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Bhiwani News: दो साल में बनकर होना था तैयार, अब चार साल दो माह में सिर्फ 75 फीसदी पुल हुआ पूरा
Sun, 28 Apr 2024 12:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 28 Apr 2024 12:50 AM IST
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भिवानी से महम मुख्य मार्ग पर गांव कालुवास के पास निर्माणाधीन पुल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन त
भिवानी। दो साल में पुल बनकर तैयार होना था, लेकिन पिछले चार साल और पूरे दो माह बीत जाने के बाद भी रेलवे ओवरब्रिज केवल 75 फीसदी ढांचा ही पूरा कर पाया है। भिवानी-महम मुख्य मार्ग पर गांव कालुवास के समीप 860 मीटर लंबा रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम काफी धीमा चल रहा है। अब रेलवे ओवरब्रिज निर्माण कार्य में हाईटेंशन बिजली की लाइन बड़ी बाधा बन गई है। इसे शिफ्ट कराने को लेकर भी पीडब्ल्यूडी और बिजली निगम के बीच अब ठन गई है।
गांव कालुवास के पास रेलवे फाटक पर फरवरी 2020 में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण शुरू हुआ था। पुल तैयार करने की दो साल मियाद निर्धारित की गई थी। पुल निर्माण कंपनी को कोरोना की वजह से एक्सटेंशन भी मिली, मगर पहली कंपनी का काम करने के बाद अब नई कंस्ट्रक्शन कंपनी को ये काम अलॉट हुआ। इस एजेंसी को करीब पांच करोड़ के बजट में ये पुल अब तैयार करना है। जबकि इससे पहले 16 करोड़ 24 लाख रुपये के बजट से इस पुल का काम शुरू हुआ था। पुल के डिजाइन में फेरबदल किया जाना भी इसकी देरी की एक वजह बना। हालांकि अब नई कंपनी को ये काम जून तक हर हाल में पूरा करना है। अधिकारियों का भी दावा है कि जून के बाद इस पर ट्रैफिक बहाल हो जाएगा।
860 मीटर लंबाई साढ़े नौ मीटर चौड़ा बनना है रेलवे ओवरब्रिज
भिवानी-महम मुख्य मार्ग पर कालुवास के पास 860 मीटर लंबा और साढ़े नौ मीटर चौड़ा रेलवे ओवरब्रिज बनना है। पुल का डिजाइन बदलने के बाद पहले छह पिलर लगने थे अब नौ पिलर हो गए हैं। इसी तरह 22 मीटर गहराई के बजाय साढ़े 28 मीटर गहराई तक पुल को मजबूती दी जानी है। अभी तक टॉप सेक्शन भी कुछ काम बाकी है। पुल के दोनों छौर पर फिलहाल मिट्टी भराई और रिटेनिंग वाल तैयार की जा रही हैं।
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चार साल से रोडवेज बसों में 10 रुपये अधिक भुगतान कर लोग कर रहे सफर
भिवानी से महम करीब 25 किलोमीटर दूर है। भिवानी से महम तक का पहले रोडवेज बसों में किराया मात्र 25 रुपये लगता था, लेकिन पिछले चार साल तक 35 रुपये किराया वसूला जा रहा है, क्योंकि रोडवेज बसों को भी गुजरानी गांव से होकर करीब सात किलोमीटर का दायरा अधिक तय करना पड़ता है, क्योंकि बसों को पुल निर्माण के महज 100 मीटर दायरे की वजह से सात किलोमीटर अधिक चक्कर लगाने पर मजबूर होना पता है, इसमें अधिक किराया तो लगता ही है सफर का समय भी ज्यादा लगता है।
सर्विस रोड की भी हो गई हालत खस्ता, वाहन खा रहे हिचकोला
कालुवास फाटक पर चल रहे रेलवे ओवरब्रिज निर्माण कार्य के दौरान सर्विस रोड को बनाने से पहले ही चालू करना पड़ा है। क्योंकि ये पुल दो साल के बजाय चार साल बाद भी नहीं बना है। ऐसे में अब रोजाना भिवानी से महम और वाया चंडीगढ़ तक जाने वाले सैकड़ों वाहनों की आवाजाही से सर्विस रोड की हालत भी खस्ता हो गई है। इस पर वाहन भी हिचकोला खा रहे हैं, कई बार तो वाहनों के पलटने की नौबत भी आई है, क्योंकि बारिश के बाद अधूरा पड़ा सर्विस रोड गहरे गड्ढों से घिर गया है।
