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Bhiwani News: सुंदर ब्रांच नहर ने किसानों के अरमानों पर फेरा पानी
Tue, 10 Dec 2024 12:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 10 Dec 2024 12:57 PM IST
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सुंदर ब्रांच नहर।
बवानीखेड़ा। क्षेत्र की एक मात्र किसानों की जीवन रेखा कहे जाने वाली सुंदर ब्रांच नहर ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। किसानों को पूरा पानी मिलने की उम्मीदें धरी की धरी रह गई।
दरअसल, सुंदर ब्रांच नहर में गांव मुंढाल से शुरू होकर तालू, भैणी, कुंगड़, सिवाड़ा, पुर, खेड़ी, सिवाड़ा, अलकपुरा, बवानीखेड़ा, सुमरा खेडा, बलियाली, जमालपुर, सीपर व गांव रतेरा तक पहुंचती है। जिससे दर्जनों गांवों के किसानों की भूमि की प्यास बुझती है। इस नहर में शुरू में एक महीने में एक सप्ताह तक पूरा पानी आता था, लेकिन जब राज्य के मुख्यमंत्री बंसीलाल बने तब मुंढाल क्षेत्र व बवानीखेड़ा तक के किसान चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री से मिले तथा नहर के किनारे अपने खेतों में जमीनी स्तर का पानी ऊपर आने की शिकायत की तथा नहर का पानी कम करने की मांग की।
उनकी समस्या सुनकर मुख्यमंत्री बंसीलाल ने इन्हें दोबारा समझाया कि एक बार पानी काटने के बाद दोबारा सर्दियों तक नहीं मिल सकेगा, लेकिन किसान अपनी जिद पर अड़े रहे। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री बंसीलाल ने सुंदर नहर का पानी 30 दिन के बजाय 42 दिन में कर दिया। जिससे लोगों को पानी की समस्या होने लगी। वहीं कुंगड़ निवासी जय हिंद, जयवीर, महावीर, राजेश, चंद्र शेखर, निहाल सिंह, अजीत गोयत रतेरा निवासी, अशोक बिट्टू, सुरेंद्र ने बताया कि सुंदर नहर में पानी मोहल्ला हेड से 4 तारीख को आया था। लेकिन 7 तारीख शनिवार रात्रि को बंद हो गया। जिसके चलते उनके गांव में बने पीने के पानी के लिए जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के दर्जनों गांव के टैंकों में पानी लगभग 30 से 40 फीसदी ही जमा हो पाया है। साथ ही, किसानों के सामने भी सिंचाई के लिए संकट पैदा हो गया। किसानों ने बताया कि उनके परिवार का पालन-पोषण करने के लिए एकमात्र सहारा कृषि ही है, लेकिन इसमें भी संकट के बादल छा गए।
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सुंदर नहर में पानी कम चलने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि पानी कम चलने के कारण उनके खेतों में सिंचाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। जिससे किसान समय पर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें।
- महेंद्र सिंह, किसान।
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दरअसल, सुंदर ब्रांच नहर में गांव मुंढाल से शुरू होकर तालू, भैणी, कुंगड़, सिवाड़ा, पुर, खेड़ी, सिवाड़ा, अलकपुरा, बवानीखेड़ा, सुमरा खेडा, बलियाली, जमालपुर, सीपर व गांव रतेरा तक पहुंचती है। जिससे दर्जनों गांवों के किसानों की भूमि की प्यास बुझती है। इस नहर में शुरू में एक महीने में एक सप्ताह तक पूरा पानी आता था, लेकिन जब राज्य के मुख्यमंत्री बंसीलाल बने तब मुंढाल क्षेत्र व बवानीखेड़ा तक के किसान चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री से मिले तथा नहर के किनारे अपने खेतों में जमीनी स्तर का पानी ऊपर आने की शिकायत की तथा नहर का पानी कम करने की मांग की।
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उनकी समस्या सुनकर मुख्यमंत्री बंसीलाल ने इन्हें दोबारा समझाया कि एक बार पानी काटने के बाद दोबारा सर्दियों तक नहीं मिल सकेगा, लेकिन किसान अपनी जिद पर अड़े रहे। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री बंसीलाल ने सुंदर नहर का पानी 30 दिन के बजाय 42 दिन में कर दिया। जिससे लोगों को पानी की समस्या होने लगी। वहीं कुंगड़ निवासी जय हिंद, जयवीर, महावीर, राजेश, चंद्र शेखर, निहाल सिंह, अजीत गोयत रतेरा निवासी, अशोक बिट्टू, सुरेंद्र ने बताया कि सुंदर नहर में पानी मोहल्ला हेड से 4 तारीख को आया था। लेकिन 7 तारीख शनिवार रात्रि को बंद हो गया। जिसके चलते उनके गांव में बने पीने के पानी के लिए जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के दर्जनों गांव के टैंकों में पानी लगभग 30 से 40 फीसदी ही जमा हो पाया है। साथ ही, किसानों के सामने भी सिंचाई के लिए संकट पैदा हो गया। किसानों ने बताया कि उनके परिवार का पालन-पोषण करने के लिए एकमात्र सहारा कृषि ही है, लेकिन इसमें भी संकट के बादल छा गए।
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सुंदर नहर में पानी कम चलने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि पानी कम चलने के कारण उनके खेतों में सिंचाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। जिससे किसान समय पर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें।
- महेंद्र सिंह, किसान।