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Bhiwani News: जुई बिचली को 46 साल में नहीं मिली इंचभर जमीन

Fri, 25 Aug 2023 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 25 Aug 2023 10:58 PM IST
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Jui Bichli did not get an inch of land in 46 years
जूई (भिवानी)। गांव की उन्नति, उसके विकास के लिए सबसे जरूरी है कि उस गांव की पंचायत के पास उसकी खुद की जमीन हो। पंचायत के पास जितनी ज्यादा जमीन होगी, गांव उतना ज्यादा विकसित होगा। लेकिन उस गांव के लोग क्या करें, जिसकी पंचायत के पास एक इंच जमीन भी न हो। प्रदेश में शायद जूई बिचली एक मात्र ऐसी ग्राम पंचायत है, जिसके पास एक इंच भी जमीन नहीं है।
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साल 1977 में जूई बिचली पंचायत बनाई गई थी। मगर जूई बिचली को कोई जमीन नहीं मिली। तब से आज तक पंचायत के विकास कार्य ठप पड़े हैं। अगर गांव के पास जमीन होती तो भौगोलिक दृष्टि से आज जूई उपमंडल होता। चकबंदी न होने से गांव का विकास बाधित हुआ और गांव साल दर साल पिछड़ता जा रहा है।
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1977 में जूई खुर्द से अलग कर जूई बिचली बनी पंचायत
साल 1977 से पहले जूई कलां व जूई खुर्द दो पंचायत थीं। उस समय जूई खुर्द से अलग बसे गांव उगमना चिंदड़िया के लोग ज्यादा जागरूक होने के चलते ये जूई खुर्द नाम अपने गांव का नाम करवाने में सफल रहे और तत्काल जूई खुर्द को जूई बिचली का नाम दे दिया गया। उगमना चिंदड़िया को जूई खुर्द नाम मिलने से गांव की सारी जमीन व हद उसके नाम हो गई और जूई बिचली की पंचायत को एक इंच जमीन नहीं मिली। तब से लेकर आज तक गांव के सभी विकास कार्य ठप पड़े हैं।
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जूई बिचली में बने हर सरपंच ने उठाई आवाज
1977 में जब जूई बिचली को अलग ग्राम पंचायत बनाया गया तब किशनलाल जांगड़ा को निर्विरोध सरपंच बनाया गया। उनके बाद जानकीदास, हीरालाल बागड़ू, सतबीर लांबा, उमेद लांबा, सरबती देवी, भागीरथ शर्मा, भगवती देवी, जगदीश धानक, ओमपति देवी, सोमबीर सिंह व वर्तमान में सुषमा देवी सरपंच बनी हैं। ऐसा नहीं है कि किसी भी सरपंच ने इस समस्या के बारे में आवाज नहीं उठाई हो। लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई और गांव विकास की दृष्टि से दिन प्रतिदिन पिछड़ता गया।
गांव में नहीं हो पाए ये विकास कार्य
जूई बिचली के ग्रामीण विजय सेठ, चत्तर सिंह लांबा, रामफल बागड़ू, राकेश लांबा ने बताया कि 1977 से अलग बनी पंचायत के पास जमीन नहीं होने के चलते खुद का पंचायतघर तक नहीं है। गांव में सामुदायिक भवन, पीएचसी भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, व्यायामशाला, स्टेडियम जैसी कुछ भी सुविधा नहीं बन पाई है। युवाओं के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और अन्य सुविधाएं नहीं होने से उनका भविष्य अंधकार में है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का नाम जूई खुर्द करने व गांव की चकबंदी करवाने की मांग की ताकि गांव में विकास हो सके।

गांव की चकबंदी जरूरी : सुषमा देवी
जूई बिचली की सरपंच सुषमा देवी ने कहा कि गांव के विकास कार्य ठप पड़े हैं। कई बार प्रशासन को चकबंदी के लिए लिखा गया है, लेकिन सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है। हालात ये हैं कि गांव में ग्राम सभा करने को भी स्थान नहीं है। पंचायत करने के लिए सरकारी अवकाश का इंतजार करना पड़ता है ताकि मिडिल स्कूल में पंचायत की जा सके। प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द जूई खुर्द की चकबंदी करे ताकि गांव में विकास कार्य गति पकड़ सके।
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