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Bhiwani News: बोट उसनै दयांगे जो सुंदर नहर में पाणी ल्यावेगा
Wed, 02 Oct 2024 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 02 Oct 2024 12:10 AM IST
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बवानीखेड़ा के गांव कुंगड़ में चुनावी चर्चा करते ग्रामीण।
बवानीखेड़ा। क्षेत्र के बड़े गांव कुंगड में चुनाव में एक विशेष प्रकार का नारा दिया जा रहा है जो कि विशेषकर किसानों के लिए अत्यंत फायदेमंद होगा। लगभग 9,000 के आबादी के गांव कुंगड में लगभग 5600 मतदाता हैं। सभी ने एक ही आवाज में कहा है कि बोट उसनै दयांगे जो सुंदर नहर में पाणी ल्यावेगा।
ग्रामीण कृष्ण, राजबीर, बलवान, अशोक, काला, अजू, महेंद्र, महाबीर, बिजेन्द्र गोयत ने कहा कि आज तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए है। लगभग 57 सालों से सभी पार्टियों के प्रत्याशी चुनाव के समय हमारे गांव में बड़े-बड़े वादे करके वोट हासिल कर लेते थे, लेकिन अबकी बार हम बहकावे में आने वाले नहीं है।
वहीं ग्रामीणों ने बताया कि म्हारे गाम मै न तो टेम पर बिजली आवे है ना टेम पे डिग्गी में पानी आव है। कहण नै तो म्हारे गाम में सारी सुविधा सै लेकिन वे कागजा में सै। गांव में चुनावी समय पर हर रोज अलग अलग पार्टी नेता दौरा कर वोट की अपील कर रहे हैं परंतु गांव की समस्याओं की और कोई ध्यान नहीं दे रहा जो कि गांव की मुख्य चौपालोें में ये मुद्दे छाए हुए हैं।
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कुंगड़ गांव की जनता ने किसान आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। पशुपालन में भी मुर्रा नस्ल की दुधारू भैंसों व अच्छी किस्म के झोटे व कटडि़यों ने राज्य में ही नहीं अपितु पूरे भारत वर्ष में अपना नाम कमाया है। यहां लगभग 2,050 मुर्रा नस्ल की भैसें है, जिनकी कीमत महंगी कारों से भी अधिक है तथा 88 मुर्रा नस्ल के झोटे है। कुंगड गांव को प्रदेश व देश में काला सोना कहलाने वाला गांव कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ती नहीं होगी। गांव के लोगों ने बताया सरकार के पिछले कार्यकाल में कुगंड़ गांव को निर्मल गांव की ख्याति दी थी लेकिन कुछ समय बाद ही गांव में सरकारी अव्यवस्थाओं के चलते गांव में सफाई व्यवस्था व विकास कार्यों की और कोई ध्यान नहीं दिया गया।
आज गांव की प्रत्येक गली में किचड़ व गंदगी पड़ी दिखाई देगी। यहां तक कि दूरमागी गांवों को जोड़ने वाले कच्चे रास्तों का रखरखाव नहीं करना व गांव में जलघर तो है लेकिन घरों में उपयोग पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। इसके चलते ग्रामीणों को प्रत्येक दिन पेयजल आपूर्ति दूसरे गांव से करनी पड़ रही है, जिसके कारण ग्रामीण जीवन कठिन बना हुआ है। किसानों को हर बर फसल बिजाई के समय पर खाद बीज की किल्लत का सामना भी करना पड़ रहा है।
उपरोक्त सभी बातों से क्षेत्र में वोट मांगने आने वाले राजनेताओं के लिए पार पाना बड़ी चुनौती होगा। सुंदर नहर में समय पर पानी नहीं आने की बात को लेकर सरकार के नुमाइंदे केवल यह आश्वासन देकर चले जाते हैं कि हम पंजाब त हरियाणा के हक का एसवाईएल का पानी लेकर आएंगे और सुंदर में पानी की कमी नहीं रहेगी।
किसानों के खातों से निकाले करोड़ों रुपये
