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न सफाई कर्मचारी, न संसाधन, कैसे जीतें स्वच्छता की जंग
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गुप्चर विभाग कार्यालय के सामने लगा गंदगी का ढेर।
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। नगर परिषद में भ्रष्टाचार का भले ही बोलबाला हो मगर स्वच्छता सर्वे में बेहतर रैंक पाने की कवायद शुरू कर दी है। मगर बड़ी समस्या यह है कि नप के पास कर्मचारी है न संसाधन। ऐसे में शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। रविवार की छुट्टी रही, तो फिर सोमवार और मंगलवार को कर्मचारियों की हड़ताल। ऐसे में तीन दिन लगातार सफाई कर्मी कोई काम नहीं करेंगे और जिससे व्यवस्था और बिगड़ेगी।
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम कभी भी शहर में आ सकती है। नप अधिकारी, कर्मचारी भी इसकी तैयारियों में लगे हैं मगर अव्यवस्थाएं परेशानी बनी हैं। संसाधनों, कर्मचारियों की कमी के अलावा हड़ताल स्वच्छता सर्वे में बाधा बनी है। आमजन में भी जागरूकता का अभाव है, जिस कारण रोक के बावजूद खुले में कचरा फेंका जा रहा है। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे है।
दो जेसीबी, एक लोडर खराब, 11 टीपर ऑटो के लिए चालक नहीं
शहर में 31 वार्ड है और करीब पौने तीन लाख की आबादी। शहर के दायरे और आबादी को देखते हुए कम से कम 700 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है, मगर नप के पास 143 नियमित और 160 कच्चे कर्मचारी हैं। संसाधनों की बात करें तो दो जेसीबी मशीन और एक लोडर मशीन खराब है। ऐसे में अब सफाई कर्मचारी ही मेनुअली कचरा उठा रहे हैं। 11 नए टीपर ऑटो खरीदे थे, मगर चालकों के अभाव में ये दमकल विभाग में खड़े है।
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इस बार 7500 अंकों के आधार पर होगा सर्वेक्षण
पिछले वर्ष तक 6000 अंकों के आधार पर सर्वेक्षण होता था। इसमें 1500 अंक आमजन की फीडबैक के थे, तो 1500 अंक नगर परिषद की ओर से शहर वासियों को दी जा रही सुविधाओं के। 1500 अंक स्वच्छता सर्वे के लिए आने वाली केंद्रीय टीम के निरीक्षण के थे। इसके अलावा 1500 अंक कचरा निस्तारण, ओडीएफ, ओडीएफ प्लस जैसी सुविधाओं के थे। अब इसमें बदलाव किया गया है। अब 7500 अंकों के आधार पर सर्वेक्षण होगा। जिसमें 3000 अंक सर्विस लेवल प्रोग्रेस यानी शहर वासियों को दी जा रही सुविधाओं के आधार पर होंगे। 30 फीसदी यानी 2250 अंक सर्टिफिकेशन के होंगे। इसके अलावा 30 फीसदी ही अंक सिटीजन फीडबैक के होंगे। लोगों को स्वच्छता सर्वे के प्रति जागरूक करने के लिए नप सक्षम युवाओं का सहारा ले रहा है।
इन प्रयासों के दम पर रैकिंग सुधारने की तैयारी
नगर परिषद ने स्वच्छता सर्वे में बेहतर रैंकिंग के लिए कुछ प्रयास किये है। इनमें सबसे अहम शहर में जगह-जगह वॉल पेंटिंग से स्वच्छता का संदेश, डोर-टू डोर कचरा कॉलेक्शन के अलावा शहर के अधिकतर डंप प्वाइंट खत्म करना है। इसके अलावा सेक्टर 13-23 समेत शहर के आधे शहर की सफाई का ठेका दिया हुआ है। इसके अलावा रात के समय सफाई करवाई जा रही है। दादरी रोड पर कचरा निस्तारण प्लांट में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग कर गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। शौचालयों की सफाई और मरम्मत के अलावा कृष्णा कॉलोनी मोड़ पर नए शौचालयों का निर्माण करवाया जा रहा है।
वर्ष 2017 के बाद पिछले वर्ष जबरदस्त पिछड़ा
स्वच्छता के मामले में भिवानी पिछले वर्ष तक काफी ठीक था, मगर पिछले वर्ष 78 पायदान खिसक कर 244वीं रैंक रही। 2017 में हुए पहले स्वच्छता सर्वे में जिला 345वें स्थान के साथ सबसे गंदे शहरों में शुमार था। 2018 में सुधार के साथ 240वें, 2019 में 232वें, 2020 में 166वें स्थान पर रहा। वर्ष 2017 से 2020 तक लगातार सुधार हुआ। वर्ष 2021 में 78 पायदान की गिरावट के साथ रैंकिंग में 244वें स्थान पर खिसक गया।
