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संकट में नौनिहाल : नौसिखियों के हाथों में स्कूल वाहनों की स्टीयरिंग
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गांव ललहाना के पास स्कूल व रोडवेज बस की हुई आमने सामने की भिंड़त। संवाद
- फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
भिवानी। नौसिखियों के हाथों में स्कूल वाहनों का स्टीयरिंग आने से नौनिहालों की जान पर भी संकट आ गया है। ज्यादातर निजी स्कूल वाहनों पर अनुभवी चालक नहीं हैं, इसी का खामियाजा बच्चों और उनके अभिभावकों को भी भुगतना पड़ता है।
हर साल सर्दी में गहराई धूंध में ऐसे हादसे होते हैं। मंगलवार को स्कूल बस और रोडवेज बस की टक्कर में पांच विद्यार्थियों सहित 28 लोग घायल हुए। पिछले साल भी एक स्कूल बस टैंकर से टकरा गई थी। उस हादसे में दर्जनों बच्चे गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। निजी स्कूल वाहनों की पड़ताल सामने आया कि निजी स्कूल वाहन सड़क पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो इनमें निर्धारित मानक तक पूरे नहीं हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि आरटीए कार्यालय से स्कूलों में जाकर वाहनों के मानकों की जांच तक नहीं की जा रही है। स्कूल प्रबंधनों का भी ऐसे मामलों में लापरवाह होना किसी बड़े खतरे की आशंका से कम नहीं है।
कमर्शियल व माल ढुलाई वाहनों के मुकाबले स्कूली वाहनों के लिए अलग से मानक तय किए हुए हैं। ये मानक इतने सख्त और पेचीदा हैं कि इन्हें पूरा करने में स्कूल प्रबंधन भी थक रहे हैं। हालांकि ये उच्च सुरक्षा के मानक इसलिए भी तय किए गए हैं, ताकि स्कूली वाहनों में सफर करने वाले बच्चों की जिंदगी सुरक्षित रह सके। मगर हो रहा इसके उलट है। ग्रामीण व शहरी दायरे के अधिकतर निजी स्कूलों के पास खुद के वाहन हैं, लेकिन इन वाहनों पर मामूली वेतन में नौसिखिये चालक ही लगाए हुए हैं, जबकि स्कूल वाहन को चलाने के लिए काफी वर्षों का अच्छा खासा अनुभव होना बहुत जरूरी है। इसी के साथ हर साल चालक फिटनेस का सर्टिफिकेट भी अनिवार्य है। मगर ये मानक सिर्फ दिखावे के लिए वाहन पासिंग के दौरान दिखते हैं, इसके बाद इन वाहनों से भी उपकरण हटा लिए जाते हैं।
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ये हैं मापदंड
स्कूल वाहन में सीसीटीवी कैमरा, महिला अटेंडेंट, चालक व परिचालक का वर्दी में होना, जीपीएस, स्पीड गर्वनर, वाहन पर सभी लाइटें दुरुस्त होना व रिफ्लेक्टर होना, इंडीगेटर प्रोपर काम करना, खिड़कियों पर जालियां या फिर रेलिंग होना। चालक का सीट बेल्ट इस्तेमाल करना, स्कूली वाहन का रंग पीला होना, इमरजेंसी नंबरों का अंकित होना सहित कई ऐसे अहम मापदंड तय किए हुए हैं, जिनमें सभी मानकों का पूरा होना जरूरी है। किसी भी स्कूल वाहन को पासिंग के दौरान इन सभी मानकों को पूरा करना भी अनिवार्य है।
सीसीटीवी कैमरे गायब, ऑटो में सफर कर रहा बचपन
स्कूली वाहनों में सीसीटीवी और स्पीड गर्वनर तक गायब हैं, जबकि कई स्कूलों में तो बच्चे ऑटो रिक्शा से स्कूल पहुंच रहे हैं। इन ऑटो में सुरक्षा मानक तो दूर ठीक से बैठने के लिए भी जगह नहीं होती। मगर ट्रैफिक पुलिस भी ऐसे वाहनों पर शिकंजा नहीं कस रही है। अभिभावक भी ऐसे वाहनों में बच्चों को सफर नहीं कराने के लिए जागरूक नहीं हैं, एक मजबूरी यह भी है कि कई जगहों पर स्कूल वाहन नहीं जाता तो मजबूरी में भी ऑटो ही सहारा है।
परमिट से अधिक बैठाते हैं बच्चे
