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दिल की नसें सकुड़ने से सर्दियों में बढ़ रहा ह्रदय घात का खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Nov 2022 11:33 PM IST
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Risk of heart attack increasing in winter due to narrowing of heart veins
भिवानी के नागरिक अस्पताल की ओपीडी में जुटी मरीजों की भीड़। संवाद - फोटो : Bhiwani
भिवानी। सर्दियों के सीजन में अक्सर दिल की नसें सकुड़ने के मामले सामने आते हैं, जिनमें हृदय घात का खतरा अधिक रहता है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में हृदय रोग से संबंधित रोजाना 50 से 70 मरीज उपचार करवाने के लिए आ रहे हैं। जबकि गर्मियों के सीजन में इनकी संख्या 30 से 40 के बीच रहती है। वहीं ओपीडी में जांच करवाने पहुंच रहे मरीजों में सिर्फ अधेड़ ही नहीं बल्कि युवा वर्ग भी शामिल है। औसतन 50 से 70 मरीजों में से 15 से 18 युवा शामिल है। इनमें किसी को नौकरी की चिंता तो किसी पर सोशल मीडिया की लत कारण सामने आए हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी के सीजन में गर्मियों की तुलना में हृदय घात का अधिक खतरा रहता है। सर्दी में दिल की नशे सकुड़ जाती है जिसके कारण खून का प्रवाह बंद हो जाता है और मरीज की मौत हो जाती है। जबकि गर्मियों में नसें सकुड़ने के मामले कम सामने आते हैं। गर्मियों में अटैक की बजाय लक्षणों वाले अधिक मरीज मिलते हैं।
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नागरिक अस्पताल के साथ निजी अस्पताल में पहुंच रहे मरीज
हृदय रोगों से संबंधित मरीज नागरिक अस्पताल की ओपीडी और आपातकालीन विभाग में जांच करवाने पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को उपचार के लिए नागरिक अस्पताल के वार्डों में भी दाखिल करने की व्यवस्था की। कोई गंभीर मरीज आता है तो उसे पीजीआईएमएस रोहतक रेफर कर दिया जाता है। वहीं शहर में हृदय रोग के पांच-छह अस्पताल है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मरीज सरकारी के साथ ही निजी अस्पताल में उपचार करवाने पहुंच रहे हैं।
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काम उम्र में हृदय घात के मुख्य कारण:
- दिनचर्या का अनियमित होना, न ही समय पर सोना और न ही समय पर उठना।
- फास्ट फूड और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों के अधिक सेवन।
- धूम्रपान की आदत और अन्य मादक पदार्थों का सेवन।
- काम से जुड़ा तनाव।
- मोबाइल व लैपटॉप का अधिक उपयोग।
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इन लक्षण में हो सकता है हृदय घात
नींद न आना, थोड़ा-सा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत, छाती में अधिक दर्द, बहुत ज्यादा थकान, दिल की अनियमित धड़कन, खाने के बाद छाती पर दबाव महसूस करना, पैरों में सूजन दिल की समस्याओं के लक्षण हो सकते हैं।
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40 वर्ष के बाद हर छह माह में करवाएं जांच
40 वर्ष के बाद सभी को प्रत्येक छह माह में स्वास्थ्य की जांच करवानी चाहिए। जांच में अगर कोई नेगेटिव रिपोर्ट आती है तो उसका विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार करवाएं। इसके अलावा 20 से 39 साल के बीच के लोगों को हर पांच साल में एक बार कार्डियक टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। जिन लोगों को अनुवांशिक रूप से हृदय रोग होने का खतरा अधिक हो उन्हें जांच थोड़े कम अंतराल यानी 2-3 साल के बीच करानी चाहिए।
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पूरी नींद लें, रोजाना करें व्यायाम
हृदय रोगों से बचने के लिए सही जीवनशैली को अपनाएं। पौष्टिक आहार का सेवन करें और फास्ट फूड से बचें। रोजाना शारीरिक अभ्यास करें, जिसमें दो से तीन घंटे व्यायाम करें। कम से कम छह से आठ घंटे की नींद से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन की मात्रा नियंत्रित रहती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। पर्याप्त एवं अच्छी नींद दिल के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी होती हैं।

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इन दिनों हृदय रोगों के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसमें युवा भी शामिल है। सर्दी के सीजन में हृदय घात के मामले बढ़ जाते है, क्योंकि सर्दी की वजह से दिल की नसें सकुड़ जाती है, जिसके कारण मरीज की मौत हो जाती है। ऐसे में सर्दी से बचाव रखें और सुबह-शाम के समय व्यायाम न करें। दोपहर के समय हल्के व्यायाम करें और पौष्टिक आहार का सेवन करें।
- डॉ. यतिन गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, नागरिक अस्पताल।
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