भिवानी -महम मुख्य मार्ग पर कालुवास फाटक का रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम करीब 75 फीसदी पूरा हो चुका है। इस पुल में बिजली की कुछ लाइनें शिफ्ट हो चुकी हैं, लेकिन हवाई पट्टी की तरफ से हाईटेंशन लाइन अभी भी शिफ्ट होना बाकी है। इस संबंध में विभाग की इलेक्ट्रिक विंग बिजली निगम अधिकारियों से बातचीत कर इस लाइन को जल्द से जल्द शिफ्ट कराने का प्रयास कर रही है। जून तक इस रेलवे ओवरब्रिज को चालू कर दिया जाएगा।
-लोकेश डागर, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी भिवानी।
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गांव कालुवास के पास रेलवे फाटक पर फरवरी 2020 में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण शुरू हुआ था। पुल तैयार करने की दो साल मियाद निर्धारित की गई थी। पुल निर्माण कंपनी को कोरोना की वजह से एक्सटेंशन भी मिली, मगर पहली कंपनी का काम करने के बाद अब नई कंस्ट्रक्शन कंपनी को ये काम अलॉट हुआ। इस एजेंसी को करीब पांच करोड़ के बजट में ये पुल अब तैयार करना है। जबकि इससे पहले 16 करोड़ 24 लाख रुपये के बजट से इस पुल का काम शुरू हुआ था। पुल के डिजाइन में फेरबदल किया जाना भी इसकी देरी की एक वजह बना। हालांकि अब नई कंपनी को ये काम जून तक हर हाल में पूरा करना है। अधिकारियों का भी दावा है कि जून के बाद इस पर ट्रैफिक बहाल हो जाएगा।
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860 मीटर लंबाई साढ़े नौ मीटर चौड़ा बनना है रेलवे ओवरब्रिज
भिवानी-महम मुख्य मार्ग पर कालुवास के पास 860 मीटर लंबा और साढ़े नौ मीटर चौड़ा रेलवे ओवरब्रिज बनना है। पुल का डिजाइन बदलने के बाद पहले छह पिलर लगने थे अब नौ पिलर हो गए हैं। इसी तरह 22 मीटर गहराई के बजाय साढ़े 28 मीटर गहराई तक पुल को मजबूती दी जानी है। अभी तक टॉप सेक्शन भी कुछ काम बाकी है। पुल के दोनों छौर पर फिलहाल मिट्टी भराई और रिटेनिंग वाल तैयार की जा रही हैं।
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चार साल से रोडवेज बसों में 10 रुपये अधिक भुगतान कर लोग कर रहे सफर
भिवानी से महम करीब 25 किलोमीटर दूर है। भिवानी से महम तक का पहले रोडवेज बसों में किराया मात्र 25 रुपये लगता था, लेकिन पिछले चार साल तक 35 रुपये किराया वसूला जा रहा है, क्योंकि रोडवेज बसों को भी गुजरानी गांव से होकर करीब सात किलोमीटर का दायरा अधिक तय करना पड़ता है, क्योंकि बसों को पुल निर्माण के महज 100 मीटर दायरे की वजह से सात किलोमीटर अधिक चक्कर लगाने पर मजबूर होना पता है, इसमें अधिक किराया तो लगता ही है सफर का समय भी ज्यादा लगता है।
सर्विस रोड की भी हो गई हालत खस्ता, वाहन खा रहे हिचकोला
कालुवास फाटक पर चल रहे रेलवे ओवरब्रिज निर्माण कार्य के दौरान सर्विस रोड को बनाने से पहले ही चालू करना पड़ा है। क्योंकि ये पुल दो साल के बजाय चार साल बाद भी नहीं बना है। ऐसे में अब रोजाना भिवानी से महम और वाया चंडीगढ़ तक जाने वाले सैकड़ों वाहनों की आवाजाही से सर्विस रोड की हालत भी खस्ता हो गई है। इस पर वाहन भी हिचकोला खा रहे हैं, कई बार तो वाहनों के पलटने की नौबत भी आई है, क्योंकि बारिश के बाद अधूरा पड़ा सर्विस रोड गहरे गड्ढों से घिर गया है।
भिवानी -महम मुख्य मार्ग पर कालुवास फाटक का रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम करीब 75 फीसदी पूरा हो चुका है। इस पुल में बिजली की कुछ लाइनें शिफ्ट हो चुकी हैं, लेकिन हवाई पट्टी की तरफ से हाईटेंशन लाइन अभी भी शिफ्ट होना बाकी है। इस संबंध में विभाग की इलेक्ट्रिक विंग बिजली निगम अधिकारियों से बातचीत कर इस लाइन को जल्द से जल्द शिफ्ट कराने का प्रयास कर रही है। जून तक इस रेलवे ओवरब्रिज को चालू कर दिया जाएगा।
-लोकेश डागर, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी भिवानी।