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Bhiwani News: बरसाती कुंड मामले में अब हाईकोर्ट ने दिए डीसी को जांच कराने के आदेश
Fri, 23 Jan 2026 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 23 Jan 2026 02:09 AM IST
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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का आदेश।
भिवानी। दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709 ई पर कुसुंभी मोड़ के पास अंग्रेजी हुकूमत के दौरान करीब 120 साल पुराने ऐतिहासिक बरसाती कुंड को खुर्द-बुर्द कर भूमि हड़पने के मामले में अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने भिवानी उपायुक्त को जांच के आदेश दिए हैं। ये आदेश हाई कोर्ट ने 21 जनवरी 2026 को दिए हैं।
हालांकि इस मामले में पहले भी स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो हिसार के पुलिस अधीक्षक की तरफ से भिवानी उपायुक्त को जांच की अनुशंसा भेजी गई थी। लेकिन इस मामले में प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी के चलते अब ऐतिहासिक बरसाती कुंड भूमि को करीब 120 साल पहले दान में देने वाले मंगल सिंह के परपौत्र गांव देवसर निवासी राजेश चौहान ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद हाई कोर्ट ने इसमें संज्ञान लेते हुए भिवानी डीसी को ये आदेश दिए हैं।
गांव देवसर निवासी राजेश चौहान ने बताया कि उसके परदादा एवं पूर्वज मंगल सिंह चौहान ने 11 जून 1910 में हिब्बानामा से करीब सवा एकड़ भूमि लुधियाना के टोडरमल महाजन को धर्मार्थ के लिए दान में दी थी। जिसमें बरसाती कुंड और मुसाफिरों और व्यापारियों के लिए विश्राम कक्षों का निर्माण कराया गया था। ऐतिहासिक कुंड का अस्तित्व मिटाकर तहसील अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से कुंड को खुर्द-बुर्द कर दिया गया। जबकि पूरी भूमि की चहारदीवारी करा दी गई। ये भूमि राजस्व विभाग में आज भी बरसाती कुंड के नाम से दर्ज है। राजेश चौहान ने अपने पूर्वजों द्वारा दान में दी गई भूमि को तहसील अधिकारियों की मिलीभगत से बेचे जाने के मामले में सेल डीड रद्द कराने और इसमें शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई कराए जाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दी गई।
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इससे पहले स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार की तरफ से भी संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई थी। जिसमें एंटी करप्शन की तरफ से इस मामले की जांच डीसी पानीपत को भेजी गई, वहीं एंटी करप्शन ब्यूरो हिसार के एसपी की तरफ से डीसी भिवानी को जांच की अनुशंसा की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शिवकुमार राणा ने बताया कि 21 जनवरी बुधवार को इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए कड़ा संज्ञान लेते हुए डीसी भिवानी को जांच के आदेश दिए हैं।
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हालांकि इस मामले में पहले भी स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो हिसार के पुलिस अधीक्षक की तरफ से भिवानी उपायुक्त को जांच की अनुशंसा भेजी गई थी। लेकिन इस मामले में प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी के चलते अब ऐतिहासिक बरसाती कुंड भूमि को करीब 120 साल पहले दान में देने वाले मंगल सिंह के परपौत्र गांव देवसर निवासी राजेश चौहान ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद हाई कोर्ट ने इसमें संज्ञान लेते हुए भिवानी डीसी को ये आदेश दिए हैं।
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गांव देवसर निवासी राजेश चौहान ने बताया कि उसके परदादा एवं पूर्वज मंगल सिंह चौहान ने 11 जून 1910 में हिब्बानामा से करीब सवा एकड़ भूमि लुधियाना के टोडरमल महाजन को धर्मार्थ के लिए दान में दी थी। जिसमें बरसाती कुंड और मुसाफिरों और व्यापारियों के लिए विश्राम कक्षों का निर्माण कराया गया था। ऐतिहासिक कुंड का अस्तित्व मिटाकर तहसील अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से कुंड को खुर्द-बुर्द कर दिया गया। जबकि पूरी भूमि की चहारदीवारी करा दी गई। ये भूमि राजस्व विभाग में आज भी बरसाती कुंड के नाम से दर्ज है। राजेश चौहान ने अपने पूर्वजों द्वारा दान में दी गई भूमि को तहसील अधिकारियों की मिलीभगत से बेचे जाने के मामले में सेल डीड रद्द कराने और इसमें शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई कराए जाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दी गई।
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इससे पहले स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार की तरफ से भी संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई थी। जिसमें एंटी करप्शन की तरफ से इस मामले की जांच डीसी पानीपत को भेजी गई, वहीं एंटी करप्शन ब्यूरो हिसार के एसपी की तरफ से डीसी भिवानी को जांच की अनुशंसा की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता शिवकुमार राणा ने बताया कि 21 जनवरी बुधवार को इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए कड़ा संज्ञान लेते हुए डीसी भिवानी को जांच के आदेश दिए हैं।