने भी इसरो प्रमुख को पत्र भेजकर अपनी चिंताएं रखी थीं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि रक्षा, कृषि, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान और रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में इसरो का योगदान महत्वपूर्ण है। ऐसे आत्मनिर्भर संस्थान के निजीकरण से राष्ट्रीय महत्व के मामलों में निजी क्षेत्र पर अनावश्यक निर्भरता बढ़ेगी। इससे देश के हित प्रभावित हो सकते हैं। ओमप्रकाश ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र के चेयरमैन पवन गोयनका की यह टिप्पणी कि इसरो अब प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा, गंभीर चिंता पैदा करती है।
विज्ञापन
इससे सात दशकों में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए अंतरिक्ष अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को निजी कंपनियों को सौंपने की योजना का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023 का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमों के लिए खोला गया और विदेशी निवेश के लिए उदार रियायतें दी गईं। माकपा के अनुसार, इसे प्रक्षेपण संचालन में लागत-प्रभावशीलता बढ़ाने के नाम पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण पर संसदीय स्थायी समिति ने मार्च 2026 की रिपोर्ट में बिना पारदर्शिता और जवाबदेही के सार्वजनिक संपत्तियों को निजी संस्थाओं को सौंपने पर गंभीर चिंता जताई थी। इसरो स्टाफ एसोसिएशन की संयुक्त कार्य समिति ने भी इसरो प्रमुख को पत्र भेजकर अपनी चिंताएं रखी थीं।