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युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को मछली पालन के लिए करें जागरूक : डीसी
Wed, 23 Apr 2025 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 23 Apr 2025 10:45 PM IST
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लघु सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में मत्स्य अधिकारियों की बैठक लेते उपायुक्त महावीर कौशिक।
भिवानी। उपायुक्त महावीर कौशिक की अध्यक्षता में लघु सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जिलास्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में उपायुक्त ने मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे युवाओं के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों को भी मछली पालन के प्रति जागरूक करें। सरकार की ओर से मछली पालन के लिए खूब सब्सिडी दी जा रही है।
उपायुक्त ने कहा कि मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना चलाई गई है। योजना के तहत सामान्य वर्ग के लोगों की कुल इकाई लागत का 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। लोगों को इन योजनाओं की जानकारी देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
जिला मत्स्य अधिकारी सिकंदर सांगवान ने बताया कि जिले में 2025-26 वर्ष के लिए 11 करोड़ 30 लाख रुपये का अनुमानित बजट रखा गया है, जो मछली पालन पर खर्च होगा। जिले में मछली पालन का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2023-24 में जिला में 742.5 एकड़ में मत्स्य पालन होता था, जो 2024-25 में बढ़ाकर 1007.5 एकड़ हो गया है। जिले में फिलहाल 662.5 एकड़ में खारे पानी में तथा 345 एकड़ में मीठे पानी में मछली पालन किया जा रहा है। लोगों को मछली पालन के लिए जागरूक किया जा रहा है। सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी की जानकारी दी जा रही है।
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उन्होंने बताया कि आमदनी बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूहों व बेरोजगार युवाओं को मछली पालन के प्रति जागरूक किया जाएगा। जलभराव और अयोग्य खेती भूमि पर मछली पालन के लिए जोर दिया जाएगा। विभाग का प्रमुख लक्ष्य जिले में मछली पालन के क्षेत्र को अधिक से अधिक बढ़ाना है। इस दौरान सीईओ जिला परिषद अजय चोपड़ा, कृषि विभाग से संजय कुमार, पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत, कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. गुलाब, एलडीएम कार्यालय से राकेश कुमार मौजूद रहे।
अमेरिका और जापान में निर्यात होती हैं मछलियां
बैठक के दौरान गांव झुप्पा निवासी मछली पालक सुनील लाठर ने डीसी को जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने कोरोना काल के दौरान अपने गांव में करीब आठ एकड़ से मछली पालन शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने अपने चार-पांच अन्य साथियों को मछली पालन में साथ लिया। अब वे गांव ढाणी भाखड़ा में लगभग 50 एकड़ में मछली पालन कर रहे हैं। उनके मछली पालन केंद्र से अमेरिका और जापान में मछली निर्यात होती हैं।
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उपायुक्त ने कहा कि मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना चलाई गई है। योजना के तहत सामान्य वर्ग के लोगों की कुल इकाई लागत का 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। लोगों को इन योजनाओं की जानकारी देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
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जिला मत्स्य अधिकारी सिकंदर सांगवान ने बताया कि जिले में 2025-26 वर्ष के लिए 11 करोड़ 30 लाख रुपये का अनुमानित बजट रखा गया है, जो मछली पालन पर खर्च होगा। जिले में मछली पालन का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2023-24 में जिला में 742.5 एकड़ में मत्स्य पालन होता था, जो 2024-25 में बढ़ाकर 1007.5 एकड़ हो गया है। जिले में फिलहाल 662.5 एकड़ में खारे पानी में तथा 345 एकड़ में मीठे पानी में मछली पालन किया जा रहा है। लोगों को मछली पालन के लिए जागरूक किया जा रहा है। सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सब्सिडी की जानकारी दी जा रही है।
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उन्होंने बताया कि आमदनी बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूहों व बेरोजगार युवाओं को मछली पालन के प्रति जागरूक किया जाएगा। जलभराव और अयोग्य खेती भूमि पर मछली पालन के लिए जोर दिया जाएगा। विभाग का प्रमुख लक्ष्य जिले में मछली पालन के क्षेत्र को अधिक से अधिक बढ़ाना है। इस दौरान सीईओ जिला परिषद अजय चोपड़ा, कृषि विभाग से संजय कुमार, पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत, कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. गुलाब, एलडीएम कार्यालय से राकेश कुमार मौजूद रहे।
अमेरिका और जापान में निर्यात होती हैं मछलियां
बैठक के दौरान गांव झुप्पा निवासी मछली पालक सुनील लाठर ने डीसी को जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने कोरोना काल के दौरान अपने गांव में करीब आठ एकड़ से मछली पालन शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने अपने चार-पांच अन्य साथियों को मछली पालन में साथ लिया। अब वे गांव ढाणी भाखड़ा में लगभग 50 एकड़ में मछली पालन कर रहे हैं। उनके मछली पालन केंद्र से अमेरिका और जापान में मछली निर्यात होती हैं।