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पेंशन पाने के लिए टेंशन : माथे पर अनपढ़ की छाप, हाथों में खुद की उम्र साबित करने की बेबसी
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सामान्य अस्पताल में सिविल सर्जन कार्यालय के सामने पार्क में उम्र का प्रमाण पाने के लिए बैठे बुजु?
- फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
भिवानी। जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर पहुंचने के बावजूद भी माथे पर अनपढ़ की छाप और हाथों में खुद की उम्र साबित करने की बेबसी बुजुर्गों के चेहरे पर साफ झलक रही है। ये वे बुजुर्ग हैं, जो जीवन में कभी पढ़-लिख नहीं सके। अब 60 साल की उम्र का पड़ाव पार करने के बाद समाज कल्याण विभाग से पेंशन पाने की टेंशन में इधर उधर घूम रहे हैं। अनपढ़ रह जाने के कारण जन्म प्रमाणपत्र भी नहीं बने, मगर समाज कल्याण विभाग पेंशन के लिए उम्र का सबूत मांग रहा है।
बुजुर्ग सम्मान भत्ता पाने के लिए अनपढ़ बुजुर्गों को मेडिकल बोर्ड से आयु का प्रमाण पाने के लिए कई सालों से इधर उधर भटकना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल के सिविल सर्जन पार्क में जुटे सैकड़ों बुजुर्गों से जब उनका दर्द जाना तो उनकी जुबां पर बेबसी झलक उठी। बुजुर्गों ने बताया कि अनपढ़ रहने की वजह से उनके न तो स्वास्थ्य विभाग से कोई जन्म प्रमाणपत्र बने और न ही किसी आंगनबाड़ी व स्कूल में उनका कभी रजिस्ट्रेशन हुआ। अब खुद की उम्र साबित करने के लिए यहां धक्के खाने पर मजबूर हो गए हैं। दरअसल हर महीने शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में बुजुर्गों को आयु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए मेडिकल बोर्ड बैठता है।
घर में पोते नाती, फिर भी पढ़ाई लिखाई समझ नहीं आती
घर में पोते नाती हैं, जो पढ़े लिखे भी हैं, फिर भी इन बुजुर्गों को पढ़ाई लिखाई समझ नहीं आती है। प्रौढ़ शिक्षा अभियान चलाने के बाद भी सैकड़ों बुजुर्ग साक्षर नहीं हो सकें हैं। घर में पोते नाती को पढ़ता देख इन्हें सुकून तो जरूर मिलता है, मगर अपनी बेबसी भी खलती है, क्योंकि वे उनकी पढ़ाई में कोई सहयोग तो नहीं कर पाते, बल्कि खुद की जिंदगी में भी इसकी अहमियत को समय रहते नहीं समझ पाए।
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जिले में 84775 बुजुर्ग ले रहे पेंशन
समाज कल्याण विभाग में जिले के 84775 बुजुर्ग सम्मान भत्ता यानी पेंशन पा रहे हैं। जबकि 38 हजार से अधिक विधवा महिलाएं भी पेंशन ले रही हैं। आठ हजार 207 दिव्यांगों को भी पेंशन दी जा रही है। निराश्रित 9207 बच्चे भी पेंशन पा रहे हैं। लाडली योजना में भी एक हजार 887 लोगों को पेंशन दी जा रही है।
ये होती है जांच
एज वेरिफिकेशन बोर्ड में बुजुर्गों की हड्डी जांच के लिए एक्स-रे एक्सपर्ट, दंत चिकित्सक के अलावा हड्डी रोग विशेषज्ञ शामिल होता है। ये बुजुर्ग की उम्र जानने के लिए उनके दांतों, चेहरे की झुरिर्यों, हड्डी के एक्स-रे से पहचान करते हैं।
तय मानकों के अनुसार करते हैं जांच
तीन चिकित्सकों का पैनल है। प्रत्येक बुजुर्ग की उम्र जानने के लिए तय मानकों को जांचा जाता है। हमारा प्रयास रहता है कि बोर्ड के समक्ष आए बुजुर्गों को बिना किसी परेशानी के सर्टिफिकेट मिल जाए।
-डॉ. मनीष श्योराण, सदस्य, एज वेरिफिकेशन बोर्ड, नागरिक अस्पताल भिवानी।
इसलिए प्रमाणपत्र जरूरी
