{"_id":"67057675edde08401f0d88f9","slug":"organizing-akhand-chandi-yagna-bhiwani-news-c-125-1-pbt1004-124105-2024-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhiwani News: डॉ. अशोक गिरि महाराज के सानिध्य में अखंड चंडी यज्ञ का आयोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhiwani News: डॉ. अशोक गिरि महाराज के सानिध्य में अखंड चंडी यज्ञ का आयोजन
Tue, 08 Oct 2024 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 08 Oct 2024 11:44 PM IST
विज्ञापन
सिद्धपीठ बाबा जहर गिरि आश्रम में यज्ञ में आहूति डालते डॉ. अशोक गिरि महाराज।
भिवानी। नवरात्र के पावन पर्व पर हालुवास गेट स्थित सिद्धपीठ बाबा जहर गिरि आश्रम में पीठाधीश्वर अंतरराष्ट्रीय महंत डॉ. अशोक गिरि महाराज के सानिध्य में अखंड चंडी यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यज्ञ का शुभारंभ अरणी मंथन विधि और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ था।
महंत अशोक गिरि ने बताया कि अरणी मंथन प्रक्रिया में अग्नि मंत्र का उच्चारण करते हुए अग्नि प्रकट की जाती है और उसी अग्नि में वैश्विक कल्याण के उद्देश्य से हवन किया जाता है। अरणी मंथन से पूर्व गणपति आदि स्थापित देवताओं का पूजन, द्वारपालों ने सभी शाखाओं का वेदपारायण, देवप्रबोधन, औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास, कुंड पूजन पूर्ण किया गया।
इस प्रक्रिया के तहत, अरणी की लकड़ी से मंथन कर अग्नि प्रज्जवलित की जाती है, जो खंड चंडी यज्ञ की पवित्र अग्नि के रूप में प्रतिष्ठित होती है। यज्ञ के दौरान दिन-रात दुर्गा-सप्तशती की आहुति प्रदान की जाती है।
विज्ञापन
यज्ञ मीमांसा के अनुसार विशेष प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जिसमें काले तिल, जौ, खांड, चावल, जटामासी, पंचमेवा, सूखी बेल गिरि, लाल चंदन चूरा, भोजपत्र, समुद्री झाग, गूगल-लौबान, धवा फूल, सुगंध बापची, देवदार, गोरखमुंडी, बच्च, शतावरी, कपूर कचरी, अगर-तगर, पीली सरसों, नागरमोथा, जायफल, हरमल, मुश्क-कपूर आदि शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्र एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, जिसे मां भगवती के नौ रूपों की आराधना के रूप में मनाया जाता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जो हमारे ऋषि-मुनियों ने स्थापित की थी। शास्त्रों के अनुसार मां भगवती को अर्चन प्रिय है, इसलिए इन दिनों में श्रद्धालु विशेष रूप से मां का पूजन एवं अर्चन करते हैं।
विज्ञापन
महंत अशोक गिरि ने बताया कि अरणी मंथन प्रक्रिया में अग्नि मंत्र का उच्चारण करते हुए अग्नि प्रकट की जाती है और उसी अग्नि में वैश्विक कल्याण के उद्देश्य से हवन किया जाता है। अरणी मंथन से पूर्व गणपति आदि स्थापित देवताओं का पूजन, द्वारपालों ने सभी शाखाओं का वेदपारायण, देवप्रबोधन, औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास, कुंड पूजन पूर्ण किया गया।
विज्ञापन
इस प्रक्रिया के तहत, अरणी की लकड़ी से मंथन कर अग्नि प्रज्जवलित की जाती है, जो खंड चंडी यज्ञ की पवित्र अग्नि के रूप में प्रतिष्ठित होती है। यज्ञ के दौरान दिन-रात दुर्गा-सप्तशती की आहुति प्रदान की जाती है।
विज्ञापन
यज्ञ मीमांसा के अनुसार विशेष प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जिसमें काले तिल, जौ, खांड, चावल, जटामासी, पंचमेवा, सूखी बेल गिरि, लाल चंदन चूरा, भोजपत्र, समुद्री झाग, गूगल-लौबान, धवा फूल, सुगंध बापची, देवदार, गोरखमुंडी, बच्च, शतावरी, कपूर कचरी, अगर-तगर, पीली सरसों, नागरमोथा, जायफल, हरमल, मुश्क-कपूर आदि शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्र एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, जिसे मां भगवती के नौ रूपों की आराधना के रूप में मनाया जाता है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जो हमारे ऋषि-मुनियों ने स्थापित की थी। शास्त्रों के अनुसार मां भगवती को अर्चन प्रिय है, इसलिए इन दिनों में श्रद्धालु विशेष रूप से मां का पूजन एवं अर्चन करते हैं।