नियम के अनुसार अगर परमिट होने के बाद भी वाहन में तय सीमा से अधिक बच्चे बैठाए गए हैं तो इस पर कार्रवाई हो सकती है। स्कूली वाहनों में बच्चों के बैठाने का भी कोई पैमाना नहीं है, क्योंकि स्कूल लाने के लिए बच्चों को एक ही वाहन में ढूंसकर भरा जाता है, जिस वजह से भी हादसे की सूरत में बच्चों की जान पर सबसे अधिक खतरा होता है। (संवाद)
रोडवेज से प्रशिक्षण अनिवार्य
स्कूली वाहनों के चालकों का रोडवेज से रिफ्रेशर प्रशिक्षण हरसाल कराना अनिवार्य किया हुआ है। इसके अलावा मेरी टीम भी निजी विद्यालयों में पहुंचकर स्कूली वाहनों के मानकों की जांच करेगी। लापरवाही से ऐसे हादसे दर्दनाक हो सकते हैं। सभी स्कूलों से वाहनों के परमिट के साथ साथ मानक भी पूरे रखने और अनुभवी चालकों को ही वाहन चलाने देने के निर्देश दिए गए हैं।
-अंग्रेज सिंह, सचिव, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय भिवानी।
मंगलवार को हुए हादसे में घायल यात्रियों की पीड़ा
मैं बस की पीछे की सीट पर बैठा हुआ था। दुर्घटना के समय मेरे माथे पर चोटें आई हैं। कुछ देर के बाद मैं बेहोश हो गया था। मुझे उपचार के लिए नागरिक अस्पताल लाया गया तो यहां होश आया।
-रफीक, रोडवेज बस में सवार यात्री
मैं सीबीएलयू की छात्रा हूं। पढ़ाई के लिए सीबीएलयू जा रही थी। तभी हमारी बस का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें मैं घायल हो गई। मेरे परिजनों को इसकी सूचना दी गई है।
-सोनिका, रोडवेज बस में सवार छात्रा।
हम स्कूूल में जा रहे थे। धुंध के कारण हमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मुझे नहीं मालूम कैसे यह दुर्घटना घटी। इसमें मुझे सिर में काफी गहरी चोट पहुंची है, मेरा इलाज चल रहा है।
-ललित, स्कूल स्टाफ वैन में सवार अध्यापक।
मैं कॉलेज में जा रही थी। तभी अचानक से बस का एक्सीडेंट हो गया। जिसमें मैं घायल हो गई। मैं अब कॉलेज नहीं जा पाऊंगी, जबकि मेरे परिजन भी यहां पहुंचने वाले हैं।
-गीता, रोडवेज बस में सवार छात्रा।
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भिवानी। नौसिखियों के हाथों में स्कूल वाहनों का स्टीयरिंग आने से नौनिहालों की जान पर भी संकट आ गया है। ज्यादातर निजी स्कूल वाहनों पर अनुभवी चालक नहीं हैं, इसी का खामियाजा बच्चों और उनके अभिभावकों को भी भुगतना पड़ता है।
हर साल सर्दी में गहराई धूंध में ऐसे हादसे होते हैं। मंगलवार को स्कूल बस और रोडवेज बस की टक्कर में पांच विद्यार्थियों सहित 28 लोग घायल हुए। पिछले साल भी एक स्कूल बस टैंकर से टकरा गई थी। उस हादसे में दर्जनों बच्चे गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। निजी स्कूल वाहनों की पड़ताल सामने आया कि निजी स्कूल वाहन सड़क पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो इनमें निर्धारित मानक तक पूरे नहीं हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि आरटीए कार्यालय से स्कूलों में जाकर वाहनों के मानकों की जांच तक नहीं की जा रही है। स्कूल प्रबंधनों का भी ऐसे मामलों में लापरवाह होना किसी बड़े खतरे की आशंका से कम नहीं है।
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कमर्शियल व माल ढुलाई वाहनों के मुकाबले स्कूली वाहनों के लिए अलग से मानक तय किए हुए हैं। ये मानक इतने सख्त और पेचीदा हैं कि इन्हें पूरा करने में स्कूल प्रबंधन भी थक रहे हैं। हालांकि ये उच्च सुरक्षा के मानक इसलिए भी तय किए गए हैं, ताकि स्कूली वाहनों में सफर करने वाले बच्चों की जिंदगी सुरक्षित रह सके। मगर हो रहा इसके उलट है। ग्रामीण व शहरी दायरे के अधिकतर निजी स्कूलों के पास खुद के वाहन हैं, लेकिन इन वाहनों पर मामूली वेतन में नौसिखिये चालक ही लगाए हुए हैं, जबकि स्कूल वाहन को चलाने के लिए काफी वर्षों का अच्छा खासा अनुभव होना बहुत जरूरी है। इसी के साथ हर साल चालक फिटनेस का सर्टिफिकेट भी अनिवार्य है। मगर ये मानक सिर्फ दिखावे के लिए वाहन पासिंग के दौरान दिखते हैं, इसके बाद इन वाहनों से भी उपकरण हटा लिए जाते हैं।
