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Bhiwani News: अब बिना झराई के ही कराई सरसों की कट्टों में भराई, अधिकारियों से मिलीभगत का अंदेशा

Fri, 31 May 2024 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 31 May 2024 11:45 PM IST
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Suspected of collusion with officials
भिवानी ​की चारा मंडी में पड़ी सरसों की ढेरियां।
संजय वर्मा
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भिवानी। अब बिना झराई के ही सरकारी खरीद में सरसों के कट्टों में भराई का मामला उजागर हुआ है। इसमें अधिकारियों से मिलीभगत का भी अंदेशा है। दूसरे जिलों के गोदामों से अब रोजाना मिलावटी सरसों के कट्टों को वापस लौटाया जा रहा है। रोजाना ही 50 से 60 कट्टे वापस भेजे जा रहे हैं, जिन्हें फिर से अपग्रेड कर गोदामों में भेजा जाएगा।
हैंडलिंग एजेंटों को सरसों की सरकारी खरीद में किसानों की सरसों की तुलाई, झराई, भराई के नाम पर सरकार से प्रति क्विंटल 30 से 35 रुपये का भुगतान अलग से किया जा रहा है। बावजूद इसके बिना झराई के ही सरसों की भराई कराकर सरकार को दोहरा चूना भी लगाया जा रहा है। अगर गोदामों में पहुंचाई गई सरकारी सरसों की जांच कराई जाए तो करोड़ों की चपत का मामला उजागर होगा। इसमें सबसे अधिक खराब गुणवत्ता के सरसों कट्टे तो हिसार की तलवंडी के सरकारी गोदामों में पहुंचे हैं।
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भिवानी जिले की मंडियों में हैफेड द्वारा खरीद सीजन 2024 में 17,67,000 क्विंटल से अधिक सरसों की सरकारी खरीद की गई है। जबकि हरियाणा वेयर हाउस कारपोरेशन की ओर से भी 11,68,530 क्विंटल सरसों किसानों से खरीद की जा चुकी है। इस लिहाज से अकेले भिवानी जिले में 28,75,000 क्विंटल से अधिक सरसों की सरकारी खरीद हुई है।
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सरसों की रिकार्ड तोड़ खरीद में रिकार्ड तोड़ गड़बड़झाला भी होने की आशंका है, क्योंकि हैंडलिंग एजेंटों ने झराई का सरकार से भुगतान लेने के बावजूद बिना झराई के ही सरसों के कट्टों की भराई करा डाली है। भिवानी जिले की मंडियों से खरीद हुई सरकारी सरसों को जींद, हांसी, जुलाना, आदमपुर, हिसार के ढंढूर, तलवंडी के गोदामों में भेजा गया है। इन गोदामों में लगी सरसों की अगर विजिलेंस जांच होगी तो मिलावटी सरसों का खेल उजागर होगा।


हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड से लाइसेंस पर ही बनते हैं हैंडलिंग एजेंट
सीजन के दौरान एमएसपी पर किसानों से सरकारी तौर पर सरसों और गेहूं की खरीद के लिए अधिकृत आढ़ती होते हैं, जिन्हें हैंडलिंग एजेंट कहा जाता है। हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड से इन्हें निर्धारित फीस पर बाकायदा सरकारी खरीद में हैंडलिंग एजेंट का लाइसेंस भी जारी होता है। हैंडलिंग एजेंट को किसानों की फसल खरीद में दामी यानी प्रति क्विंटल निर्धारित राशि मिलती है।
हैंडलिंग एजेंट को किसानों की मंडी पहुंची फसल की झराई, भराई, सफाई, तुलाई, सिलाई और लदाई के नाम पर प्रति क्विंटल 30 से 35 रुपये भी अलग से भुगतान किया जाता है। वास्तव में हैंडलिंग एजेंट बिना झराई के ही कट्टों में भराई, तुलाई और सिलाई के बाद उठान भी करा रहे हैं, जिससे सरकार को दोहरा चूना लग रहा है। क्योंकि बिना झराई के कट्टों में मिलावटी सरसों गोदामों तक पहुंच रही है और सरकारी खाते से भुगतान भी निकाला जा रहा है।


जिन अधिकारियों पर मिलीभगत से खरीद कराने का अंदेशा, अब वही करेंगे मिलावटखोरी की जांच
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश ने आरोप लगाया है कि जिन अधिकारियों पर किसानों की फसल खरीद में मिलीभगत की आशंका है। जिला प्रशासन ने उन्हें ही सरसों की मिलावटखोरी की जांच का जिम्मा भी सौंप दिया है। ऐसे में किस स्तर की ये अधिकारी जांच करेंगे और इसके क्या नतीजे निकलेंगे, यह तो जगजाहिर है।
कामरेड ओमप्रकाश ने जिला प्रशासन और सरकार से करोड़ों रुपयों के इस गड़बड़झाले में विजिलेंस या फिर उच्च स्तरीय अधिकारियों की कमेटी की जांच कराए जाने की मांग की है। वहीं अब तक खरीद होकर जिन गोदामों में ये सरसों पहुंची हैं, उनके अंदर सरसों की गुणवत्ता भी जांची जाए तो पूरा खेल सामने आ जाएगा। यह मामला अकेले भिवानी जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की मंडियों का है।


हैंडलिंग एजेंटों को ही सरसों की झराई, भराई, तुलाई से लेकर लदान कराने तक का अलग से भुगतान दिया जा रहा है। गोदामों से जो सरसों के कट्टे रिजेक्ट होकर वापस आ रहे हैं, उन्हें संबंधित हैंडलिंग एजेंटों को अपग्रेड किए जाने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद ही उन्हें फिर से गोदामों में भेजा जाएगा। अपग्रेड करने के बाद ही हैंडलिंग एजेंटों को उनका भुगतान होगा। - संदीप पूनिया, जिला प्रबंधक, हैफेड भिवानी।
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