वोटर कार्ड में नाम की गलती है या फिर जन्म से जुड़ा कोई प्रमाण नहीं हैं, ऐसे बुजुर्गों को मेडिकल बोर्ड से प्रमाणपत्र लाना अनिवार्य है। इस सर्टिफिकेट के बाद ही पात्र बुजुर्ग पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्धारित अवधि में ही पेंशन शुरू कर दी जाती है।
-कृष्ण लाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी भिवानी।
जीवन में अंगूठा टेक रहने का मलाल
मुझे जीवन में अंगूठा टेक रहने का ममाल हमेशा रहा, लेकिन मैंने अपने बच्चों को इस अभिशाप से मुक्त कर दिया। मैं 68 साल का हो चुका हूं, मगर इसे साबित करने के लिए मेरे पास कोई दस्तावेज नहीं है। मैं पिछले कई सालों से पेंशन पाने के लिए फॉर्म भरने पर भी इधर उधर भटक रहा हूं।
-जगदीश निवासी सिवानी।
43 की मेरी बेटी, 67 की हूं
मुझे टोकन दिया गया है। मैं यहां तीन घंटे से बैठी हूं। पहले भी मेडिकल के लिए आ चुकी हूं। डॉक्टर ने बच्चों के बारे में पूछा था, मेरी बड़ी बेटी 43 बरस की हो गई है, मैं 67 साल की हूं, लेकिन कई सालों से फॉर्म भरने के बाद भी मेरी पेंशन नहीं बनी है। आंखों से दिखाई नहीं देता, चलने फिरने में भी परेशानी होती है।
-राजपति, निवासी कलिंगा।
भारत-चीन युद्ध के समय दो बरस की थी
भारत-चीन के साथ युद्ध के दौरान मैं सिर्फ दो बरस की थी। मेरे माता-पिता की मौत हो चुकी है, बचपन में पढ़ाई नहीं की। अब अनपढ़ रहने के कारण उम्र का भी कोई प्रमाण नहीं है। मेडिकल बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलेगा तो ही पेंशन बनेगी, नहीं तो पात्र होने के बावजूद भी पेंशन से वंचित ही रहना पड़ेगा।
-नानड़ी, निवासी जूई बिचली।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं आई बारी
पांव में दर्द रहता है, इसलिए चला नहीं जाता, आंखों से भी कम दिखाई देता है। यहां तक मुश्किल से पहुंचा हूं। मैं अनपढ़ रह गया, इसलिए मेरा जन्म का कोई प्रमाण नहीं है। मेडिकल बोर्ड में पहले भी आ चुका हूं, मगर घंटों तक इंतजार किया, लेकिन बारी नहीं आई।
-सतबीर वासी मंढाणा।
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भिवानी। जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर पहुंचने के बावजूद भी माथे पर अनपढ़ की छाप और हाथों में खुद की उम्र साबित करने की बेबसी बुजुर्गों के चेहरे पर साफ झलक रही है। ये वे बुजुर्ग हैं, जो जीवन में कभी पढ़-लिख नहीं सके। अब 60 साल की उम्र का पड़ाव पार करने के बाद समाज कल्याण विभाग से पेंशन पाने की टेंशन में इधर उधर घूम रहे हैं। अनपढ़ रह जाने के कारण जन्म प्रमाणपत्र भी नहीं बने, मगर समाज कल्याण विभाग पेंशन के लिए उम्र का सबूत मांग रहा है।
बुजुर्ग सम्मान भत्ता पाने के लिए अनपढ़ बुजुर्गों को मेडिकल बोर्ड से आयु का प्रमाण पाने के लिए कई सालों से इधर उधर भटकना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल के सिविल सर्जन पार्क में जुटे सैकड़ों बुजुर्गों से जब उनका दर्द जाना तो उनकी जुबां पर बेबसी झलक उठी। बुजुर्गों ने बताया कि अनपढ़ रहने की वजह से उनके न तो स्वास्थ्य विभाग से कोई जन्म प्रमाणपत्र बने और न ही किसी आंगनबाड़ी व स्कूल में उनका कभी रजिस्ट्रेशन हुआ। अब खुद की उम्र साबित करने के लिए यहां धक्के खाने पर मजबूर हो गए हैं। दरअसल हर महीने शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में बुजुर्गों को आयु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए मेडिकल बोर्ड बैठता है।
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घर में पोते नाती, फिर भी पढ़ाई लिखाई समझ नहीं आती