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ये हैं मापदंड
स्कूल वाहन में सीसीटीवी कैमरा, महिला अटेंडेंट, चालक व परिचालक का वर्दी में होना, जीपीएस, स्पीड गर्वनर, वाहन पर सभी लाइटें दुरुस्त होना व रिफ्लेक्टर होना, इंडीगेटर प्रोपर काम करना, खिड़कियों पर जालियां या फिर रेलिंग होना। चालक का सीट बेल्ट इस्तेमाल करना, स्कूली वाहन का रंग पीला होना, इमरजेंसी नंबरों का अंकित होना सहित कई ऐसे अहम मापदंड तय किए हुए हैं, जिनमें सभी मानकों का पूरा होना जरूरी है। किसी भी स्कूल वाहन को पासिंग के दौरान इन सभी मानकों को पूरा करना भी अनिवार्य है।
सीसीटीवी कैमरे गायब, ऑटो में सफर कर रहा बचपन
स्कूली वाहनों में सीसीटीवी और स्पीड गर्वनर तक गायब हैं, जबकि कई स्कूलों में तो बच्चे ऑटो रिक्शा से स्कूल पहुंच रहे हैं। इन ऑटो में सुरक्षा मानक तो दूर ठीक से बैठने के लिए भी जगह नहीं होती। मगर ट्रैफिक पुलिस भी ऐसे वाहनों पर शिकंजा नहीं कस रही है। अभिभावक भी ऐसे वाहनों में बच्चों को सफर नहीं कराने के लिए जागरूक नहीं हैं, एक मजबूरी यह भी है कि कई जगहों पर स्कूल वाहन नहीं जाता तो मजबूरी में भी ऑटो ही सहारा है।
परमिट से अधिक बैठाते हैं बच्चे
नियम के अनुसार अगर परमिट होने के बाद भी वाहन में तय सीमा से अधिक बच्चे बैठाए गए हैं तो इस पर कार्रवाई हो सकती है। स्कूली वाहनों में बच्चों के बैठाने का भी कोई पैमाना नहीं है, क्योंकि स्कूल लाने के लिए बच्चों को एक ही वाहन में ढूंसकर भरा जाता है, जिस वजह से भी हादसे की सूरत में बच्चों की जान पर सबसे अधिक खतरा होता है। (संवाद)
रोडवेज से प्रशिक्षण अनिवार्य
स्कूली वाहनों के चालकों का रोडवेज से रिफ्रेशर प्रशिक्षण हरसाल कराना अनिवार्य किया हुआ है। इसके अलावा मेरी टीम भी निजी विद्यालयों में पहुंचकर स्कूली वाहनों के मानकों की जांच करेगी। लापरवाही से ऐसे हादसे दर्दनाक हो सकते हैं। सभी स्कूलों से वाहनों के परमिट के साथ साथ मानक भी पूरे रखने और अनुभवी चालकों को ही वाहन चलाने देने के निर्देश दिए गए हैं।
-अंग्रेज सिंह, सचिव, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय भिवानी।
मंगलवार को हुए हादसे में घायल यात्रियों की पीड़ा
मैं बस की पीछे की सीट पर बैठा हुआ था। दुर्घटना के समय मेरे माथे पर चोटें आई हैं। कुछ देर के बाद मैं बेहोश हो गया था। मुझे उपचार के लिए नागरिक अस्पताल लाया गया तो यहां होश आया।
-रफीक, रोडवेज बस में सवार यात्री
मैं सीबीएलयू की छात्रा हूं। पढ़ाई के लिए सीबीएलयू जा रही थी। तभी हमारी बस का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें मैं घायल हो गई। मेरे परिजनों को इसकी सूचना दी गई है।
-सोनिका, रोडवेज बस में सवार छात्रा।
हम स्कूूल में जा रहे थे। धुंध के कारण हमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मुझे नहीं मालूम कैसे यह दुर्घटना घटी। इसमें मुझे सिर में काफी गहरी चोट पहुंची है, मेरा इलाज चल रहा है।
-ललित, स्कूल स्टाफ वैन में सवार अध्यापक।
मैं कॉलेज में जा रही थी। तभी अचानक से बस का एक्सीडेंट हो गया। जिसमें मैं घायल हो गई। मैं अब कॉलेज नहीं जा पाऊंगी, जबकि मेरे परिजन भी यहां पहुंचने वाले हैं।
-गीता, रोडवेज बस में सवार छात्रा।