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हड़ताली फार्मासिस्टों ने दवा वितरण कर रही नर्सों को रोका, धक्का-मुक्की की
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मांगों को लेकर फार्मासिस्ट ने हड़ताल की तो व्यवस्था बनाने के लिए नागरिक अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ नर्सों की ड्यूटी लगाई। स्टाफ नर्स दवा वितरण करने लगी तो फार्मासिस्ट ने विरोध किया। नर्सों से तीखी नोकझोंक हुई और धक्का-मुक्की भी की गई। विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस बुलानी पड़ी। वहीं फार्मासिस्टों मरीजों को भी बरगलाया और कहा कि स्टाफ नर्स तुम्हें उल्टी की जगह दस्तों की दवा दे देंगी। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और फार्मासिस्ट को ओपीडी से बाहर किया। ओपीडी से निकालने के बाद फार्मासिस्ट ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर पार्क में धरना दिया। वहीं मंगलवार को भी फार्मासिस्ट हड़ताल पर रहेंगे।
ग्रेड पे बढ़ाने, पदोन्नति नीति बनाने की मांग को लेकर जिलेभर के नियमित फार्मासिस्ट ने सोमवार को काम छोड़ हड़ताल रखी। फार्मासिस्ट ही नहीं चीफ फार्मासिस्ट भी हड़ताल रहे। सोमवार को मरीजों की भीड़ भी ज्यादा रहती है। ऐसे में अव्यवस्था न हो इसके लिए प्रधान चिकित्सा अधिकारी ने मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ नर्स की ड्यूटी लगाई। जब नर्से दवा वितरण करने लगी तो फार्मासिस्ट वहां पहुंच गए। दवा वितरण को लेकर स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट में तीखी नोकझोंक हुई। विवाद की सूचना पर अस्पताल चौकी से एएसआई परमजीत मौके पर पहुंचे और फार्मासिस्ट को समझाया। दिनोद गेट चौकी, शहर थाना और सिविल लाइन थाना से भी अस्पताल पहुंची और सभी फार्मासिस्ट को ओपीडी से बाहर निकाला। जिसके बाद फार्मासिस्ट दिनभर सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर बने पार्क में धरना देकर रोष जताते रहे। दवा वितरण विंडो पर पहली बार दवा वितरण कर रही स्टाफ नर्स को दवाइयां ढूंढने में परेशानी हुई। साथ ही करीब 1500 मरीज भी परेशान दिखे। पुलिस टीमें भी अस्पताल परिसर में तैनात रही।
फार्मासिस्टों ने मरीजों को बरगलाया
स्टाफ नर्स जब दवा वितरण कर रही थीं तो फार्मासिस्ट मरीजों को कहने लगे कि स्टाफ नर्सों दवा वितरण के योग्य नहीं है। उन्हें दवाइयों की कोई जानकारी नहीं। ऐसे में उल्टी की जगह दस्त की दवा देंगी। बीमारी कोई होगी और दवा कोई मिलेगी। इसी पर स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट में नोकझोंक हुई। स्टाफ नर्सों ने बाद में बैठक कर इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि यदि फार्मासिस्ट ने अपने शब्द वापस नहीं लिए तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगी। फार्मासिस्ट लोगों को बरगला रहे हैं और कहते है कि हमसे कम है। उनका कोर्स तीन साल का होता है, तीनों शिफ्टों में ड्यूटी देती हैं और सारी जिम्मेवारी संभालती है।
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जायज मांग को भी नहीं किया जा रहा पूरा
हड़ताल करते हुए फार्मासिस्ट ने कहा कि उनकी जायज मांगों को भी अनदेखा किया जा रहा है। फार्मासिस्ट को 4600 ग्रेड पे मिलना चाहिए। 2018 में सरकार ने उन्हें पदोन्नति के लिए सिस्टम बनाने का आश्वासन दिया था जो अभी तक भी नहीं बनाया गया है। प्रधान अनिल झांवरी ने कहा कि वे मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत है मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। वे भी नहीं चाहते कि आमजन को कोई परेशान हो। इस दौरान फार्मासिस्टों ने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपा।
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ग्रेड पे बढ़ाने, पदोन्नति नीति बनाने की मांग को लेकर जिलेभर के नियमित फार्मासिस्ट ने सोमवार को काम छोड़ हड़ताल रखी। फार्मासिस्ट ही नहीं चीफ फार्मासिस्ट भी हड़ताल रहे। सोमवार को मरीजों की भीड़ भी ज्यादा रहती है। ऐसे में अव्यवस्था न हो इसके लिए प्रधान चिकित्सा अधिकारी ने मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ नर्स की ड्यूटी लगाई। जब नर्से दवा वितरण करने लगी तो फार्मासिस्ट वहां पहुंच गए। दवा वितरण को लेकर स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट में तीखी नोकझोंक हुई। विवाद की सूचना पर अस्पताल चौकी से एएसआई परमजीत मौके पर पहुंचे और फार्मासिस्ट को समझाया। दिनोद गेट चौकी, शहर थाना और सिविल लाइन थाना से भी अस्पताल पहुंची और सभी फार्मासिस्ट को ओपीडी से बाहर निकाला। जिसके बाद फार्मासिस्ट दिनभर सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर बने पार्क में धरना देकर रोष जताते रहे। दवा वितरण विंडो पर पहली बार दवा वितरण कर रही स्टाफ नर्स को दवाइयां ढूंढने में परेशानी हुई। साथ ही करीब 1500 मरीज भी परेशान दिखे। पुलिस टीमें भी अस्पताल परिसर में तैनात रही।
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फार्मासिस्टों ने मरीजों को बरगलाया
स्टाफ नर्स जब दवा वितरण कर रही थीं तो फार्मासिस्ट मरीजों को कहने लगे कि स्टाफ नर्सों दवा वितरण के योग्य नहीं है। उन्हें दवाइयों की कोई जानकारी नहीं। ऐसे में उल्टी की जगह दस्त की दवा देंगी। बीमारी कोई होगी और दवा कोई मिलेगी। इसी पर स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट में नोकझोंक हुई। स्टाफ नर्सों ने बाद में बैठक कर इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि यदि फार्मासिस्ट ने अपने शब्द वापस नहीं लिए तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगी। फार्मासिस्ट लोगों को बरगला रहे हैं और कहते है कि हमसे कम है। उनका कोर्स तीन साल का होता है, तीनों शिफ्टों में ड्यूटी देती हैं और सारी जिम्मेवारी संभालती है।
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जायज मांग को भी नहीं किया जा रहा पूरा
हड़ताल करते हुए फार्मासिस्ट ने कहा कि उनकी जायज मांगों को भी अनदेखा किया जा रहा है। फार्मासिस्ट को 4600 ग्रेड पे मिलना चाहिए। 2018 में सरकार ने उन्हें पदोन्नति के लिए सिस्टम बनाने का आश्वासन दिया था जो अभी तक भी नहीं बनाया गया है। प्रधान अनिल झांवरी ने कहा कि वे मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत है मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। वे भी नहीं चाहते कि आमजन को कोई परेशान हो। इस दौरान फार्मासिस्टों ने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपा।