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Bhiwani News: गली की भूमि पर फर्जी पीआईडी बनवाने के मामले में आठ नामजद सहित नगर परिषद कर्मियों पर केस दर्ज करने के आदेश
Sun, 02 Nov 2025 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 02 Nov 2025 01:32 AM IST
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भिवानी। नगर परिषद के कर्मचारियों की मिलीभगत से गली की भूमि पर गलत दस्तावेजों के आधार पर फर्जी प्रॉपर्टी आईडी (पीआईडी) बनवाने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। जेएमआईसी सोहनलाल मलिक की अदालत ने शहर थाना पुलिस को आठ नामजद व्यक्तियों सहित नगर परिषद के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के तहत केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत का यह आदेश पीड़ित मुकेश निवासी चौखानी स्टेट द्वारा डाले गए इस्तगासा पर आया है।
मामला महम गेट स्थित चौखानी स्टेट गली नंबर-एक का है जहां नगर परिषद अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से गली की भूमि को निजी प्लॉट दिखाकर फर्जी पीआईडी तैयार करवाई गई थी। जब पीड़ित की शिकायत पर उपायुक्त ने जांच कराई तो भूमि वास्तव में गली की पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय शहरी निकाय विभाग ने फर्जी पीआईडी रद्द करने के आदेश जारी किए।
पीड़ित मुकेश ने बताया कि 31 दिसंबर 2023 को जब कुछ लोगों ने गली की जगह पर निर्माण सामग्री डालनी शुरू की तो उसने विरोध किया। इस पर झगड़ा हुआ जिसमें मुकेश और उसके भाई दिनेश को चोटें आईं। इलाज करवाने और एमएलआर कटवाने के बावजूद उसी दिन पुलिस ने आरोपियों से मिलीभगत कर उल्टा उनके परिवार के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। इसके विरोध में सामाजिक संगठनों ने लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया और एसपी को शिकायत दी।
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इसके बाद 23 जनवरी 2024 को केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कमजोर धाराओं में केस दर्ज हुआ। इसी बीच मुकेश को पता चला कि आरोपियों ने नगर परिषद कर्मियों से साठगांठ कर गली की जगह की फर्जी पीआईडी बनवा ली है। उसने 13 जनवरी को उपायुक्त को शिकायत दी जिस पर अतिरिक्त उपायुक्त, तहसीलदार, नगर परिषद ईओ, जेई और पटवारी की टीम ने मौके का मुआयना और पैमाइश की। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि भूमि निजी नहीं बल्कि गली की है। इस आधार पर नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी ने 21 अगस्त 2024 को फर्जी पीआईडी रद्द कर पीड़ित को लिखित सूचना दी।
पीआईडी कैंसिल कर दिया नोटिस फिर भी नहीं हटाई निर्माण सामग्री
पीड़ित मुकेश के अनुसार नगर परिषद ने पीआईडी रद्द होने के बाद संबंधित व्यक्तियों को निर्माण सामग्री हटाने का नोटिस दिया था। इसके बावजूद आरोपियों ने नगर परिषद की टीम का विरोध किया और गली की भूमि पर कब्जा बरकरार रखा। पीड़ित का कहना है कि नगर परिषद अधिकारी भी इस पर चुप्पी साधे रहे और कार्रवाई नहीं की।
इनके खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश
अदालत ने मुकेश की शिकायत पर सुमित्रा, कमला, पवन, रतनलाल, सुरेंद्र सिंह, परमिल (निवासी चौखानी स्टेट), राकेश नंबरदार, सुभाष सिंह (निवासी मानान पाना) और नगर परिषद के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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मामला महम गेट स्थित चौखानी स्टेट गली नंबर-एक का है जहां नगर परिषद अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से गली की भूमि को निजी प्लॉट दिखाकर फर्जी पीआईडी तैयार करवाई गई थी। जब पीड़ित की शिकायत पर उपायुक्त ने जांच कराई तो भूमि वास्तव में गली की पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय शहरी निकाय विभाग ने फर्जी पीआईडी रद्द करने के आदेश जारी किए।
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पीड़ित मुकेश ने बताया कि 31 दिसंबर 2023 को जब कुछ लोगों ने गली की जगह पर निर्माण सामग्री डालनी शुरू की तो उसने विरोध किया। इस पर झगड़ा हुआ जिसमें मुकेश और उसके भाई दिनेश को चोटें आईं। इलाज करवाने और एमएलआर कटवाने के बावजूद उसी दिन पुलिस ने आरोपियों से मिलीभगत कर उल्टा उनके परिवार के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। इसके विरोध में सामाजिक संगठनों ने लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया और एसपी को शिकायत दी।
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इसके बाद 23 जनवरी 2024 को केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कमजोर धाराओं में केस दर्ज हुआ। इसी बीच मुकेश को पता चला कि आरोपियों ने नगर परिषद कर्मियों से साठगांठ कर गली की जगह की फर्जी पीआईडी बनवा ली है। उसने 13 जनवरी को उपायुक्त को शिकायत दी जिस पर अतिरिक्त उपायुक्त, तहसीलदार, नगर परिषद ईओ, जेई और पटवारी की टीम ने मौके का मुआयना और पैमाइश की। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि भूमि निजी नहीं बल्कि गली की है। इस आधार पर नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी ने 21 अगस्त 2024 को फर्जी पीआईडी रद्द कर पीड़ित को लिखित सूचना दी।
पीआईडी कैंसिल कर दिया नोटिस फिर भी नहीं हटाई निर्माण सामग्री
पीड़ित मुकेश के अनुसार नगर परिषद ने पीआईडी रद्द होने के बाद संबंधित व्यक्तियों को निर्माण सामग्री हटाने का नोटिस दिया था। इसके बावजूद आरोपियों ने नगर परिषद की टीम का विरोध किया और गली की भूमि पर कब्जा बरकरार रखा। पीड़ित का कहना है कि नगर परिषद अधिकारी भी इस पर चुप्पी साधे रहे और कार्रवाई नहीं की।
इनके खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश
अदालत ने मुकेश की शिकायत पर सुमित्रा, कमला, पवन, रतनलाल, सुरेंद्र सिंह, परमिल (निवासी चौखानी स्टेट), राकेश नंबरदार, सुभाष सिंह (निवासी मानान पाना) और नगर परिषद के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।