70 वर्षीय बलवान ने बताया कि पिछले दिनों हुई गांव की बैंक की शाखा में बिना किसानों की मर्जी से किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड के खातों से करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई थी, जिसके लिए पिछले कई महीनों से किसान धरना प्रर्दशन करके संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन आज तक समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। इसको लेकर भी ग्रामीणों को सरकार के प्रति रोष है।
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ग्रामीण कृष्ण, राजबीर, बलवान, अशोक, काला, अजू, महेंद्र, महाबीर, बिजेन्द्र गोयत ने कहा कि आज तक जितने भी विधानसभा चुनाव हुए है। लगभग 57 सालों से सभी पार्टियों के प्रत्याशी चुनाव के समय हमारे गांव में बड़े-बड़े वादे करके वोट हासिल कर लेते थे, लेकिन अबकी बार हम बहकावे में आने वाले नहीं है।
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वहीं ग्रामीणों ने बताया कि म्हारे गाम मै न तो टेम पर बिजली आवे है ना टेम पे डिग्गी में पानी आव है। कहण नै तो म्हारे गाम में सारी सुविधा सै लेकिन वे कागजा में सै। गांव में चुनावी समय पर हर रोज अलग अलग पार्टी नेता दौरा कर वोट की अपील कर रहे हैं परंतु गांव की समस्याओं की और कोई ध्यान नहीं दे रहा जो कि गांव की मुख्य चौपालोें में ये मुद्दे छाए हुए हैं।
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कुंगड़ गांव की जनता ने किसान आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। पशुपालन में भी मुर्रा नस्ल की दुधारू भैंसों व अच्छी किस्म के झोटे व कटडि़यों ने राज्य में ही नहीं अपितु पूरे भारत वर्ष में अपना नाम कमाया है। यहां लगभग 2,050 मुर्रा नस्ल की भैसें है, जिनकी कीमत महंगी कारों से भी अधिक है तथा 88 मुर्रा नस्ल के झोटे है। कुंगड गांव को प्रदेश व देश में काला सोना कहलाने वाला गांव कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ती नहीं होगी। गांव के लोगों ने बताया सरकार के पिछले कार्यकाल में कुगंड़ गांव को निर्मल गांव की ख्याति दी थी लेकिन कुछ समय बाद ही गांव में सरकारी अव्यवस्थाओं के चलते गांव में सफाई व्यवस्था व विकास कार्यों की और कोई ध्यान नहीं दिया गया।
आज गांव की प्रत्येक गली में किचड़ व गंदगी पड़ी दिखाई देगी। यहां तक कि दूरमागी गांवों को जोड़ने वाले कच्चे रास्तों का रखरखाव नहीं करना व गांव में जलघर तो है लेकिन घरों में उपयोग पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। इसके चलते ग्रामीणों को प्रत्येक दिन पेयजल आपूर्ति दूसरे गांव से करनी पड़ रही है, जिसके कारण ग्रामीण जीवन कठिन बना हुआ है। किसानों को हर बर फसल बिजाई के समय पर खाद बीज की किल्लत का सामना भी करना पड़ रहा है।
उपरोक्त सभी बातों से क्षेत्र में वोट मांगने आने वाले राजनेताओं के लिए पार पाना बड़ी चुनौती होगा। सुंदर नहर में समय पर पानी नहीं आने की बात को लेकर सरकार के नुमाइंदे केवल यह आश्वासन देकर चले जाते हैं कि हम पंजाब त हरियाणा के हक का एसवाईएल का पानी लेकर आएंगे और सुंदर में पानी की कमी नहीं रहेगी।
किसानों के खातों से निकाले करोड़ों रुपये
70 वर्षीय बलवान ने बताया कि पिछले दिनों हुई गांव की बैंक की शाखा में बिना किसानों की मर्जी से किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड के खातों से करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई थी, जिसके लिए पिछले कई महीनों से किसान धरना प्रर्दशन करके संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन आज तक समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। इसको लेकर भी ग्रामीणों को सरकार के प्रति रोष है।