घर में पोते नाती हैं, जो पढ़े लिखे भी हैं, फिर भी इन बुजुर्गों को पढ़ाई लिखाई समझ नहीं आती है। प्रौढ़ शिक्षा अभियान चलाने के बाद भी सैकड़ों बुजुर्ग साक्षर नहीं हो सकें हैं। घर में पोते नाती को पढ़ता देख इन्हें सुकून तो जरूर मिलता है, मगर अपनी बेबसी भी खलती है, क्योंकि वे उनकी पढ़ाई में कोई सहयोग तो नहीं कर पाते, बल्कि खुद की जिंदगी में भी इसकी अहमियत को समय रहते नहीं समझ पाए।
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जिले में 84775 बुजुर्ग ले रहे पेंशन
समाज कल्याण विभाग में जिले के 84775 बुजुर्ग सम्मान भत्ता यानी पेंशन पा रहे हैं। जबकि 38 हजार से अधिक विधवा महिलाएं भी पेंशन ले रही हैं। आठ हजार 207 दिव्यांगों को भी पेंशन दी जा रही है। निराश्रित 9207 बच्चे भी पेंशन पा रहे हैं। लाडली योजना में भी एक हजार 887 लोगों को पेंशन दी जा रही है।
ये होती है जांच
एज वेरिफिकेशन बोर्ड में बुजुर्गों की हड्डी जांच के लिए एक्स-रे एक्सपर्ट, दंत चिकित्सक के अलावा हड्डी रोग विशेषज्ञ शामिल होता है। ये बुजुर्ग की उम्र जानने के लिए उनके दांतों, चेहरे की झुरिर्यों, हड्डी के एक्स-रे से पहचान करते हैं।
तय मानकों के अनुसार करते हैं जांच
तीन चिकित्सकों का पैनल है। प्रत्येक बुजुर्ग की उम्र जानने के लिए तय मानकों को जांचा जाता है। हमारा प्रयास रहता है कि बोर्ड के समक्ष आए बुजुर्गों को बिना किसी परेशानी के सर्टिफिकेट मिल जाए।
-डॉ. मनीष श्योराण, सदस्य, एज वेरिफिकेशन बोर्ड, नागरिक अस्पताल भिवानी।
इसलिए प्रमाणपत्र जरूरी
वोटर कार्ड में नाम की गलती है या फिर जन्म से जुड़ा कोई प्रमाण नहीं हैं, ऐसे बुजुर्गों को मेडिकल बोर्ड से प्रमाणपत्र लाना अनिवार्य है। इस सर्टिफिकेट के बाद ही पात्र बुजुर्ग पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्धारित अवधि में ही पेंशन शुरू कर दी जाती है।
-कृष्ण लाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी भिवानी।
जीवन में अंगूठा टेक रहने का मलाल
मुझे जीवन में अंगूठा टेक रहने का ममाल हमेशा रहा, लेकिन मैंने अपने बच्चों को इस अभिशाप से मुक्त कर दिया। मैं 68 साल का हो चुका हूं, मगर इसे साबित करने के लिए मेरे पास कोई दस्तावेज नहीं है। मैं पिछले कई सालों से पेंशन पाने के लिए फॉर्म भरने पर भी इधर उधर भटक रहा हूं।
-जगदीश निवासी सिवानी।
43 की मेरी बेटी, 67 की हूं
मुझे टोकन दिया गया है। मैं यहां तीन घंटे से बैठी हूं। पहले भी मेडिकल के लिए आ चुकी हूं। डॉक्टर ने बच्चों के बारे में पूछा था, मेरी बड़ी बेटी 43 बरस की हो गई है, मैं 67 साल की हूं, लेकिन कई सालों से फॉर्म भरने के बाद भी मेरी पेंशन नहीं बनी है। आंखों से दिखाई नहीं देता, चलने फिरने में भी परेशानी होती है।
-राजपति, निवासी कलिंगा।
भारत-चीन युद्ध के समय दो बरस की थी
भारत-चीन के साथ युद्ध के दौरान मैं सिर्फ दो बरस की थी। मेरे माता-पिता की मौत हो चुकी है, बचपन में पढ़ाई नहीं की। अब अनपढ़ रहने के कारण उम्र का भी कोई प्रमाण नहीं है। मेडिकल बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलेगा तो ही पेंशन बनेगी, नहीं तो पात्र होने के बावजूद भी पेंशन से वंचित ही रहना पड़ेगा।
-नानड़ी, निवासी जूई बिचली।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं आई बारी
पांव में दर्द रहता है, इसलिए चला नहीं जाता, आंखों से भी कम दिखाई देता है। यहां तक मुश्किल से पहुंचा हूं। मैं अनपढ़ रह गया, इसलिए मेरा जन्म का कोई प्रमाण नहीं है। मेडिकल बोर्ड में पहले भी आ चुका हूं, मगर घंटों तक इंतजार किया, लेकिन बारी नहीं आई।
-सतबीर वासी मंढाणा।