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दर्जनभर से अधिक गांवों में गहराया पेयजल संकट
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Mon, 26 Oct 2015 01:07 AM IST
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भिवानी। बेटा गाम में तो प्यासे मरन की नौबत आगी। दूर तै पानी ढ़ोना पड़ रहया सै। कित तो डांगरा नै पानी प्यावा और कित तै अपने खातर ल्यावा समझ कोनी आ रहा। यह बात कौंट गांव में पानी ढो रही बुजुर्ग महिला प्रभातो देवी ने कही। कौंट गांव ही नहीं शहर क्षेत्र के करीब दर्जनभर गांवों में ग्रामीण पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे है। पिछली दफा निर्धारित से 30 प्रतिशत तक ही पानी मिल पाया। जिस कारण गांवों के जलघरों के टैंक सूख चुके हैं और लोग पानी को तरस रहे हैं।
दरअसल अक्तूबर महीने के चार तारीख को नहर आई थी, लेकिन पानी बहुत कम रहा। एक सप्ताह की जगह तीन ही दिन पानी आया और वह भी बहुत कम। गांवों के टैंकों में बमुश्किल एक फीट तक पानी भर पाया, जो ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए नाकाफी रहा। अब मित्ताथल हैड के तहत आने वाले अनेक गांवों और मानहेरू माइनर के सभी गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। ग्रामीण महिलाएं दूर-दराज के कुओं, हैंडपंप से ट्यूबवेल से पानी ढो रही है। ग्रामीणों का अधिकतर समय पानी ढोने में ही बीत रहा है। पालतू पशुओं गाय-भैंस आदि के लिए ज्यादा समस्या खड़ी हो गई है।
कौंट गांव के तीन टैंक, तीनों सूखे
कौंट गांव में जलघर के तीन टैंक और तीनों ही सूखे पड़े है। ग्रामीण कुलवंत कोंटिया ने बताया कि गांव में पिछले 12 महीने से पेयजल संकट है। कभी थोड़ा बहुत पानी आता है। टैंक टेल पर है। ऐसे में नहर का पानी टैंकों तक नहीं पहुंच पाता है। निनाण वाटर वर्क्स के साथ जोड़ने के समय तो ठीक पानी आता था। मगर अब तो पिछले काफी महीनों से टैंक भरे ही नहीं है, जिस कारण पूरा गांव पानी के लिए परेशान है।
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इन गांवों में गहराया पेयजल संकट
शहर के पास के कौंट, उमरावत, नाथुवास, निनाण, मानहेरू माइनर के मानहेरू, नांगल, अजीतपुर आदि गांवों में गंभीर पेयजल संकट है। पानी की किल्लत से जूझ रहे अधिकतर गांवों को करीब 10 दिन तक और ऐसे ही पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा। दरअसल 10 दिन बाद नहर आने की उम्मीद है। फिलहाल तक विभाग ट्यूबवेल चलाकर पेयजल सप्लाई की प्लानिंग कर रहा है।
वर्जन::::
डिग्गी में ही पानी नहीं तो कहां से पानी सप्लाई करें। नहर में पानी बहुत कम आया। जो आया था तो सप्लाई हो चुका है। अब नहर आने का ही इंतजार है।
जयप्रकाश, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग
वर्जन:::
पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रयास किए जा रहे है। नहर नहीं आने तक ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई की जाएगी।
संजीव त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो 07, 08, 09 व 10
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दरअसल अक्तूबर महीने के चार तारीख को नहर आई थी, लेकिन पानी बहुत कम रहा। एक सप्ताह की जगह तीन ही दिन पानी आया और वह भी बहुत कम। गांवों के टैंकों में बमुश्किल एक फीट तक पानी भर पाया, जो ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए नाकाफी रहा। अब मित्ताथल हैड के तहत आने वाले अनेक गांवों और मानहेरू माइनर के सभी गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। ग्रामीण महिलाएं दूर-दराज के कुओं, हैंडपंप से ट्यूबवेल से पानी ढो रही है। ग्रामीणों का अधिकतर समय पानी ढोने में ही बीत रहा है। पालतू पशुओं गाय-भैंस आदि के लिए ज्यादा समस्या खड़ी हो गई है।
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कौंट गांव के तीन टैंक, तीनों सूखे
कौंट गांव में जलघर के तीन टैंक और तीनों ही सूखे पड़े है। ग्रामीण कुलवंत कोंटिया ने बताया कि गांव में पिछले 12 महीने से पेयजल संकट है। कभी थोड़ा बहुत पानी आता है। टैंक टेल पर है। ऐसे में नहर का पानी टैंकों तक नहीं पहुंच पाता है। निनाण वाटर वर्क्स के साथ जोड़ने के समय तो ठीक पानी आता था। मगर अब तो पिछले काफी महीनों से टैंक भरे ही नहीं है, जिस कारण पूरा गांव पानी के लिए परेशान है।
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इन गांवों में गहराया पेयजल संकट
शहर के पास के कौंट, उमरावत, नाथुवास, निनाण, मानहेरू माइनर के मानहेरू, नांगल, अजीतपुर आदि गांवों में गंभीर पेयजल संकट है। पानी की किल्लत से जूझ रहे अधिकतर गांवों को करीब 10 दिन तक और ऐसे ही पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा। दरअसल 10 दिन बाद नहर आने की उम्मीद है। फिलहाल तक विभाग ट्यूबवेल चलाकर पेयजल सप्लाई की प्लानिंग कर रहा है।
वर्जन::::
डिग्गी में ही पानी नहीं तो कहां से पानी सप्लाई करें। नहर में पानी बहुत कम आया। जो आया था तो सप्लाई हो चुका है। अब नहर आने का ही इंतजार है।
जयप्रकाश, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग
वर्जन:::
पेयजल संकट से निपटने के लिए प्रयास किए जा रहे है। नहर नहीं आने तक ट्यूबवेल से पानी की सप्लाई की जाएगी।
संजीव त्यागी, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो 07, 08, 09 व 10