नगर परिषद का प्रयास है कि रैंकिंग में भिवानी बेहतर करें। मैंने हाल ही में चार्ज संभाला है, ऐसे में व्यवस्थाएं देखी जा रही है। जल्द ही बेहतर सुधार किए जाएंगे।
- राजेंद्र प्रसाद, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम कभी भी शहर में आ सकती है। नप अधिकारी, कर्मचारी भी इसकी तैयारियों में लगे हैं मगर अव्यवस्थाएं परेशानी बनी हैं। संसाधनों, कर्मचारियों की कमी के अलावा हड़ताल स्वच्छता सर्वे में बाधा बनी है। आमजन में भी जागरूकता का अभाव है, जिस कारण रोक के बावजूद खुले में कचरा फेंका जा रहा है। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे है।
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दो जेसीबी, एक लोडर खराब, 11 टीपर ऑटो के लिए चालक नहीं
शहर में 31 वार्ड है और करीब पौने तीन लाख की आबादी। शहर के दायरे और आबादी को देखते हुए कम से कम 700 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है, मगर नप के पास 143 नियमित और 160 कच्चे कर्मचारी हैं। संसाधनों की बात करें तो दो जेसीबी मशीन और एक लोडर मशीन खराब है। ऐसे में अब सफाई कर्मचारी ही मेनुअली कचरा उठा रहे हैं। 11 नए टीपर ऑटो खरीदे थे, मगर चालकों के अभाव में ये दमकल विभाग में खड़े है।
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इस बार 7500 अंकों के आधार पर होगा सर्वेक्षण
पिछले वर्ष तक 6000 अंकों के आधार पर सर्वेक्षण होता था। इसमें 1500 अंक आमजन की फीडबैक के थे, तो 1500 अंक नगर परिषद की ओर से शहर वासियों को दी जा रही सुविधाओं के। 1500 अंक स्वच्छता सर्वे के लिए आने वाली केंद्रीय टीम के निरीक्षण के थे। इसके अलावा 1500 अंक कचरा निस्तारण, ओडीएफ, ओडीएफ प्लस जैसी सुविधाओं के थे। अब इसमें बदलाव किया गया है। अब 7500 अंकों के आधार पर सर्वेक्षण होगा। जिसमें 3000 अंक सर्विस लेवल प्रोग्रेस यानी शहर वासियों को दी जा रही सुविधाओं के आधार पर होंगे। 30 फीसदी यानी 2250 अंक सर्टिफिकेशन के होंगे। इसके अलावा 30 फीसदी ही अंक सिटीजन फीडबैक के होंगे। लोगों को स्वच्छता सर्वे के प्रति जागरूक करने के लिए नप सक्षम युवाओं का सहारा ले रहा है।
इन प्रयासों के दम पर रैकिंग सुधारने की तैयारी
नगर परिषद ने स्वच्छता सर्वे में बेहतर रैंकिंग के लिए कुछ प्रयास किये है। इनमें सबसे अहम शहर में जगह-जगह वॉल पेंटिंग से स्वच्छता का संदेश, डोर-टू डोर कचरा कॉलेक्शन के अलावा शहर के अधिकतर डंप प्वाइंट खत्म करना है। इसके अलावा सेक्टर 13-23 समेत शहर के आधे शहर की सफाई का ठेका दिया हुआ है। इसके अलावा रात के समय सफाई करवाई जा रही है। दादरी रोड पर कचरा निस्तारण प्लांट में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग कर गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। शौचालयों की सफाई और मरम्मत के अलावा कृष्णा कॉलोनी मोड़ पर नए शौचालयों का निर्माण करवाया जा रहा है।
वर्ष 2017 के बाद पिछले वर्ष जबरदस्त पिछड़ा
स्वच्छता के मामले में भिवानी पिछले वर्ष तक काफी ठीक था, मगर पिछले वर्ष 78 पायदान खिसक कर 244वीं रैंक रही। 2017 में हुए पहले स्वच्छता सर्वे में जिला 345वें स्थान के साथ सबसे गंदे शहरों में शुमार था। 2018 में सुधार के साथ 240वें, 2019 में 232वें, 2020 में 166वें स्थान पर रहा। वर्ष 2017 से 2020 तक लगातार सुधार हुआ। वर्ष 2021 में 78 पायदान की गिरावट के साथ रैंकिंग में 244वें स्थान पर खिसक गया।
नगर परिषद का प्रयास है कि रैंकिंग में भिवानी बेहतर करें। मैंने हाल ही में चार्ज संभाला है, ऐसे में व्यवस्थाएं देखी जा रही है। जल्द ही बेहतर सुधार किए जाएंगे।
- राजेंद्र प्रसाद, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद