अधूरा सपना: नेशनल चैंपियनशिप में मां के लिए जीता स्वर्ण पदक, घर लौटा बेटा तो कह चुकी थी अलविदा
हरियाणा के भिवानी में मुक्केबाज ने गोल्ड मेडल जीता। मां का सपना था कि बेटा स्वर्ण पदक जीते। कड़ी मेहनत के बाद उसने इस सपने को सच कर दिखाया लेकिन मां स्वर्ण पदक को नहीं देख पाई। बेटा जब घर लौटा तो उसे मां की मौत की खबर मिली। माहौल पूरा गमगीन हो गया और मां का सपना अधूरा ही रह गया।
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कर्नाटक में नेशनल बॉक्सिंग सर्विसेज टूर्नामेंट में गोल्डन ब्वॉय आकाश ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह जिस पदक को जीतकर अपनी मां की झोली में डालेगा, वही मेडल उसकी मां की फोटो का हार बन जाएगा। मिनी क्यूबा के नेशनल चैंपियन आकाश ने अपनी मां के लिए कड़े मुकाबले में स्वर्ण पदक जीता था।
मगर जब वह घर पहुंचा तो उसे मां नहीं मिली। उसकी मां उसके लौटने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह चुकी थी। आकाश अपनी मां की मौत की खबर सुनकर फूट-फूटकर रोने लगा और जो मेडल वह अपनी मां की झोली में डालने को लाया था, उसे मां की फोटो पर चढ़ा दिया।
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हाल ही में कर्नाटक में नेशनल बॉक्सिंग सर्विसेज टूर्नामेंट हुआ था। जिनमें भिवानी के गांव पालुवास निवासी 20 वर्षीय मुक्केबाज आकाश 13 सितंबर को 54 किलोग्राम भारवर्ग में भाग लेने से पहले अपनी बीमार मां संतोष को अस्पताल छोड़कर रवाना हुआ था। 14 सितंबर से ये टूर्नामेंट शुरू हुआ और आकाश ने एक के बाद एक मुकाबला जीत कर 21 सितंबर को स्वर्ण पदक जीता।
22 सितंबर की शाम आकाश गांव पहुंचा। घर आते समय आकाश की खुशियों का ठिकाना नहीं था। पर घर पहुंचते ही सारी खुशियां मातम में बदल गईं। जब आकाश को घर में मां नहीं मिली। आकाश की मां की मौत 14 सितंबर की रात को हो चुकी थी लेकिन परिजनों के कहने पर कोच ने भी आकाश को ये जानकारी नहीं दी।
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आकाश ने बताया कि मां ने स्वर्ण पदक लाने को लेकर बहुत संघर्ष व मेहनत की थी। अपनी मां के इस संघर्ष के कारण ही वो गोल्ड मेडल जीत पाया। आकाश ने कहा कि उसकी मां ने कहा था कि वो गोल्ड मेडल देखना चाहती है। आकाश ने बताया कि अब वो अगले महीने सर्बिया में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी कर रहा है और उसके बाद कॉमनवेल्थ व एशियन और एक दिन ओलंपिक में गोल्ड जीतकर अपनी मां का सपना पूरा करना चाहता था।
आकाश के चाचा भंवर सिंह ने बताया कि आकाश को मां की मौत की सूचना उसके भविष्य को देखते हुए नहीं दी थी। वहीं उनके कहने पर कोच ने भी बात मानी और आकाश व साथी मुक्केबाजों के फोन जमा कर लिए थे। उन्होने बताया कि आकाश के पिता की मौत साल 2008 में हो चुकी है। चाचा ने कहा कि आकाश मे अपनी मां के सपने को पूरा किया लेकिन उसकी मां का गोल्ड देखने का सपना पूरा नहीं हो सका।