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Bhiwani News: कार्यशाला में बताए बच्चों के कानूनी अधिकार
Thu, 28 Nov 2024 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 28 Nov 2024 02:13 AM IST
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भिवानी। एडीआर सेंटर के सभागार में कानूनी सेवा इकाई की चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला में सीजेएम और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन कुमार और इकाई के चेयरमैन, सेवानिवृत्त न्यायाधीश डीएस श्योराण ने भी जानकारी दी।
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के लिए कानूनी सहायता को और प्रभावी बनाना है। सीजेएम व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन कुमार ने बताया कि प्रत्येक जिले में बच्चों के लिए कानूनी सेवा इकाई (एलएसयूसी) का गठन किया गया है। यह इकाई बच्चों के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करती है। यह सुनिश्चित करती है कि बच्चों को सही और न्यायपूर्ण कानूनी सहायता मिले।
उन्होंने कहा कि 2024 में बाल-मैत्रीपूर्ण कानूनी सेवाएं योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके तहत बच्चों को विभिन्न कानूनी सेवाओं से लाभान्वित किया जाएगा। पवन कुमार ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य न सिर्फ बच्चों को कानूनी सहायता प्रदान करना है, बल्कि उन्हें सरकारी लाभ दिलाने में भी मदद करना है। यह कदम बच्चों के समग्र विकास और उनके अधिकारों की सुरक्षा में मददगार होगा।
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सेवानिवृत्त न्यायाधीश और इकाई के चेयरमैन डीएस श्योराण ने बच्चों के लिए कानूनी सहायता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का यह दायित्व है कि वह बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर उनके लिए ऐसे मंच तैयार करे, जहां वे बिना किसी डर के अपनी समस्याओं को सामने रख सकें।
डीएलएडीसी नरेंद्र कांटीवाल ने बताया कि कानूनी सहायता इकाइयों के माध्यम से बच्चों को विशेष कानूनी सेवा प्रदान की जाती है। जो उनके बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला कानूनी पेशेवरों को आवश्यक कौशल और जानकारी देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है ताकि वे बच्चों के मामलों में सही दिशा में कानूनी सहायता प्रदान कर सकें। यह कार्यशाला विशेष रूप से अधिवक्ताओं, अधिकार मित्रों और अन्य कानूनी पेशेवरों के लिए आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य उन्हें बच्चों से संबंधित कानूनी मामलों में दक्षता प्रदान करना है ताकि वे बच्चों के अधिकारों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सकें।
कार्यशाला के दौरान कानूनी सेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं, योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी गई और बच्चों के कानूनी मामलों में बेहतर समर्पण के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम का समापन बच्चों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और एक समर्पित कानूनी सहायता तंत्र बनाने के उद्देश्य से किया जाएगा।
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कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के लिए कानूनी सहायता को और प्रभावी बनाना है। सीजेएम व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन कुमार ने बताया कि प्रत्येक जिले में बच्चों के लिए कानूनी सेवा इकाई (एलएसयूसी) का गठन किया गया है। यह इकाई बच्चों के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करती है। यह सुनिश्चित करती है कि बच्चों को सही और न्यायपूर्ण कानूनी सहायता मिले।
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उन्होंने कहा कि 2024 में बाल-मैत्रीपूर्ण कानूनी सेवाएं योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके तहत बच्चों को विभिन्न कानूनी सेवाओं से लाभान्वित किया जाएगा। पवन कुमार ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य न सिर्फ बच्चों को कानूनी सहायता प्रदान करना है, बल्कि उन्हें सरकारी लाभ दिलाने में भी मदद करना है। यह कदम बच्चों के समग्र विकास और उनके अधिकारों की सुरक्षा में मददगार होगा।
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सेवानिवृत्त न्यायाधीश और इकाई के चेयरमैन डीएस श्योराण ने बच्चों के लिए कानूनी सहायता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का यह दायित्व है कि वह बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर उनके लिए ऐसे मंच तैयार करे, जहां वे बिना किसी डर के अपनी समस्याओं को सामने रख सकें।
डीएलएडीसी नरेंद्र कांटीवाल ने बताया कि कानूनी सहायता इकाइयों के माध्यम से बच्चों को विशेष कानूनी सेवा प्रदान की जाती है। जो उनके बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला कानूनी पेशेवरों को आवश्यक कौशल और जानकारी देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है ताकि वे बच्चों के मामलों में सही दिशा में कानूनी सहायता प्रदान कर सकें। यह कार्यशाला विशेष रूप से अधिवक्ताओं, अधिकार मित्रों और अन्य कानूनी पेशेवरों के लिए आयोजित की गई है। इसका उद्देश्य उन्हें बच्चों से संबंधित कानूनी मामलों में दक्षता प्रदान करना है ताकि वे बच्चों के अधिकारों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सकें।
कार्यशाला के दौरान कानूनी सेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं, योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी गई और बच्चों के कानूनी मामलों में बेहतर समर्पण के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम का समापन बच्चों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और एक समर्पित कानूनी सहायता तंत्र बनाने के उद्देश्य से किया जाएगा।