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महिलाओं के लिए सबसे कठिन दौर, खोखले है बेटी बचाओ और पढ़ाओ के नारे: सुभाषिणी अली

Sun, 01 Sep 2019 01:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2019 01:15 AM IST
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politcele - फोटो : Bhiwani
महिला आंदोलन की नजर से वर्तमान दौर सबसे कठिन दौर है। महिलाओं के अधिकारों पर कुठाराघात किए जा रहे है। सरकार का बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ का नारा खोखला साबित हो रहा है। हरियाणा के कई गांव में आज भी लड़का-लड़की का अनुपात 350-400 प्रति हजार लड़कों पर है। धर्म के नाम पर महिलाओं को अंधविश्वास की तरफ धकेला जा रहा हैं। यह कहना है जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद सुभाषिणी अली का।
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सिंघानिया धर्मशाला में जनवादी महिला समिति के 10वें राज्यस्तरीय सम्मेलन के खुले सत्र को संबोधित करते हुए शनिवार को उन्होंने ये विचार व्यक्त किए। सम्मेलन की शुरूआत ढोलक की थाप और संगठन के ध्वजारोहण के साथ हुई। राज्य अध्यक्षा शकुंतला जाखड़ ने झंडा फहराया और शहीदों को याद किया। जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय महासचिव मरियम ढवले ने कहा कि मौजूदा सरकार धर्म और जात के नाम पर देश का रूप बदलने का प्रयास कर रही है। औरतों को रोजगार मिल नहीं रहा है, जो रोजगार है उन्हें समाप्त किया जा रहा है। हालात यह हैं कि कुपोषण व भूखमरी के कारण मौतें बढ़ रही है।
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डॉ चंचल धीर ने सभी का स्वागत किया। कवयित्री और जनवादी महिला समिति की संरक्षक शुभा ने कहा कि डॉ. भीम राव आंबेडकर ने सबको समानता का अधिकार देने के लिए संविधान की रचना की थी। मौजूदा सरकार संविधान का रूप बिगाड़ते हुए महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का छीन रही है। धारा 370 हटाने के बाद बीजेपी के चुने हुए नेेताओं और मुख्यमंत्री का जिस प्रकार से ब्यान आया वो शर्मनाक है, इनके लिए महिलाएं केवल वस्तु की तरह है। हम इसका विरोध करते है। इसके इलावा सार्वजनिक संपतियो को सरकार द्वारा लगातार बेचा जा रहा है और देश की अर्थव्यवस्था तहस नहस की जा रही है।
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जनवादी महिला समिति ऐसी महिला और समाज विरोधी नीतियों का विरोध करती है। आसाराम बलात्कार केस में गवाही देने वाले महेंद्र चावला ने भी अपनी बात रखी। सबने उनके संघर्ष को सराहा। इस अवसर पर जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव सविता, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव जगमती सांगवान, राज्य कोषाध्यक्ष राजकुमारी दहिया, उपाध्यक्ष उषा, सहसचिव अंजू, डॉ अनन्त कौर, शेर सिंह, जगरोशन, वजीर, शीला, बिमला, सुखदेव, सज्जन कुमार, रतन जिंदल, ओमप्रकाश, राममेहर आदि मौजूद रहे।
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