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धनाना के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र ने बंजर भूमि में उगाए रंग-बिरंगे तरबूज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2022 10:57 PM IST
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Surendra, a progressive farmer of Dhanana, grew colorful watermelons in the barren land
गांव धनाना निवासी किसान सुरेंद्र अपने खेत में लगे तरबूज दिखाते हुए। - फोटो : Bhiwani
भिवानी। गांव धनाना के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने मोटे अनाज की अपेक्षा बागवानी को अपनाया है। उन्होंने अपने कम पानी के खेत में बागवानी को चुना, जिसमें उसने 11 एकड़ में बाग लगाया है और छह एकड़ में नेट हाऊस लगाकर खीरे की खेती कर रहे हैं। खीरे की खेती से वह प्रति एकड़ सालाना करीब सात लाख कमा रहे हैं। कोरोना काल के दौरान सुरेंद्र सिंह ने अपना पूरा समय खेती को दिया। प्रगतिशील किसान सुरेंद्र अपने आसपास के क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। दूसरे किसान भी उनके खेत में आकर उनके तरीकों को देख रहे हैं। बागवानी और नेटहाऊस के लिए वह करीब पांच किमी दूर अपने ही खेत से पाईप लाईन के माध्यम से पानी लेकर आए।
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उल्लेखनीय है कि कोरोना काल के दौरान जब प्रत्येक इंसान कोरोना से बचाव में लगा था, उस समय गांव धनाना निवासी प्रगतिशील किसान सुरेंद्र अपना सारा समय खेत में दे रहा था। उसका पूरा ध्यान खेत पर केंद्रित रहा। परिणाम स्वरूप उन्होंने परंपरागत खेती छोड़ कर बागवानी शुरू की। उन्होंने छह एकड़ में नेट हाऊस लगाया और 11 एकड़ में बागवानी की। सर्दी के मौसम में प्रति एकड़ 300 क्विंटल खीरे की पैदावार ले रहे हैं। जबकि गर्मी के इस मौसम में वह प्रति एकड़ करीब 500 क्विंटल खीरा की पैदावार लेते हैं। इस तरह से किसान सुरेंद्र के अनुसार खीरे की खेती से वह सालाना प्रति एक एकड़ से करीब सात लाख रुपये कमा रहा है। वह खीरे की बिक्री भिवानी मंडी के अलावा रोहतक व हांसी मंडी में बिक्री करते हैं।
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बाग में लगाए रंग-बिरंगे तरबूज -
किसान सुरेंद्र ने पिछले तीन साल से अपने खेत में 11 एकड़ में बागवानी की है, इसमें उसने अमरूद, कीन्नू, बेरी आदि लगाए हैं। इसके साथ-साथ खेत में बादाम, सेब, चीकू और आडू के पौधे लगाए हैं। जब तक इन पौधों पर फल लगने शुरु होंगे, खर्च निकालने के लिए सुरेंद्र हर साल रंग-बिरंगे तरबूज की खेती करते हैं। सुरेंद्र ने बताया कि सिंचाई के लिए उन्होंने अपने खेत से पाइप लाइन के माध्यम से पानी की व्यवस्था की है जो कि करीब पांच किमी दूरी से ली है। यहां पर उन्होंने 100 बाई 100 फीट के दो टैंक बनाए हैं। वे पूरी खेती सोलर सिस्टम के माध्यम से करते हैं।
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समय-समय पर लेते हैं बागवानी विभाग के अधिकारियों की सलाह -
सुरेंद्र ने बताया कि बागवानी को अपनाने से पहले भी उन्होंने बागवानी के अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने बागवानी शुरु की और निरंतर बागवानी अधिकारियों के संपर्क में रहते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि मंत्री जेपी दलाल भी उनके खेत का दौरा कर चुके हैं। वे अपने ताऊ के लड़के सतीश के साथ मिलकर खेती कर रहे हैं। सतीश पूरा खेत संभाल रहा है।
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