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ऐतिहासिक लाल कुएं का जीर्णोंद्घार का काम हुआ शुरू
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ऐतिहासिक लाल कुएं का जीर्णोंद्धार का काम हुआ शुरू
-कलायत के राजमिस्त्रियों ने किया था कुएं का निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
बवानीखेड़ा। गांव कुंगड़ की निवर्तमान ग्राम पंचायत ने इन दिनों गांव स्थित ऐतिहासिक लाल कुए का जीर्णोंद्धार एवं सौंदर्यकरण का कार्य शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक यह कुआं गांव बसने से पहले का है। हालांकि कुएं को भव्य स्वरूप वर्ष 1953 में दिया गया था।
कलायत के राजमिस्त्रियों ने इसका निर्माण किया। लाल कुआं की इमारत समय की मार को झेलते हुए धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही थी। अब निवर्तमान ग्राम पंचायत ने इससे ऐतिहासिक कुएं की इमारत की मरम्मत के साथ-साथ इसके सौंदर्यकरण को बढ़ावा देने के लिए कार्य करना आरंभ कर दिया है। फिलहाल सौंदर्यकरण का कार्य अंतिम चरण में है।
यह कुआं गांव के चंदेरा चौक के सामने स्थित है। चंदेरा चौक को भी ग्रामीणों के सहयोग से पक्का बनाया गया है। इसके चलते लाल कुआं गांव के सौंदर्यकरण को बढ़ाने में काफी सहायक माना जाता है। इस कुएं को धरातल से कई फुट ऊंचा बनाया गया है। लाल कुएं का सौंदर्यकरण के लिए दो छतरियों का निर्माण किया हुआ है। इसके साथ-साथ पिछले हिस्सों में दो कमरों का निर्माण भी किया हुआ है। साथ में भगवान शिव का मंदिर भी स्थापित है। प्रवेश द्वार पर भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा भी स्थापित है। छतरियों के अंदर हमारी संस्कृति से ओतप्रोत एवं इतिहास के बारे में जानकारी देने के लिए दीवार पर शानदार चित्र बनाए हुए हैं। इतना ही नहीं गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का मुख्यद्वार भी काफी वर्ष पुराना एवं मनमोहक बनाया गया है।
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स्कूल के मुख्यद्वार के रख-रखाव एवं जीर्णोंद्धार के लिए भी निवर्तमान ग्राम पंचायत ने कार्य आरंभ कर दिया है। सबसे पहले मुख्यद्वार को जैक के सहारे ऊंचा उठाया गया है। फिलहाल मरम्मत एवं रंगरोगन का कार्य जारी है। निवर्तमान सरपंच सतेंद्र गोयत ने बताया कि लाल कुआं व स्कूल के मुख्यद्वार का निर्माण काफी वर्षों पहले हुआ था। अब इन ग्राम पंचायत की सहायता से जीर्णोंद्धार एवं सौंदर्यकरण का कार्य आरंभ कर दिया गया है ताकि आने वाली पीढ़ी भी इस कला से रूबरू हो सके। संवाद
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-कलायत के राजमिस्त्रियों ने किया था कुएं का निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
बवानीखेड़ा। गांव कुंगड़ की निवर्तमान ग्राम पंचायत ने इन दिनों गांव स्थित ऐतिहासिक लाल कुए का जीर्णोंद्धार एवं सौंदर्यकरण का कार्य शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक यह कुआं गांव बसने से पहले का है। हालांकि कुएं को भव्य स्वरूप वर्ष 1953 में दिया गया था।
कलायत के राजमिस्त्रियों ने इसका निर्माण किया। लाल कुआं की इमारत समय की मार को झेलते हुए धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही थी। अब निवर्तमान ग्राम पंचायत ने इससे ऐतिहासिक कुएं की इमारत की मरम्मत के साथ-साथ इसके सौंदर्यकरण को बढ़ावा देने के लिए कार्य करना आरंभ कर दिया है। फिलहाल सौंदर्यकरण का कार्य अंतिम चरण में है।
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यह कुआं गांव के चंदेरा चौक के सामने स्थित है। चंदेरा चौक को भी ग्रामीणों के सहयोग से पक्का बनाया गया है। इसके चलते लाल कुआं गांव के सौंदर्यकरण को बढ़ाने में काफी सहायक माना जाता है। इस कुएं को धरातल से कई फुट ऊंचा बनाया गया है। लाल कुएं का सौंदर्यकरण के लिए दो छतरियों का निर्माण किया हुआ है। इसके साथ-साथ पिछले हिस्सों में दो कमरों का निर्माण भी किया हुआ है। साथ में भगवान शिव का मंदिर भी स्थापित है। प्रवेश द्वार पर भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा भी स्थापित है। छतरियों के अंदर हमारी संस्कृति से ओतप्रोत एवं इतिहास के बारे में जानकारी देने के लिए दीवार पर शानदार चित्र बनाए हुए हैं। इतना ही नहीं गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का मुख्यद्वार भी काफी वर्ष पुराना एवं मनमोहक बनाया गया है।
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स्कूल के मुख्यद्वार के रख-रखाव एवं जीर्णोंद्धार के लिए भी निवर्तमान ग्राम पंचायत ने कार्य आरंभ कर दिया है। सबसे पहले मुख्यद्वार को जैक के सहारे ऊंचा उठाया गया है। फिलहाल मरम्मत एवं रंगरोगन का कार्य जारी है। निवर्तमान सरपंच सतेंद्र गोयत ने बताया कि लाल कुआं व स्कूल के मुख्यद्वार का निर्माण काफी वर्षों पहले हुआ था। अब इन ग्राम पंचायत की सहायता से जीर्णोंद्धार एवं सौंदर्यकरण का कार्य आरंभ कर दिया गया है ताकि आने वाली पीढ़ी भी इस कला से रूबरू हो सके। संवाद