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Bhiwani News: अब औद्योगिक सेक्टरों में उद्योगों के कैमिकल युक्त गंदे पानी से मिलेगी जल्द निजात
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औद्योगिक इकाई क्षेत्र में बनाया जा रहा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट।
संजय वर्मा
भिवानी। अब शहर के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के करीब ढाई सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कैमिकल युक्त गंदे पानी को फिर से उपयोगी बनाया जाएगा। पालुवास मोड़ पर 11 करोड़ के बजट से कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) जल्द बनकर तैयार होगा। करीब एक बाह बाद इसे चालू कर दिया जाएगा।
इसके बाद औद्योगिक इकाइयों के इस कैमिकल युक्त गंदे पानी को स्पेशल ट्रीटमेंट देने के उपरांत किसानों की खेती में सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर पाना संभव होगा। फिलहाल कई औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी खुले में ही फैला है। इसकी वजह से भूमि भी बंजर हो चुकी है। प्रदूषित पानी से वहां काम करने वाले मजदूरों की सेहत पर भी बुरा प्रभाव देखा जा रहा है।
भिवानी के रोहतक रोड पर औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का निर्माण काम अंतिम चरण में है। करीब 11 करोड़ के बजट से बनकर तैयार होने वाले इस ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता पांच एमएलडी की है। भिवानी के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में अधिकांश लघु उद्योग प्लास्टिक धागा के हैं। इसके अलावा इस्पात उद्योग, नॉन वुवेन कपड़ा उद्योग भी हैं। कुछ सर्जिकल उपकरण उद्योगों के अलावा कुछ उद्योग ऐसे हैं, जिनमें कैमिकल युक्त गंदा पानी सीवर लाइन में पहुंचता है।
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दोनों ही सेक्टरों का सीवरेज सिस्टम करीब दो दशक से अधिक पुराना है। जो अधिकांश समय ठप ही रहता है। कुछ अर्से पहले ही सीवरेज सिस्टम को भी दुरुस्त कराया गया है। जिसके बाद सीवरेज सिस्टम को गांव पालुवास मोड़ पर बन रहे कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से भी जोड़ा जाएगा।
उद्योगों से निकलने वाला गंदा पानी सीईटीपी के जरिए ट्रीटमेंट पाने के बाद इसे किसान अपने खेतों में फसलों की सिंचाई में इस्तेमाल कर पाएंगे। प्लांट तैयार होने के बाद जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ड्रेनेज सिस्टम से भी इसे जोड़ा जाएगा। करीब तीन साल से प्लांट निर्माण का काम चल रहा है।
इन गांवों के किसान कर सकेंगे सीईटीपी के पानी का इस्तेमाल
गांव कालुवास, पालुवास, निनान, नौरंगाबाद, बामला के अलावा आसपास के कई गांवों के किसान सीईटीपी के ट्रीटमेंट किए गए पानी का इस्तेमाल अपनी फसलों में सिंचाई के लिए कर सकेंगे। इस पानी से फसल उत्पादन लेने में भी किसानों को फायदा मिलेगा। फिलहाल इन गांवों में सिंचाई के संसाधन भी बहुत कम हैं, वहीं भूमिगत जल भी खारा है।
क्या है सीईटीपी
औद्योगिक इकाइयों में कैमिकल युक्त पानी को सही करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ये पानी एक केंद्रीकृत स्थान पर लाया जाता है। इस सुविधा को कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) कहा जाता है। प्लांट में सीवरेज के गंदे पानी के उपचार के लिए एक संयंत्र होता है। जिसमें बड़ी वस्तुओं को पानी से अलग कर दिया जाता है। फिर सीवरेज पानी में गंदगी की छंटाई के बाद पानी ग्रिट कक्ष में जाता है। जहां सिंडर, रेत और छोटे पथर तली में जमा हो जाते हैं और पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का काम मई में पूरा हो जाएगा। जिसके बाद इसे चालू कराएंगे। करीब 11 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट से उद्योगों के गंदे पानी को आसपास के किसान सिंचाई में भी इस्तेमाल कर पाएंगे।
