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भूमि विवाद और चौधर की लड़ाई बड़ेसरा सरपंच चुनाव के बाद खूनी खेल में बदली

Thu, 16 Jul 2020 01:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 01:12 AM IST
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सूबेसिंह हत्याकांड में परिजनों के बयान दर्ज करती पुलिस। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
भूमि विवाद से शुरू हुआ खूनी खेल विवाद निपटने के बाद भी चल रहा है। अब है चौधर की लड़ाई जो पिछले सरपंच चुनाव से शुरू हुई। जिसमें महिला सरपंच को फर्जी कागजात मिलने के कारण बर्खास्त किया गया। उसे, उसके पति और एक अन्य को जेल जाना पड़ा। इसी रंजिश में अब तक पूर्व सरपंच पवन कुमार के पांच परिजनों की हत्या की जा चुकी है। वर्ष 2017 में बलजीत, भल्लेराम और महेंद्र की हत्या की गई और अक्तूबर 2019 में पूर्व सरपंच पवन की। अब बलजीत और भल्लेराम हत्याकांड के मुख्य गवाह 79 वर्षीय सूबे सिंह की हत्या कर दी गई। इस खूनी खेल से पूर्व सरपंच पवन का पूरा परिवार दहशत में है और आरोपियों के नहीं पकड़े जाने तक उन पर भी खतरा मंडरा रहा है। हालांकि पुलिस की टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है।
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पूर्व सरपंच पवन हत्याकांड में मुख्य गवाह राज कुमार और 2017 के हत्याकांड में गवाह शीलम को पुलिस सुरक्षा भी मिली हुई है। राज कुमार ने अन्य अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस अधिकारियों को शुक्रवार को ही सचेत किया था। जिसके आधार पर पुलिस एक नंबर की कॉल डिटेल भी खंगाल रही थी। पुलिस अपनी जांच पूरी कर पाती, उससे पहले ही हत्याकांड को अंजाम दे दिया गया।
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मैं था निशाने पर, शुक्रवार को ही गुप्त सूचना पर छिपा...
पूर्व सरपंच पवन हत्याकांड के मुख्य गवाह राज कुमार ने बताया कि इस बार मुख्य निशाना वह स्वयं था। मगर शुक्रवार को मिली गुप्त सूचना के बाद पहले पुलिस अधिकारियों को सूचित किया और फिर स्वयं की जान को खतरा मान अपनी रिश्तेदारी में चला गया। हमलावरों का मुख्य निशाना वह स्वयं था। हत्याकांड को आनंद बबलू के छोटे बेटे ने अंजाम दिया है और करीब आठ लाख में अन्य युवकों को शामिल किया।
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पहले भाई, बेटे और भतीजे की हुई थी हत्या
बुजुर्ग सूबे सिंह के बेटे बलजीत की आठ जुलाई 2017 में हत्या की गई थी। इसी दिन उसके भाई भल्लेराम की भी हत्या की गई थी। इसी जानलेवा हमले में घायल महेंद्र ने पांच-छह माह बाद दम तोड़ा था। सूबेसिंह के भतीजे और भल्लेराम के बेटे पूर्व सरपंच पवन की 14 अक्तूबर 2019 में करीब 11 गोलियां मारकर हत्या की गई थी। आठ जुलाई 2017 को हुए हत्याकांड में बलजीत, भल्लेराम के अलावा 80 वर्षीय हुकम सिंह, 85 वर्षीय मल्हाराम, महेंद्र उस शाम खेत से घर लौट रहे थे और करीब 30-35 लोगों ने तेज धार हथियारों से हमला किया था। उसमें 55 वर्षीय बलजीत और 75 वर्षीय भल्लेराम की मौत हो गई थी। पांच-छह माह बाद घायल महेंद्र ने भी दम तोड़ दिया था। पुलिस ने 54 लोगों के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। जिनमें पुलिस जांच में 21 आरोपी मिले।
जमीन से शुरू हुआ विवाद बना चौधर की लड़ाई
