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Bhiwani News: लीलस की भूमि पर अब बिश्नोई समाज के सहयोग से सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र में बढ़ेगा चिंकारा का कुनबा

Thu, 02 Feb 2023 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 02 Feb 2023 10:39 PM IST
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गांव कैरू में बनाया गया चिंकारा प्रज्जन केंद्र।
भिवानी। सिवानी क्षेत्र के लीलस गांव की 48 एकड़ भूमि पर अब बिश्नोई समाज के सहयोग से सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र में विलुप्त की कगार पर पहुंचीं चिंकारा, काला हिरण और नीलगाय की प्रजातियों का कुनबा बढ़ेगा। इसके लिए वन्य जीव संरक्षण विभाग की टीम ने मैपिंग का कार्य शुरू कर ग्रामीणों की कमेटी का गठन करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। वहीं जल्द ही सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र की नोटिफिकेशन भी सरकार के समक्ष भेजी जाएगी। लीलस की भूमि में भिवानी जिले के कैरू प्रजनन केंद्र से चिंकारा को भी भेजा जाएगा, ताकि वहां पर इनकी प्रजाति प्रजनन कर प्राकृतिक आवास में फल-फूल सके।
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वन्य जीव संरक्षण विभाग की ओर से फतेहाबाद के धांगड़ के बाद काला हिरण, चिंकारा और नीलगाय को संरक्षित माहौल देने के लिए गांव लीलस में सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र बनाए जाने के लिए 48 एकड़ भूमि ग्राम पंचायत ने विभाग को दी है। इस भूमि पर वन्य प्राणी विभाग प्राकृतिक तौर काला हिरण, चिंकारा और नीलगाय के लिए प्राकृतिक आवास की तरह माहौल तैयार कराएगा, ताकि वे यहां रहने के साथ-साथ भोजन भी खुद ही तलाश सके। विभाग के इस कदम से बिश्नोई समाज के किसानों को भी फायदा मिलेगा। हिरण और नीलगाय की वजह से हर साल किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं, क्योंकि हिरन और नीलगाय के अलावा चिंकारा के पास रहने की कोई जगह नहीं हैं। विभाग के इस कदम से किसानों की फसल और हिरण की प्रजाति दोनों बच सकती है।
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यह है लीलस और कैरू में हिरण और चिंकारा की तादाद
लीलस के आसपास के इलाके में फिलहाल काला हिरण की तादाद 150 से 200 तक आंकी गई है। वहीं चिंकारा महज 40 की तादाद में बचे हैं। इसके अलावा नीलगायों के झुंड भी हैं, जो खाने की खोज में आसपास काफी दूर तक अपना प्रवास करते हैं, जबकि भिवानी के कैरू प्रजनन केंद्र में फिलहाल 78 चिंकारा हैं। कैरू की बणी में 50 से अधिक चिंकारा छोड़े गए हैं। यहां पर भी लगातार चिंकारा की संख्या घट रही है।
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बाड़ेबंदी न कोई दीवार, ग्रामीणों की कमेटी रखेंगी चिंकारा का ध्यान
लीलस के सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र में चिंकारा, काला हिरण और नीलगाय को प्राकृतिक आवास मुहैया कराए जाने के लिए कदम उठाया जा रहा है। करीब 45 एकड़ के प्राकृतिक आवास के चारों तरफ न तो बाड़ेबंदी होगी न ही कोई दीवार खड़ी की जाएगी। किसानों के खेतों से चिंकारा, हिरण और नीलगाय यहां झाड़ियों में रह सकेंगे और आसपास भोजन भी तलाश करेंगे। इससे ये किसानों के खेतों की तरफ भी जाने से हिचकेंगे।

लीलस में 48 एकड़ पंचायती भूमि का प्रस्ताव आया है। जिस पर सामुदायिक संरक्षित क्षेत्र तैयार किया जाएगा। इसकी मैपिंग का काम चल रहा है। जल्द ही ग्रामीणों की कमेटी बनाई जाएगी जो यहां चिंकारा, हिरण का रखरखाव और प्रबंधन सुनिश्चित करेगी। जल्द ही सरकार के समक्ष इसका नोटिफिकेशन भेजा जाएगा। इस जगह में विलुप्त होने की कगार पर पहुंची अन्य वन्य प्रजातियों व दुर्लभ पक्षियों को भी प्राकृतिक आवास मुहैया होंगे।
- वेदप्रकाश, डिविजनल वाइल्ड लाइफ आफिसर, वन्य जीव संरक्षण विभाग हिसार।
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