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Bhiwani News: दिवाली पर बनेगा सदियों बाद कुछ खास योग
Fri, 10 Nov 2023 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 10 Nov 2023 11:42 PM IST
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तोशाम।
दीपों का त्योहार दिवाली इस बार रविवार 12 नवंबर को मनाया जाएगा। इस बार की दिवाली पर सदियों बाद कुछ खास योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार की दिवाली काफी खास रहने वाली है। दिवाली के दिन अमावस्या दोपहर 2.44 बजे बाद से शुरू होगी। शाम को लक्ष्मी पूजा के वक्त पांच राजयोग रहेंगे। इसके साथ ही आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग भी बनेंगे कुल मिलाकर इस दिवाली पर आठ शुभ योग होंगे, जिनमें ये त्योहार मनाया जाएगा।
पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि दिवाली पर ऐसा शुभ योग बन रहा है जैसा पिछले 700 सालों में नहीं बना होगा। इतने शुभ संयोग बनने से यह सुख-समृद्धि देने वाला होगा। दिवाली पर बन रही ग्रह स्थिति देश की तरक्की के लिए शुभ संकेत दे रही है। दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से नया साल शुरू होता है। काफी जगह व्यापारियों में पुष्य नक्षत्र और धनतेरस से नए बही खाते कारोबारी नया साल शुरू करने की परंपरा भी रही है। दिवाली से ही जैन समाज का महावीर निर्वाण संवत भी शुरू होता है।
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि गजकेसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नाम के 5 राजयोग इस बार की दिवाली पर बन रहे हैं। जो शुक्र, बुध, चंद्रमा और गुरु की स्थिति से बनेंगे। ज्योतिष में गजकेसरी योग को सम्मान और लाभ देने वाला माना जाता है। हर्ष योग धन लाभ, संपत्ति और प्रतिष्ठा बढ़ाता है। काहल योग स्थिरता और सफलता देता है। इसके साथ ही उभयचरी योग से आर्थिक संपन्नता बढ़ती है। दुर्धरा योग शांति और शुभता बढ़ाता है।
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दोपहर 2.44 बजे बाद अमावस्या और सोमवार को सोमवती
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि दिवाली के दिन 12 तारीख को सुबह रूप चौदस रहेगी। दोपहर 2.44 बजे बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। लक्ष्मी पूजन अमावस्या की रात में ही होता है। इस कारण दीपावली की पूजा 12 को ही होगी। पूजा के ज्यादातर मुहूर्त दोपहर 02:44 बजे से ही रहेंगे। अमावस्या सोमवार को दोपहर 3 बजे तक रहेगी। इसलिए अगले दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या भी मनाई जाएगी। श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि कार्तिक महीने की अमावस्या रविवार और सोमवार दोनों ही दिन रहेगी। लेकिन दीपावली 12 तारीख को ही मनाई जाएगी। रविवार की रात में अमावस्या होने से लक्ष्मी पूजन इसी तारीख को किया जाएगा। सोमवार को अमावस्या दिन में ही खत्म हो जाएगी। इसलिए दिवाली को रविवार यानी 12 तारीख को ही मनाई जाएगी। शास्त्रों में इस बात का जिक्र है कि जिस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के वक्त अमावस्या होती है तब लक्ष्मी पूजन किया जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए ज्योतिषियों का कहना है कि इस बार दीपावली 12 नवंबर को ही मनाई जाएगी।
लक्ष्मी पूजन का समय
दिन में शुभ मुहूर्त दोपहर 02:44 से 02:52 तक
शाम को 5:34 से रात्रि 10:31 तक शुभ अमृत चर का चौघड़िया
वृषभ लग्न शाम 5:44 से 7:39 तक रहेगा
निशिता मुहूर्त रात्रि 11:44 से 12:37
सिंह लग्न रात्रि 12:15 से 02:32 तक रहेगा
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दीपों का त्योहार दिवाली इस बार रविवार 12 नवंबर को मनाया जाएगा। इस बार की दिवाली पर सदियों बाद कुछ खास योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार की दिवाली काफी खास रहने वाली है। दिवाली के दिन अमावस्या दोपहर 2.44 बजे बाद से शुरू होगी। शाम को लक्ष्मी पूजा के वक्त पांच राजयोग रहेंगे। इसके साथ ही आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग भी बनेंगे कुल मिलाकर इस दिवाली पर आठ शुभ योग होंगे, जिनमें ये त्योहार मनाया जाएगा।
पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि दिवाली पर ऐसा शुभ योग बन रहा है जैसा पिछले 700 सालों में नहीं बना होगा। इतने शुभ संयोग बनने से यह सुख-समृद्धि देने वाला होगा। दिवाली पर बन रही ग्रह स्थिति देश की तरक्की के लिए शुभ संकेत दे रही है। दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से नया साल शुरू होता है। काफी जगह व्यापारियों में पुष्य नक्षत्र और धनतेरस से नए बही खाते कारोबारी नया साल शुरू करने की परंपरा भी रही है। दिवाली से ही जैन समाज का महावीर निर्वाण संवत भी शुरू होता है।
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श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि गजकेसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नाम के 5 राजयोग इस बार की दिवाली पर बन रहे हैं। जो शुक्र, बुध, चंद्रमा और गुरु की स्थिति से बनेंगे। ज्योतिष में गजकेसरी योग को सम्मान और लाभ देने वाला माना जाता है। हर्ष योग धन लाभ, संपत्ति और प्रतिष्ठा बढ़ाता है। काहल योग स्थिरता और सफलता देता है। इसके साथ ही उभयचरी योग से आर्थिक संपन्नता बढ़ती है। दुर्धरा योग शांति और शुभता बढ़ाता है।
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दोपहर 2.44 बजे बाद अमावस्या और सोमवार को सोमवती
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि दिवाली के दिन 12 तारीख को सुबह रूप चौदस रहेगी। दोपहर 2.44 बजे बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। लक्ष्मी पूजन अमावस्या की रात में ही होता है। इस कारण दीपावली की पूजा 12 को ही होगी। पूजा के ज्यादातर मुहूर्त दोपहर 02:44 बजे से ही रहेंगे। अमावस्या सोमवार को दोपहर 3 बजे तक रहेगी। इसलिए अगले दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या भी मनाई जाएगी। श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि कार्तिक महीने की अमावस्या रविवार और सोमवार दोनों ही दिन रहेगी। लेकिन दीपावली 12 तारीख को ही मनाई जाएगी। रविवार की रात में अमावस्या होने से लक्ष्मी पूजन इसी तारीख को किया जाएगा। सोमवार को अमावस्या दिन में ही खत्म हो जाएगी। इसलिए दिवाली को रविवार यानी 12 तारीख को ही मनाई जाएगी। शास्त्रों में इस बात का जिक्र है कि जिस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के वक्त अमावस्या होती है तब लक्ष्मी पूजन किया जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए ज्योतिषियों का कहना है कि इस बार दीपावली 12 नवंबर को ही मनाई जाएगी।
लक्ष्मी पूजन का समय
दिन में शुभ मुहूर्त दोपहर 02:44 से 02:52 तक
शाम को 5:34 से रात्रि 10:31 तक शुभ अमृत चर का चौघड़िया
वृषभ लग्न शाम 5:44 से 7:39 तक रहेगा
निशिता मुहूर्त रात्रि 11:44 से 12:37
सिंह लग्न रात्रि 12:15 से 02:32 तक रहेगा