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Bhiwani News: अब विवादित प्रॉपर्टी आईडी के मामलों में अधिकारी करेंगे फिजिकल वेरिफिकेशन

Mon, 12 Jun 2023 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Mon, 12 Jun 2023 11:15 PM IST
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Now officers will do physical verification in cases of disputed property ID
संजय वर्मा
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भिवानी। अब विवादित प्रॉपर्टी आईडी के मामलों की नगर परिषद के अधिकारी फिजिकल वेरिफिकेशन कर जांच करेंगे। उसके बाद ही विवादित मामलों की प्रॉपर्टी आईडी का निपटारा होगा। इतना ही नहीं मैनुअल तरीके से अब नगर परिषद में प्रॉपर्टी की असेसमेंट कॉपी नहीं मिलेगी। जिस पर नगर परिषद ने उच्चाधिकारियों के आदेश पर इस पर प्रतिबंध लगा दिया है।
दो दिन तक लगे कैंप में काफी ऐसे मामले नगर परिषद अधिकारियों की पकड़ में आए हैं, जिनमें प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड से दस्तावेजों का मिलान नहीं हो रहा है। जबकि राजस्व विभाग और नगर परिषद में भूमि और प्रॉपर्टी का रिकाॅर्ड भी भिन्न है। इसका मिलान नहीं हो रहा है। इन सबके बीच संपत्तियों के मालिक भी बदले हुए हैं। नगर परिषद में असेसमेंट से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराए जाने के काफी मामले भी उजागर हो चुके हैं, जिनकी वजह से अब प्रॉपर्टी आईडी में भी अड़चने आ रही हैं।
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नगर परिषद की शहरी दायरे में याशी कंपनी के सर्वेक्षण अनुसार 75 हजार प्रॉपर्टी आईडी की पहचान हो चुकी हैं, जिनमें अब ये प्रॉपर्टी करीब 85 हजार तक पहुंच गई हैं। इनमें भूमि के नए मालिक बने हैं तो काफी प्रॉपर्टी कई हिस्सों में बंट चुकी हैं, जिसकी वजह से नई पीआईडी तैयार हुई हैं। नगर परिषद में पीआईडी की प्रक्रिया ऑनलाइन की हुई हैं, लेकिन पीआईडी की त्रुटियों की वजह से ऑनलाइन व्यवस्था में भी खामियां दूर नहीं हो रही हैं। ऐसे मामलों को अब विवादित पीआईडी के दायरे में रखा गया है। जिन पर नगर परिषद के अधिकारी दस्तावेजों का अवलोकन करने के साथ साथ मौके पर पहुंचकर भी फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे। क्योंकि कई मामलों में तो प्रॉपर्टी में जो मालिक दर्शाये गए हैं, वे मौके पर प्रॉपर्टी पर काबिज ही नहीं हैं। यानी प्रॉपर्टी किसी के नाम बोल रही हैं, वहां काबिज कोई और ही बैठा है।
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अब वह अपनी पीआईडी बनाने के लिए नगर परिषद में चक्कर लगा रहा है। सबसे अहम प्रॉपर्टी आईडी में एक बड़ी दिक्कत यह भी है कि राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में भूमि के मालिक अलग है, जबकि नगर परिषद में प्रॉपर्टी के मालिक अलग है। इस तरह से राजस्व विभाग और नगर परिषद का रिकॉर्ड भी आपस में मेल नहीं खा रहा है। इसकी वजह से लोगों के पीआईडी संबंधी मामले अटक गए हैं। वहीं उनके प्रॉपर्टी के मालिक होने पर ही बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। संवाद





नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अभय सिंह यादव से सीधी बात

सवाल : एक प्रॉपर्टी में अगर बंटवारा है तो उसमें कैसे पीआईडी बनेगी?

जवाब : पीआईडी में बंटवारे से जुड़े दस्तावेज जरूरी हैं, इंतकाल भी दर्ज होना चाहिए?

सवाल : शहरी दायरे की काफी वर्षों पुरानी प्रॉपर्टी के रिकाॅर्ड में आज भी मालिक पूर्वज ही है।

जवाब : ऐसे प्रॉपर्टी में वारिसान का दर्ज होना जरूरी है। राजस्व विभाग से जुड़ा रिकाॅर्ड भी देना होगा।

सवाल : अगर किसी पीआईडी में खसरा नंबर मिलान नहीं हो रहा है तो उस स्थिति में क्या होगा?

जवाब : खसरा नंबर से ही प्रॉपर्टी की सही जानकारी मिलती है, ऐसे मामलों में राजस्व विभाग का रिकाॅर्ड भी दुरुस्त कराना अनिवार्य होगा।

सवाल : दो दिन कैंप में पीआईडी के कौन से मामले लंबित रखे गए?

जवाब: दो दिन तक कैंप मेें अधिकांश मामले निपटाए दिए गए हैं, जिन मामलों में संदेहास्पद या विवाद बना है, उनकी पहले फिजिकल वेरिफिकेशन होगी, फिर उनका निपटान होगा।


सवाल : नगर परिषद कार्यालय से मैनुअल असेसमेंट दी जा रही हैं?

जवाब : नगर परिषद से मैनुअल असेसमेंट पर पाबंदी लगा दी गई है। पीआईडी नंबर से ही अब प्रॉपर्टी की जानकारी ऑनलाइन मिलेगी।

सवाल : पीआईडी से जड़ीं समस्याएं निपटान के लिए कैंप फिर लगेगा?

जवाब : दो दिन का कैंप लगा था। लेकिन 30 जून तक आम नागरिकों के लिए नगर परिषद कार्यालय में स्पेशल काउंटर के माध्यम से ऐसे मामलों का निपटान और सुनवाई की जाएगी।
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