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Bhiwani News: 12 दिसंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, आपसी सहमति से सुलझेंगे लंबित मामले
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भिवानी। राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से 12 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसमें अदालतों में लंबित मामलों का दोनों पक्षों की आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर शीघ्र निपटारा किया जाएगा।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं सीजेएम पवन कुमार ने बताया कि न्यायालय में लंबित मामलों को आपसी रजामंदी से निपटाने के लिए जिला में राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई जा रही है। यदि किसी व्यक्ति का कोई प्रकरण न्यायालय में लंबित है तो वह लोक अदालत के माध्यम से उसका निस्तारण करा सकता है।
लोक अदालत में बैंक ऋण से संबंधित मामले, मोटर दुर्घटना, एनआई एक्ट, फौजदारी, राजस्व और वैवाहिक विवादों का निपटारा किया जाएगा। सचिव पवन कुमार ने बताया कि लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति और राजीनामे के आधार पर विवादों का समाधान कराया जाता है।
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दोनों पक्षों की सहमति से होगा समाधान
लोक अदालत में किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती बल्कि दोनों पक्षों की आपसी सहमति से विवाद का समाधान कराया जाता है। इससे शीघ्र और सुलभ न्याय मिलता है तथा मामले का अंतिम रूप से निपटारा होने के कारण अपील का प्रावधान नहीं रहता। पक्षकारों के समय और धन की भी बचत होती है। बिना समय और पैसा गंवाए मामलों का समाधान होने के कारण राष्ट्रीय लोक अदालत नागरिकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है।
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जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं सीजेएम पवन कुमार ने बताया कि न्यायालय में लंबित मामलों को आपसी रजामंदी से निपटाने के लिए जिला में राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई जा रही है। यदि किसी व्यक्ति का कोई प्रकरण न्यायालय में लंबित है तो वह लोक अदालत के माध्यम से उसका निस्तारण करा सकता है।
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लोक अदालत में बैंक ऋण से संबंधित मामले, मोटर दुर्घटना, एनआई एक्ट, फौजदारी, राजस्व और वैवाहिक विवादों का निपटारा किया जाएगा। सचिव पवन कुमार ने बताया कि लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति और राजीनामे के आधार पर विवादों का समाधान कराया जाता है।
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दोनों पक्षों की सहमति से होगा समाधान
लोक अदालत में किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती बल्कि दोनों पक्षों की आपसी सहमति से विवाद का समाधान कराया जाता है। इससे शीघ्र और सुलभ न्याय मिलता है तथा मामले का अंतिम रूप से निपटारा होने के कारण अपील का प्रावधान नहीं रहता। पक्षकारों के समय और धन की भी बचत होती है। बिना समय और पैसा गंवाए मामलों का समाधान होने के कारण राष्ट्रीय लोक अदालत नागरिकों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है।