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Bhiwani News: निजी अस्पताल की लापरवाही पर नेगलिजेंस बोर्ड ने दिया अंतिम बार नोटिस
Mon, 30 Jan 2023 07:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 30 Jan 2023 07:06 PM IST
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भिवानी। सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी हनुमान प्रसाद गुप्ता के परिजनों ने शहर के निजी अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से निजी अस्पताल संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग के नेगलिजेंस बोर्ड निजी अस्पताल की लापरवाही पर अंतिम बार नोटिस दिया है।
लोहारू रेलवे फाटक के पास रहने वाले पीयूष गुप्ता ने बताया कि उनके पिता हनुमान प्रसाद गुप्ता की मृत्यु इलाज में लापरवाही की वजह से पिछले साल सात नवंबर को हो गई थी। पीयूष के मुताबिक, तबीयत नासाज होने के बाद पांच नवंबर 2022 को अपने पिता को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल संचालक ने उन्हें बताया कि उनके अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, चिंता की कोई नहीं है। पीयूष ने बताया कि इलाज में लापरवाही की वजह से सात नवंबर की अल सुबह उनके पिता की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल संचालक से डेथ समरी की मांग की तो यह कहते हुए डेथ समरी देने से मना कर दिया कि हम यह दस्तावेज नगर परिषद को देंगे, आपको नहीं दे पाएंगे। इसके बाद निजी अस्पताल की लापरवाही की शिकायत मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के अलावा एसपी से की तो यह मामला स्वास्थ्य विभाग के नेगलिजेंस बोर्ड को सौंपा गया। पीयूष ने बताया कि नेगलिजेंस बोर्ड ने आरोपी निजी अस्पताल के संचालक के अलावा इसी अस्पताल के एक चिकित्सक को नोटिस भेजकर दस्तावेजों के साथ जांच में शामिल होने को कहा गया। लेकिन, चार नोटिस भेजने के बाद भी आरोपी निजी अस्पताल के संचालक व चिकित्सक जांच में शामिल नहीं हुए। उन्होंने बताया कि चौथे नोटिस में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि आगामी 31 जनवरी को नेगलिजेंस बोर्ड के समक्ष पेश नहीं हुए तो एकतरफा कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
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लोहारू रेलवे फाटक के पास रहने वाले पीयूष गुप्ता ने बताया कि उनके पिता हनुमान प्रसाद गुप्ता की मृत्यु इलाज में लापरवाही की वजह से पिछले साल सात नवंबर को हो गई थी। पीयूष के मुताबिक, तबीयत नासाज होने के बाद पांच नवंबर 2022 को अपने पिता को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल संचालक ने उन्हें बताया कि उनके अस्पताल में हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, चिंता की कोई नहीं है। पीयूष ने बताया कि इलाज में लापरवाही की वजह से सात नवंबर की अल सुबह उनके पिता की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल संचालक से डेथ समरी की मांग की तो यह कहते हुए डेथ समरी देने से मना कर दिया कि हम यह दस्तावेज नगर परिषद को देंगे, आपको नहीं दे पाएंगे। इसके बाद निजी अस्पताल की लापरवाही की शिकायत मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के अलावा एसपी से की तो यह मामला स्वास्थ्य विभाग के नेगलिजेंस बोर्ड को सौंपा गया। पीयूष ने बताया कि नेगलिजेंस बोर्ड ने आरोपी निजी अस्पताल के संचालक के अलावा इसी अस्पताल के एक चिकित्सक को नोटिस भेजकर दस्तावेजों के साथ जांच में शामिल होने को कहा गया। लेकिन, चार नोटिस भेजने के बाद भी आरोपी निजी अस्पताल के संचालक व चिकित्सक जांच में शामिल नहीं हुए। उन्होंने बताया कि चौथे नोटिस में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि आगामी 31 जनवरी को नेगलिजेंस बोर्ड के समक्ष पेश नहीं हुए तो एकतरफा कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
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