- करुण कुमार कनिष्ठ अभियंता हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण भिवानी।
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भिवानी। अब शहर के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के करीब ढाई सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कैमिकल युक्त गंदे पानी को फिर से उपयोगी बनाया जाएगा। पालुवास मोड़ पर 11 करोड़ के बजट से कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) जल्द बनकर तैयार होगा। करीब एक बाह बाद इसे चालू कर दिया जाएगा।
इसके बाद औद्योगिक इकाइयों के इस कैमिकल युक्त गंदे पानी को स्पेशल ट्रीटमेंट देने के उपरांत किसानों की खेती में सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर पाना संभव होगा। फिलहाल कई औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी खुले में ही फैला है। इसकी वजह से भूमि भी बंजर हो चुकी है। प्रदूषित पानी से वहां काम करने वाले मजदूरों की सेहत पर भी बुरा प्रभाव देखा जा रहा है।
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भिवानी के रोहतक रोड पर औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का निर्माण काम अंतिम चरण में है। करीब 11 करोड़ के बजट से बनकर तैयार होने वाले इस ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता पांच एमएलडी की है। भिवानी के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में अधिकांश लघु उद्योग प्लास्टिक धागा के हैं। इसके अलावा इस्पात उद्योग, नॉन वुवेन कपड़ा उद्योग भी हैं। कुछ सर्जिकल उपकरण उद्योगों के अलावा कुछ उद्योग ऐसे हैं, जिनमें कैमिकल युक्त गंदा पानी सीवर लाइन में पहुंचता है।
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दोनों ही सेक्टरों का सीवरेज सिस्टम करीब दो दशक से अधिक पुराना है। जो अधिकांश समय ठप ही रहता है। कुछ अर्से पहले ही सीवरेज सिस्टम को भी दुरुस्त कराया गया है। जिसके बाद सीवरेज सिस्टम को गांव पालुवास मोड़ पर बन रहे कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से भी जोड़ा जाएगा।
उद्योगों से निकलने वाला गंदा पानी सीईटीपी के जरिए ट्रीटमेंट पाने के बाद इसे किसान अपने खेतों में फसलों की सिंचाई में इस्तेमाल कर पाएंगे। प्लांट तैयार होने के बाद जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ड्रेनेज सिस्टम से भी इसे जोड़ा जाएगा। करीब तीन साल से प्लांट निर्माण का काम चल रहा है।
इन गांवों के किसान कर सकेंगे सीईटीपी के पानी का इस्तेमाल
गांव कालुवास, पालुवास, निनान, नौरंगाबाद, बामला के अलावा आसपास के कई गांवों के किसान सीईटीपी के ट्रीटमेंट किए गए पानी का इस्तेमाल अपनी फसलों में सिंचाई के लिए कर सकेंगे। इस पानी से फसल उत्पादन लेने में भी किसानों को फायदा मिलेगा। फिलहाल इन गांवों में सिंचाई के संसाधन भी बहुत कम हैं, वहीं भूमिगत जल भी खारा है।
क्या है सीईटीपी
औद्योगिक इकाइयों में कैमिकल युक्त पानी को सही करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ये पानी एक केंद्रीकृत स्थान पर लाया जाता है। इस सुविधा को कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) कहा जाता है। प्लांट में सीवरेज के गंदे पानी के उपचार के लिए एक संयंत्र होता है। जिसमें बड़ी वस्तुओं को पानी से अलग कर दिया जाता है। फिर सीवरेज पानी में गंदगी की छंटाई के बाद पानी ग्रिट कक्ष में जाता है। जहां सिंडर, रेत और छोटे पथर तली में जमा हो जाते हैं और पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू होती है।
औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का काम मई में पूरा हो जाएगा। जिसके बाद इसे चालू कराएंगे। करीब 11 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्लांट से उद्योगों के गंदे पानी को आसपास के किसान सिंचाई में भी इस्तेमाल कर पाएंगे।
- करुण कुमार कनिष्ठ अभियंता हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण भिवानी।