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जहरीली हुईं सांसें, एक्यूआई 200 पार
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कचरे में आग लगाने के कारण उड़ता धुआं। संवाद
- फोटो : Bhiwani
नवनीत शर्मा
भिवानी। शहर की हवा लगातार खराब होती जा रही है। इसकी वजह से जीवजंतु से लेकर इंसानों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण से त्वचा, सांस और आंखों से संबंधित मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। पिछले महज 11 दिन में शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 62 से 205 पहुंच गया है। शनिवार को भिवानी का एक्यूआई 205 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए खराब है।
दशहरे पर की गई आतिशबाजी के कारण भी प्रदूषण बढ़ा है, जिसके कारण सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। लॉकडाउन के दौरान पर्यावरण में सकारात्मक परिवर्तन हुए थे। उस दौरान सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट सुनने को मिल रही थी। अब फिर से शहर की हवा खराब हो रही है।
350 से अधिक फैक्टरियां उगल रहीं धुआं
शहर के औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 350 फैक्टरियां हैं। इनमें प्लास्टिक, स्टील, लोहे सहित अन्य वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। लॉकडाउन के दौरान ये औद्योगिक इकाइयां बंद थीं। मगर अब इनमें कार्य फिर से शुरू हो गया है। फैक्टरियां शुरू होने से मशीनों से निकलने वाला धुआं भी फिर से शुरू हो गया है। जिसका नुकसान पर्यावरण को सीधे तौर पर हो रहा है। कोरोना काल में ईंट-भट्टों पर भी रोक लगाई गई थी, मगर अब ईंट-भट्टे भी फिर से शुरू हो गए है। जिले में करीब 1200 से 1400 ईंट-भट्टे हैं।
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पांच हजार से अधिक वाहनों का रोजाना आवागमन
शहर की सड़कों पर आम दिनों में रोजाना करीब पांच हजार वाहनों का आवागमन रहता है। लॉकडाउन के दौरान तो इन वाहनों की संख्या में 80 फीसदी तक गिरावट आई थी, मगर अब फिर से बाजार खुले होने के कारण वाहनों का आवागमन अधिक हो गया है। वाहनों से निकलने वाला धुआं शहर की हवा को दूषित कर रहा है।
11 दिनों में ऐसे बढ़ा शहर का एक्यूआई
दिनांक एक्यूआई
06 अक्तूबर 62
07 अक्तूबर 77
08 अक्तूबर 138
09 अक्तूबर 122
10 अक्तूबर 103
11 अक्तूबर 106
12 अक्तूबर 104
13 अक्तूबर 144
14 अक्तूबर 164
15 अक्तूबर 157
16 अक्तूबर 205
खेत में पराली जलाने से परहेज करें
पेट्रोल, डीजल, कोयला और प्लास्टिक के प्रयोग से बचें, ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो। किसान अपने खेत में पराली जलाने से परहेज करें। साथ ही जिन जगहों पर धूल उड़ती है, वहां पर पानी का छिड़काव करें। पर्यावरण संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है। सभी नागरिक हर साल कम से कम 10 पौधे भी लगाएं, ताकि पर्यावरण अनुकूल रहें।
- सुभाष गोयल, भू-जल वैज्ञानिक एवं प्रांत संयोजक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, आरएसएस।
कम करना होगा वाहनों का प्रयोग
लॉकडाउन के दौरान पर्यावरण में काफी सुधार आया था। वही जीवन शैली हमें फिर से अपनानी होगी और वाहनों का प्रयोग कम करना होगा। साथ ही त्योहारी सीजन पर होने वाली आतिशबाजी से भी बचना होगा। अपनी खुशी जाहिर करने के अन्य भी माध्यम हैं, जिनसे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। स्टैंड विद नेचर ने जलवायु परिवर्तन को लेकर विशेष मुहिम भी चलाई थी, जिसके माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया था। पर्यावरण को होने वाले नुकसान से जीवजंतु से लेकर इंसानों को भी काफी नुकसान होता है। इससे त्वचा, सांस और आंखों के रोगियों में इजाफा हो रहा है।