पूर्व सरपंच पवन और आनंद बबलू के परिवार के बीच विवाद वर्षों पुराना है। पहले जमीन का विवाद था। कहने को तो दोनों आपस में रिश्तेदार भी थे। पवन के भाई राज कुमार के मामा की लड़की सुदेश से ही आनंद बबलू की शादी हुई है। राज कुमार ने ही यह रिश्ता करवाया था और आज राज कुमार ही निशाने पर है। पहले हुए जमीन विवाद के चलते दोनों सरपंच के चुनाव लड़ने लगे। जमीन विवाद तो बाद में सुलझा लिया गया मगर सरपंची की लड़ाई बढ़ती गई। पिछले चुनाव में आनंद बबलू की पत्नी सुदेश विजेता रही। पूर्व सरपंच पवन की ओर से सुदेश के सर्टिफिकेट पर आपत्ति जताई गई। पूर्व सरपंच के भाई राज कुमार ने इसकी शिकायत की। जांच की तो डिग्री फर्जी पाई गई और सरपंच को बर्खास्त कर दिया गया। इस मामले में महिला सरपंच, सरपंच पति व दो शिक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ और उन्हें जेल जाना पड़ा। इसी रंजिश के चलते दोनों पक्षों में विवाद चल रहा है।
पुलिस को पहले ही किया था आगाह, आठ लाख में हुआ था सौदा
मृतक सूबे सिंह के भतीजे राज कुमार और पोते मोहित ने पुलिस पर आरोप लगाए हैं। राज कुमार ने बताया कि उसने शुक्रवार को ही डीएसपी से मुलाकात कर सारी जानकारी दे दी थी। बताया था कि गांव में हथियार आ गए हैं और आठ लाख में हत्या की साजिश रची गई है। वहीं मोहित ने सवाल उठाए कि वे पिस्तौल के लाइसेंस की मांग लंबे समय से कर रहे हैं मगर उन्हें स्वीकृति नहीं दी जा रही। अब उनके पास बंदूक है, जो बड़ी है और उसे हर समय साथ रखना संभव नहीं है।
आनंद ने अपनी रंजिश में दोनों बेटों को झोंका
वर्ष 2017 में हुए हत्याकांड में पूर्व सरपंच प्रतिनिधि आनंद बबलू खुद शामिल रहा। उस समय 54 लोगों पर केस दर्ज हुआ और पुलिस जांच में 21 आरोपी सामने आए। पूर्व सरपंच पवन हत्याकांड के बाद आनंद ने कहा था कि हमले में सात ही लोग थे। बाकी 14 लोगों को जबरन फंसाया गया जो कि रिश्तेदार हैं और उनकी गिरफ्तारी से उनके परिवार भी बर्बाद हो गए हैं। इसी का बदला लेने के लिए वह हत्या करवा रहा है। अपनी इस रंजिश की आग में पहले उसने अपने बड़े बेटे अंकित के हाथों पूर्व सरपंच पवन की हत्या करवाई। अब छोटे बेटे अमन पर बुजुर्ग सूबेसिंह की हत्या के आरोप हैं।
यूं चला है अब तक बड़ेसरा विवाद
- जनवरी 2016 में आनंद बबलू और पूर्व सरपंच पवन कुमार के परिवार के बीच विवाद की शुरुआत हुई
- 21 अप्रैल 2016 : आनंद व कुछ अन्य ने पूर्व सरपंच पवन के चचेरे भाई बलराज से मारपीट की, दो लोगों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करवाया, छेड़छाड़ के आरोप लगे
- 22 जुलाई 2016 : पूर्व सरपंच पवन के चचेरे भाई राज कुमार के साथ मारपीट की गई। हवाई फायर किए गए।
- 07 जुलाई 2017 : खेत से लौट रहे पूर्व सरपंच पवन के परिवार पर तेजधार हथियारों से हमला किया गया। जिसमें बलजीत की गोली लगने से मौके पर मौत हुई। घायल भल्लेराम ने एक-दो दिन बाद दम तोड़ा और घायल महेंद्र सिंह ने करीब छह माह बाद दम तोड़ा। हमले में पांच-छह लोग घायल हुए।
- 14 अक्तूबर 2019 : पूर्व सरपंच पवन पर एक राजनीतिक जनसभा से लौटते समय रात करीब साढ़े आठ बजे गोलियां बरसाईं गईं। 11 गोलियां उसे लगी। जिससे उसकी मौत हुई।

जेल में बंद आनंद बबलू, उसके भाई लहना, पत्नी सुदेश, पुत्र अंकित पर जेल के अंदर से साजिश रचने और आनंद के छोटे बेटे अमन व तीन-चार अन्य के खिलाफ बुजुर्ग सूबे सिंह की हत्या का केस दर्ज किया गया है। पुलिस टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही हैं।
- वीरेंद्र सिंह, डीएसपी हेडक्वार्टर

सूबेसिंह का फाइल फोटो

सूबेसिंह का फाइल फोटो- फोटो : Bhiwani

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