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भावी पीढ़ी के लिए इतिहास की घटनाओं को समझना जरूरी : इंद्रेश
Mon, 21 Aug 2023 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 21 Aug 2023 01:28 AM IST
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भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में इतिहास की पुस्तकों का विमोचन करते इंद्रेश व डॉ वीपी
भिवानी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि एक स्वाधीन और संप्रभु राष्ट्र में भावी पीढ़ी के लिए विद्यालयी शिक्षा के दौरान इतिहास की घटनाओं को समझना बहुत जरूरी है, ताकि उनमें राष्ट्र भक्ति व राष्ट्र प्रेम की भावना पैदा हो सके। बोर्ड द्वारा तैयार करवाई गई पाठ्यपुस्तकें अध्ययन-अध्यापन के साथ-साथ छात्रों के व्यक्तित्व के चहुंमुखी विकास में प्रभावशाली मार्गदर्शन करेगी। वे रविवार को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड मुख्यालय पर बतौर मुख्य अतिथि संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड मुख्यालय पर रविवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बैनर तले इतिहास बोध को लेकर संगोष्ठी हुई। विशिष्ट अतिथि के तौर पर सीबीएलयू के कुलपति प्रो आरके मित्तल, पूर्व राज्य सूचना आयुक्त भूपेन्द्र धर्माणी, डॉ रविप्रकाश इतिहास प्रोफेसर मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड अध्यक्ष डॉ. वीपी यादव ने की। इस अवसर पर इतिहासकारों व विद्वानों ने अपने-अपने विचार रखे और इतिहास विषय को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ वीपी यादव ने कहा कि इतिहास की नई पुस्तकों का लेखन विषय विशेषज्ञों, इतिहासकारों द्वारा सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पूर्व में इतिहास की पुस्तकों में हमारे मूल इतिहास को उचित स्थान नहीं मिल पाया था। शिक्षा नीति-2020 के निर्देशों की अनुपालना में इतिहास की इन पुस्तकों के माध्यम से करने का सार्थक प्रयत्न किया गया है।
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प्रो आरके मित्तल ने बताया कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के अनुरूप पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण वनवासी गिरी वासी सभी भूभागों से संबंधित घटनाओं और व्यक्तियों को नई पुस्तकों में यथेष्ठ स्थान देने की कोशिश की गई। डॉ रवि प्रकाश ने कहा कि हरियाणा प्रांत की गौरवशाली परंपरा का इतिहास हमें जानना जरूरी है, यहां की समृद्ध संस्कृति, वेदों व श्रीमद्भगवदगीता की रचना इस पावन धरा पर हुई, सेना में यहां के वीर जवान बहुतायत में भर्ती होते है तथा खेलों की दुनिया में तो हरियाणा ने अपना परचम लहराया हुआ है। उन्होंने बताया कि इन नवीन पुस्तकों में इतिहास का समग्र व व्यापक रूप से उल्लेख किया गया है। पहले की पुस्तकों में सिन्धु घाटी सभ्यता से ही भारतीय इतिहास लिखा जाता रहा है किन्तु सरस्वती नदी का उल्लेख नहीं है। नवीन पुस्तकों में सरस्वती-सिन्धु सभ्यता को विस्तार से वर्णित किया है। प्राचीन विश्व की प्रमुख घटनाओं, विश्व के प्रमुख दर्शन के अलावा मध्यकालीन यूरोप व भारत, ईसाइयत एवं इस्लाम, भारत पर विदेशी आक्रमण, उपनिवेशवाद व साम्राज्यवाद, भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के अलावा स्वतंत्र भारत के 50 वर्षों की भी इतिहास की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
बोर्ड सचिव कृष्ण कुमार ने कहा कि शिक्षा बोर्ड द्वारा कक्षा छठी से दसवीं तक के इतिहास की पुस्तकों के पाठ्यक्रम में बड़े स्तर पर बदलाव करते हुए नई पुस्तकें लिखवाई गई। उन्होंने कहा जो देश अपनी संस्कृति व इतिहास को भूल जाता है वह अपना स्वाभिमान खो देता है। इतिहास की नवीन पुस्तकों में भारतीय सभ्यता, इतिहास, संस्कृति, साहित्य, देश-भक्तों, स्वाधीनता संग्राम व उसके ज्ञात-अज्ञात वीरों, सन 1947 के बाद के भारत की प्रमुख घटनाओं को सम्पूर्ण, समग्र व व्यापक रूप में सुंदर, चित्रों व बिल्कुल नए कलेवर के साथ प्रस्तुत किया गया है।