- लोकेश भिवानी, संस्थापक, स्टैंड विद नेचर
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भिवानी। शहर की हवा लगातार खराब होती जा रही है। इसकी वजह से जीवजंतु से लेकर इंसानों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण से त्वचा, सांस और आंखों से संबंधित मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। पिछले महज 11 दिन में शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 62 से 205 पहुंच गया है। शनिवार को भिवानी का एक्यूआई 205 दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए खराब है।
दशहरे पर की गई आतिशबाजी के कारण भी प्रदूषण बढ़ा है, जिसके कारण सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। लॉकडाउन के दौरान पर्यावरण में सकारात्मक परिवर्तन हुए थे। उस दौरान सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट सुनने को मिल रही थी। अब फिर से शहर की हवा खराब हो रही है।
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350 से अधिक फैक्टरियां उगल रहीं धुआं
शहर के औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 350 फैक्टरियां हैं। इनमें प्लास्टिक, स्टील, लोहे सहित अन्य वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। लॉकडाउन के दौरान ये औद्योगिक इकाइयां बंद थीं। मगर अब इनमें कार्य फिर से शुरू हो गया है। फैक्टरियां शुरू होने से मशीनों से निकलने वाला धुआं भी फिर से शुरू हो गया है। जिसका नुकसान पर्यावरण को सीधे तौर पर हो रहा है। कोरोना काल में ईंट-भट्टों पर भी रोक लगाई गई थी, मगर अब ईंट-भट्टे भी फिर से शुरू हो गए है। जिले में करीब 1200 से 1400 ईंट-भट्टे हैं।
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पांच हजार से अधिक वाहनों का रोजाना आवागमन
शहर की सड़कों पर आम दिनों में रोजाना करीब पांच हजार वाहनों का आवागमन रहता है। लॉकडाउन के दौरान तो इन वाहनों की संख्या में 80 फीसदी तक गिरावट आई थी, मगर अब फिर से बाजार खुले होने के कारण वाहनों का आवागमन अधिक हो गया है। वाहनों से निकलने वाला धुआं शहर की हवा को दूषित कर रहा है।
11 दिनों में ऐसे बढ़ा शहर का एक्यूआई
दिनांक एक्यूआई
06 अक्तूबर 62
07 अक्तूबर 77
08 अक्तूबर 138
09 अक्तूबर 122
10 अक्तूबर 103
11 अक्तूबर 106
12 अक्तूबर 104
13 अक्तूबर 144
14 अक्तूबर 164
15 अक्तूबर 157
16 अक्तूबर 205
खेत में पराली जलाने से परहेज करें
पेट्रोल, डीजल, कोयला और प्लास्टिक के प्रयोग से बचें, ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो। किसान अपने खेत में पराली जलाने से परहेज करें। साथ ही जिन जगहों पर धूल उड़ती है, वहां पर पानी का छिड़काव करें। पर्यावरण संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है। सभी नागरिक हर साल कम से कम 10 पौधे भी लगाएं, ताकि पर्यावरण अनुकूल रहें।
- सुभाष गोयल, भू-जल वैज्ञानिक एवं प्रांत संयोजक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, आरएसएस।
कम करना होगा वाहनों का प्रयोग
लॉकडाउन के दौरान पर्यावरण में काफी सुधार आया था। वही जीवन शैली हमें फिर से अपनानी होगी और वाहनों का प्रयोग कम करना होगा। साथ ही त्योहारी सीजन पर होने वाली आतिशबाजी से भी बचना होगा। अपनी खुशी जाहिर करने के अन्य भी माध्यम हैं, जिनसे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। स्टैंड विद नेचर ने जलवायु परिवर्तन को लेकर विशेष मुहिम भी चलाई थी, जिसके माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया था। पर्यावरण को होने वाले नुकसान से जीवजंतु से लेकर इंसानों को भी काफी नुकसान होता है। इससे त्वचा, सांस और आंखों के रोगियों में इजाफा हो रहा है।
- लोकेश भिवानी, संस्थापक, स्टैंड विद नेचर

औद्योगिक इकाई भिवानी।- फोटो : Bhiwani