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Bhiwani News: मात्र पांच हजार मेहनताना पर स्कूल में छोटे बच्चों को पढ़ाती थी मनीषा
Wed, 27 Aug 2025 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 27 Aug 2025 12:20 AM IST
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सिंघानी का किड़स केयर प्ले-वे स्कूल का मुख्य द्वार।
भिवानी (ढिगावा)। मनीषा मौत मामले में अब उस स्कूल का प्रबंधन भी सामने आया है जिसमें वह छोटे बच्चों को पढ़ाती थी। गांव सिंघानी स्थित किड्स केयर प्ले-वे स्कूल के संचालक रोहित दहिया ने बताया कि मनीषा को नौ जुलाई से उनके स्कूल में पांच हजार रुपये मेहनताना पर बतौर शिक्षिका नियुक्त किया गया था। लेकिन पहला मेहनताना भी मिलने से पहले ही 11 अगस्त को वह लापता हो गई और 13 अगस्त को उसका शव सिंघानी नहर के पास बरामद हुआ। परिवार को भी उसका मेहनताना नहीं मिल सका।
स्कूल संचालक रोहित दहिया ने बताया कि सामान्य दिनों में मनीषा छुट्टी के समय ही घर चली जाती थी लेकिन 11 अगस्त को वह करीब आधा घंटा देरी से निकली थी। उस दिन बच्चों की परीक्षा थी इसलिए अन्य स्टाफ सदस्य भी देर से घर लौटे। मनीषा ने बस चालक को बताया था कि वह सिंघानी के आइडियल नर्सिंग कॉलेज में दाखिले संबंधी जानकारी लेने जा रही है।
उन्होंने बताया कि मनीषा ने तीन जुलाई को नौकरी की बात की थी और चार जुलाई को इंटरव्यू देने आई थी। सभी सवालों का सही जवाब देने पर उसका चयन कर लिया गया था। विद्यालय में करीब 100 बच्चे पढ़ते हैं और मनीषा के अलावा चार अन्य महिला शिक्षिकाएं कार्यरत हैं।
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रोहित दहिया के अनुसार मनीषा ने शुरुआत में ही यह बताया था कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और वह बीएससी नर्सिंग करके आगे पढ़ाई करना चाहती है। उसने विज्ञान संकाय से 12वीं कक्षा 85 फीसदी अंकों के साथ पास की थी। बच्चों को वह अच्छे से पढ़ाती थी। स्कूल की तरफ से उसके लिए नर्सिंग कॉलेज की बस से घर से स्कूल आने-जाने की व्यवस्था भी की गई थी।
मनीषा की मौत के बाद से नर्सिंग कॉलेज और स्कूल प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठे थे। अब नर्सिंग कॉलेज प्रबंधन के बाद विद्यालय प्रबंधन भी सामने आ चुका है और उन्होंने अपनी-अपनी सफाई दी है।
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स्कूल संचालक रोहित दहिया ने बताया कि सामान्य दिनों में मनीषा छुट्टी के समय ही घर चली जाती थी लेकिन 11 अगस्त को वह करीब आधा घंटा देरी से निकली थी। उस दिन बच्चों की परीक्षा थी इसलिए अन्य स्टाफ सदस्य भी देर से घर लौटे। मनीषा ने बस चालक को बताया था कि वह सिंघानी के आइडियल नर्सिंग कॉलेज में दाखिले संबंधी जानकारी लेने जा रही है।
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उन्होंने बताया कि मनीषा ने तीन जुलाई को नौकरी की बात की थी और चार जुलाई को इंटरव्यू देने आई थी। सभी सवालों का सही जवाब देने पर उसका चयन कर लिया गया था। विद्यालय में करीब 100 बच्चे पढ़ते हैं और मनीषा के अलावा चार अन्य महिला शिक्षिकाएं कार्यरत हैं।
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रोहित दहिया के अनुसार मनीषा ने शुरुआत में ही यह बताया था कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और वह बीएससी नर्सिंग करके आगे पढ़ाई करना चाहती है। उसने विज्ञान संकाय से 12वीं कक्षा 85 फीसदी अंकों के साथ पास की थी। बच्चों को वह अच्छे से पढ़ाती थी। स्कूल की तरफ से उसके लिए नर्सिंग कॉलेज की बस से घर से स्कूल आने-जाने की व्यवस्था भी की गई थी।
मनीषा की मौत के बाद से नर्सिंग कॉलेज और स्कूल प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठे थे। अब नर्सिंग कॉलेज प्रबंधन के बाद विद्यालय प्रबंधन भी सामने आ चुका है और उन्होंने अपनी-अपनी सफाई दी है।