इस मौके पर डॉ मुरलीधर शास्त्री, प्रवक्ता संस्कृत का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में बोर्ड संयुक्त सचिव डॉ पवन कुमार शर्मा ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड मुख्यालय पर रविवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बैनर तले इतिहास बोध को लेकर संगोष्ठी हुई। विशिष्ट अतिथि के तौर पर सीबीएलयू के कुलपति प्रो आरके मित्तल, पूर्व राज्य सूचना आयुक्त भूपेन्द्र धर्माणी, डॉ रविप्रकाश इतिहास प्रोफेसर मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड अध्यक्ष डॉ. वीपी यादव ने की। इस अवसर पर इतिहासकारों व विद्वानों ने अपने-अपने विचार रखे और इतिहास विषय को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया।
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ वीपी यादव ने कहा कि इतिहास की नई पुस्तकों का लेखन विषय विशेषज्ञों, इतिहासकारों द्वारा सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। पूर्व में इतिहास की पुस्तकों में हमारे मूल इतिहास को उचित स्थान नहीं मिल पाया था। शिक्षा नीति-2020 के निर्देशों की अनुपालना में इतिहास की इन पुस्तकों के माध्यम से करने का सार्थक प्रयत्न किया गया है।
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प्रो आरके मित्तल ने बताया कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के अनुरूप पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण वनवासी गिरी वासी सभी भूभागों से संबंधित घटनाओं और व्यक्तियों को नई पुस्तकों में यथेष्ठ स्थान देने की कोशिश की गई। डॉ रवि प्रकाश ने कहा कि हरियाणा प्रांत की गौरवशाली परंपरा का इतिहास हमें जानना जरूरी है, यहां की समृद्ध संस्कृति, वेदों व श्रीमद्भगवदगीता की रचना इस पावन धरा पर हुई, सेना में यहां के वीर जवान बहुतायत में भर्ती होते है तथा खेलों की दुनिया में तो हरियाणा ने अपना परचम लहराया हुआ है। उन्होंने बताया कि इन नवीन पुस्तकों में इतिहास का समग्र व व्यापक रूप से उल्लेख किया गया है। पहले की पुस्तकों में सिन्धु घाटी सभ्यता से ही भारतीय इतिहास लिखा जाता रहा है किन्तु सरस्वती नदी का उल्लेख नहीं है। नवीन पुस्तकों में सरस्वती-सिन्धु सभ्यता को विस्तार से वर्णित किया है। प्राचीन विश्व की प्रमुख घटनाओं, विश्व के प्रमुख दर्शन के अलावा मध्यकालीन यूरोप व भारत, ईसाइयत एवं इस्लाम, भारत पर विदेशी आक्रमण, उपनिवेशवाद व साम्राज्यवाद, भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के अलावा स्वतंत्र भारत के 50 वर्षों की भी इतिहास की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
बोर्ड सचिव कृष्ण कुमार ने कहा कि शिक्षा बोर्ड द्वारा कक्षा छठी से दसवीं तक के इतिहास की पुस्तकों के पाठ्यक्रम में बड़े स्तर पर बदलाव करते हुए नई पुस्तकें लिखवाई गई। उन्होंने कहा जो देश अपनी संस्कृति व इतिहास को भूल जाता है वह अपना स्वाभिमान खो देता है। इतिहास की नवीन पुस्तकों में भारतीय सभ्यता, इतिहास, संस्कृति, साहित्य, देश-भक्तों, स्वाधीनता संग्राम व उसके ज्ञात-अज्ञात वीरों, सन 1947 के बाद के भारत की प्रमुख घटनाओं को सम्पूर्ण, समग्र व व्यापक रूप में सुंदर, चित्रों व बिल्कुल नए कलेवर के साथ प्रस्तुत किया गया है।
इस मौके पर डॉ मुरलीधर शास्त्री, प्रवक्ता संस्कृत का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में बोर्ड संयुक्त सचिव डॉ पवन कुमार शर्मा ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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